भारत में डीजल कारों को लेकर कई सालों से यह चर्चा चल रही है कि क्या इनका दौर खत्म हो रहा है, लेकिन FY2026 के आंकड़े कुछ अलग ही कहानी बताते हैं। डीजल कारें भले ही पहले जैसी 'मास मार्केट' पसंद नहीं रहीं, लेकिन SUV और यूटिलिटी वाहनों में इनकी पकड़ अभी भी बेहद मजबूत है। रिपोर्ट के मुताबिक FY2026 में डीजल कारों का बाजार पूरी तरह SUV-केंद्रित हो गया है। यानी अब डीजल का इस्तेमाल ज्यादा पावर, लंबी दूरी और भारी उपयोग के लिए हो रहा है, न कि छोटे शहरों के रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए।

 

SUV सेगमेंट ने बचाई डीजल की जान

अगर FY2026 की बात करें, तो डीजल कारों की बिक्री में सबसे बड़ा योगदान SUV सेगमेंट का रहा। आज ज्यादातर डीजल गाड़ियां SUV या बड़े यूटिलिटी वाहनों में ही देखने को मिलती हैं। इसका कारण साफ है, डीजल इंजन ज्यादा टॉर्क देता है, जिससे हाईवे ड्राइविंग और भारी लोड में बेहतर परफॉर्मेंस मिलती है। यही वजह है कि ग्रामीण इलाकों, लंबी दूरी तय करने वाले ग्राहकों और कमर्शियल उपयोग में डीजल कारों की मांग अभी भी बनी हुई है।

 

क्यों लोग अब भी खरीद रहे हैं डीजल कार?

हालांकि CNG और इलेक्ट्रिक गाड़ियों का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है, फिर भी डीजल कारों की अपनी खास जगह है। पहला कारण है माइलेज और एफिशिएंसी। लंबी दूरी पर डीजल इंजन ज्यादा किफायती साबित होता है। दूसरा कारण है पावर। डीजल गाड़ियों में मिलने वाला टॉर्क पहाड़ी और खराब रास्तों पर बेहतर ड्राइविंग अनुभव देता है। तीसरा बड़ा कारण है टिकाऊपन। डीजल इंजन आमतौर पर ज्यादा लंबे समय तक चलते हैं, जिससे यह कमर्शियल उपयोग के लिए भी बेहतर विकल्प बनते हैं।

 

CNG और EV से मिल रही टक्कर

FY2026 में एक बड़ा बदलाव यह देखने को मिला कि CNG कारों ने डीजल को पीछे छोड़ दिया। CNG गाड़ियों की बिक्री तेजी से बढ़ रही है और यह अब कुल पैसेंजर व्हीकल मार्केट का बड़ा हिस्सा बन चुकी हैं। इसके अलावा इलेक्ट्रिक व्हीकल्स भी धीरे-धीरे अपनी जगह बना रहे हैं। हालांकि अभी इनका मार्केट शेयर कम है, लेकिन भविष्य में यह डीजल के लिए बड़ी चुनौती बन सकते हैं।

 

टॉप सेलिंग डीजल कारों में कौन हैं आगे?

FY2026 में जिन डीजल कारों ने सबसे ज्यादा बिक्री की, उनमें ज्यादातर SUV और बड़े वाहन शामिल रहे। इस लिस्ट में आमतौर पर मिड-साइज और फुल-साइज SUVs का दबदबा देखने को मिला।

Mahindra Scorpio, Mahindra Bolero, Hyundai Creta और Tata Nexon जैसे मॉडल इस सेगमेंट में लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। SUV सेगमेंट की बढ़ती लोकप्रियता ने डीजल कारों को जिंदा रखा है, क्योंकि इन गाड़ियों में डीजल इंजन ज्यादा उपयुक्त माना जाता है।

Mahindra Scorpio

महिंद्रा स्कॉर्पियो का डीजल इंजन मजबूत टॉर्क और दमदार परफॉर्मेंस देता है, जो इसे खराब रास्तों और लंबी दूरी के लिए आदर्श बनाता है। यह SUV पावर और रफ-टफ ड्राइविंग के लिए जानी जाती है।

