राजस्थान का कुलधारा गांव जिसके ऊपर एक बॉलीवुड मूवी कालू बन चुकी है। फिलहाल ये गांव एक टूरिस्ट स्पॉट में तब्दील हो गया है लेकिन भूलकर भी रात के अंधेरे में यहां एंट्री allow नहीं है। अगर आप यहां छुप छुपाकर रात में रुकते हैं तो ध्यान रखें आपकी जान खतरे में है। आज हम आपको इस गांव की पूरी कहानी बताने वाले हैं।
राजस्थान की रेत में बसी सदियों पुरानी कहानियां हर किसी को अपनी ओर आकर्षित करती आई है। वैसी ही कहानी है राजस्थान के जैसलमेर में स्थित कुलधरा गांव की। जैसलमेर से 30 किमी की दूरी पर स्थित ये गांव वीरान खंडहरों में तब्दील हो चुकी है।
कुलधरा की कहानी
ये गांव 200 साल पहले अचानक खाली कर दिया गया। कहा जाता है कि यहां रहने वाले पालीवाल ब्राह्मण एक ही रात में गांव छोड़कर चले गए। लोगों का कहना है कि जैसलमेर के तत्कालीन दीवान की बुरी नजर गांव की एक लड़की पर थी। ऐसे में अपनी गांव की लड़की को बचाने के लिए ये गांव एक ही रात में खाली कर दिया गए। जब सभी लोग गांव छोड़ रहे थे तो गांव छोड़ते वक्त सभी ने श्राप दिया कि इस गांव में दोबारा कोई बस नहीं पाएगा।
आपको बता दें, आज भी रात में यहां से चीखने और चिल्लाने की आवाजें आती है, कई बार लोगों ने यहां आत्माओं को महसूस भी किया। पैरानॉर्मल की टीम भी यहां पर कई भूतिया तस्वीरों को कैप्चर कर चुकी है। यही वजह है कि दिन में लाखों पर्यटक यहां आते हैं, घूमती है लेकिन रात होते ही ये जगह वीरान हो जाती है, इस गांव में फिर किसी की एंट्री नहीं होती।
अगर कोई पर्यटक नियमों को तोड़कर यहां रात गुजारने की सोचता है तो उसकी जान खतरे में पड़ जाती है।
फिल्म 'कालू' प्रेरित है इसी कहानी से
बॉलीवुड फिल्म 'कालू' कुलधरा की इसी कहानी से प्रेरित है। आज ये गांव एतिहासिक टूरिस्ट प्लेस बन चुका है। अगर आप भी यहां घूमने का प्लान बना रहे हैं तो अपने परिवार के साथ जरूर आइए लेकिन भूलकर भी नियम विरुद्ध जाकर रात गुजारने की गलती मत करना।