Mahindra Bolero

महिंद्रा बोलेरो का डीजल इंजन भरोसेमंद और टिकाऊ माना जाता है, जो ग्रामीण और कमर्शियल उपयोग के लिए परफेक्ट है। इसकी माइलेज और मजबूती इसे लंबे समय तक इस्तेमाल के लिए लोकप्रिय बनाती है।

Hyundai Creta

हुंडई क्रेटा का डीजल वेरिएंट स्मूद ड्राइविंग और बेहतरीन माइलेज के लिए जाना जाता है। यह शहर और हाईवे दोनों के लिए संतुलित परफॉर्मेंस देता है, जिससे यह फैमिली SUV के रूप में काफी पसंद की जाती है।

Tata Nexon

टाटा नेक्सन का डीजल इंजन अच्छा माइलेज और मजबूत टॉर्क प्रदान करता है, जिससे यह रोजमर्रा और लंबी दूरी दोनों के लिए उपयुक्त है। इसकी सेफ्टी और परफॉर्मेंस इसे एक भरोसेमंद कॉम्पैक्ट SUV बनाती है।

 

छोटे सेगमेंट में डीजल लगभग खत्म

अगर आप ध्यान दें, तो आजकल छोटे हैचबैक और सेडान में डीजल ऑप्शन लगभग गायब हो चुका है। कार कंपनियां अब इन सेगमेंट में पेट्रोल और CNG पर ज्यादा फोकस कर रही हैं। इसका कारण है बढ़ती लागत, सख्त BS6 नियम और कम मांग। यही वजह है कि डीजल अब ‘प्रीमियम और यूटिलिटी’ सेगमेंट तक सीमित होता जा रहा है।

 

बाजार का नया ट्रेंड है ‘नीड बेस्ड फ्यूल’

आज के समय में ग्राहक एक ही फ्यूल पर निर्भर नहीं रहना चाहते। जो लोग शहर में ज्यादा ड्राइव करते हैं, वे CNG या पेट्रोल चुनते हैं। जो लोग लंबी दूरी तय करते हैं या ज्यादा पावर चाहते हैं, वे डीजल को प्राथमिकता देते हैं। इस तरह अब कार खरीदना पूरी तरह 'यूज केस' यानी जरूरत पर आधारित हो गया है।

 

कंपनियों की रणनीति भी बदली

ऑटो कंपनियां भी अब डीजल को लेकर अपनी रणनीति बदल चुकी हैं। वे छोटे सेगमेंट में डीजल को धीरे-धीरे बंद कर रही हैं, लेकिन SUV और बड़े वाहनों में इसे बनाए रख रही हैं। इससे कंपनियां लागत भी नियंत्रित कर पा रही हैं और सही ग्राहकों को सही प्रोडक्ट भी दे रही हैं।

 

क्या भविष्य में खत्म हो जाएगा डीजल?

यह कहना गलत होगा कि डीजल पूरी तरह खत्म हो जाएगा। हालांकि इसका मार्केट शेयर जरूर कम हो सकता है, लेकिन SUV और कमर्शियल सेगमेंट में इसकी मांग बनी रहेगी। जब तक लंबी दूरी और पावर की जरूरत बनी रहेगी, तब तक डीजल का अस्तित्व भी बना रहेगा।

 

ग्राहकों के लिए क्या है सही विकल्प?

अगर आप कार खरीदने का सोच रहे हैं, तो सबसे पहले अपनी जरूरत समझना जरूरी है। अगर आपका उपयोग शहर तक सीमित है, तो पेट्रोल या CNG बेहतर विकल्प हो सकता है। लेकिन अगर आप लंबी दूरी तय करते हैं, पहाड़ी इलाकों में चलते हैं या ज्यादा पावर चाहते हैं, तो डीजल अभी भी एक मजबूत विकल्प है।

FY2026 ने यह साफ कर दिया है कि डीजल कारें खत्म नहीं हुई हैं, बल्कि उनका रोल बदल गया है। अब यह 'हर किसी की कार' नहीं, बल्कि 'स्पेसिफिक जरूरत' वाली कार बन चुकी है। SUV सेगमेंट में डीजल का दबदबा आज भी कायम है और आने वाले समय में भी यह अपनी खास जगह बनाए रखेगा, यानी, डीजल का दौर खत्म नहीं हुआ है, बस उसका अंदाज बदल गया है।