आज के समय में सोने की कीमतें आसमान छू रही है। मिडिल क्लास फैमिली और गरीब परिवार तो अब सोना खरीदने के बारे में सोच ही नहीं रहा। लेकिन आज आपको ये जानकर आश्चर्य होगा कि भारत बहुत पहले एक ऐसे युग में था जब खरीददारी के लिए सिर्फ सोने के सिक्के ही उपयोग किए जाते थे। आज हम आपको इसी विशेष युग की सैर कराएंगे और बताएंगे कि पहले ऐसी कौन-कौन सी घटकें थी जो उस युग को सबसे अलग बनाती है। भारत में कहां-कहां सोने के सिक्कों का इस्तेमाल होता था, ये भी बताएंगे कि कैसे ये चलन आगे बढ़ा और कहां से ये चलन अस्तित्व में आया। अंत में ये भी जानेंगे कि भारत में ये बदलाव कैसे हुए ?

 

...इसलिए होता था सोने का इस्तेमाल

 

आज भले ही सोने की कीमत लाखों में है लेकिन पहले तो सोना हर घर में भरपुर था। इसी कारण देशभक्ति गाने में आपको सुनने को मिलता है- 'जहां डाल-डाल पर सोने की चिड़िया करती है बसेरा...वो भारत देश है मेरा...वो भारत देश है मेरा।' आधुनिक युग में लोगों के पास कागज वाले नोट भी नहीं मिलते। जब से डिजिटल पेमेंट का दौर चलन में आया है कइयों ने शायद महीनों से कागज के नोट इस्तेमाल तक नहीं किए होंगे। प्राचीन काल में जब न तो बैंक थे न ही कोई कागजी नोट तो उस वक्त आज का सबसे महंगा सोना था जो खरीदारी का सामान्य माध्यम था। वहीं सोना जिसकी कीमत आज लाखों में है। सोने के सिक्कों के कई फायदे थे। न ही समय के साथ इनका मूल्य घटता था और न ही इसकी खूबसूरती। ये लंबे समय तक मजबूत और टिकाऊ सिक्के होते थे। अत: राजाओं से लेकर आम जनता तक सबके लिए सोना सुरक्षित संपत्ति और लेनदेन का साधन बन गया था। 

 

सोने के सिक्के उपयोग में कैसे आएं ? 

 

भारत में सोने के सिक्कों के आगमन का एक अलग इतिहास है। कहा जाता है कि इसका प्रचलन गुप्त काल के दौरान ज्यादा देखने को मिलता था। हालांकि इससे पहले भी इनका प्रयोग था लेकिन कम था। गुप्त शासकों के काल में बड़े पैमाने पर शुद्ध और कलात्मक सोने के सिक्के जारी करने के अवशेष मिलते हैं। उस वक्त के सोने के सिक्कों पर राजाओं की तस्वीरें, देवी-देवताओं के चित्र और संस्कृत लेख अंकित होते थे। इससे न केवल मुद्रा की विश्वसनीयता बढ़ी, बल्कि ये सिक्के सत्ता और समृद्धि का प्रतीक भी बन गए। आज के वक्त में ये सिक्के पुरात्वविदों को ये जानने में मदद करती है कि किस वक्त किस राजा का शासन था। 

 

भारत कैसा था जब सोने के सिक्के उपयोग करता था? 

 

गुप्तवंश काल में जब भारत में सोने के सिक्के बड़े पैमाने पर उपयोग होते थे तो भारत आज से बिल्कुल अलग था। ये कहना गलत नहीं होगी कि भारत उस वक्त बहुत अमीर देश हुआ करता था। उस वक्त भारत में आर्थिक स्थिरता थी। उस वक्त बाजार में महंगाई लगभग नहीं के बराबर थी। राजा और जनता दोनों चैन से जीते थे। चूंकि ये सिक्के केवल शक्तिशाली और स्थिर राजाओं द्वारा जारी किए जाते थे जिससे सिक्कों पर भरोसा बना रहा था। आज की तरह जैसे नकली नोटों की समस्या उस वक्त थी ही नहीं। भारतीय सोने के सिक्के विदेशों में भी मान्य थे। ऐसे में अपना विदेशी व्यापार भी अच्छा चलता था। उस समय सोने की शुद्धता से कोई समझौता नहीं किया जाता था यानि एकदम नंबर वन क्लालिटी के सोने मिलते थे। 

 

भारत में यहां-यहां इस्तेमाल होते थे सोने के सिक्के 

 

गुप्तवंश में सोने के सिक्कों का इस्तेमाल मुख्य रूप से खरीदारी के लिए होता था। ये महंगे सिक्के सिर्फ राजमहलों या अमीर व्यापारियों तक सीमित नहीं थे बल्कि समाज के हर स्तर तक इनकी पहुंच थी। बड़े सौदे, जमीन-जायदाद की खरीद और अंतरराज्यीय व्यापार के लिए नोटों की जगह सोने के सिक्के इस्तेमाल होते थे। इतना ही नहीं किसान और व्यापारी राजा को टैक्स के रूप में सोने के सिक्के ही देते थे। मंदिरों, आश्रमों और धार्मिक संस्थानों में दान-पुण्य सोने के सिक्कों से की जाती थी। वहीं उस वक्त विवाह के समय कन्या को सोने के सिक्के देना आम बात थी।

 

आम जनता कैसे करते थे सोने के सिक्कों का उपयोग 

 

आज के समय में जहां सोना आम आदमी की पहुंच से दूर है, वहीं उस दौर में सोना लोगों के लिए बचत और विपदा में एकमात्र सहारे जैसा था। लोग अपनी मेहनत की कमाई को सोने के सिक्कों में सुरक्षित रखते थे, क्योंकि उन्हें पता था कि इसका मूल्य कभी खत्म नहीं होगा। ऐसे में उस दौर में लोगों को आपदा से निकलने में उतनी कठीनाई नहीं होती थी जितनी आज होती है। 

 

फिर अचानक ऐसे पलटी सोने के सिक्कों की कहानी

 

 

 

गुप्तवंश के बाद भारत में सोने के सिक्कों के उपयोग में धीरे-धीर बदलाव आने लगा। विदेशी आक्रमण, राजनीतिक अस्थिरता और युद्धों ने भारतीय अर्थव्यवस्था को धीरे-धीरे कमजोर किया। युद्ध का सामान और सुरक्षा उपकरण खरीदते-खरीदते सोने का भंडार धीरे-धीरे कम होने लगा। इसके बाद चांदी के सिक्कों और फिर कागजी मुद्रा का चलन शुरू हुआ। फिर ब्रिटिश शासन के दौरान एक बड़ा बदलाव आया जहां भारत की पारंपरिक मुद्रा व्यवस्था को अंग्रेजों ने हमेशा-हमेशा के लिए बदल दिया। तब से सोने के सिक्कों का युग लगभग समाप्त हो गया।

 

आज के दौर में उस युग को याद करते हैं लोग

 

सोने के सिक्कों का इतिहास भारत के प्राचीन ऐतिहासिक समृद्धि को दर्शाने के लिए काफी है। लेकिन जैसे-जैसे राजा और प्रशासन में बदलाव आते गए, भारत की अर्थव्यवस्था कमजोर होने लगी। गुप्तवंश के बाद से ये परिवर्तन शुरू हुआ। अब वो दौर आ चुका है जब कागज के नोटों की भी नकली कॉपी बाजार में आ गई है। पहले कहां भारत सोने की चिड़िया कहा जाता था और आज नकली नोटों की जाल में फंस गया।

 

आज के दौर में तो सोना इतना महंगा हो गया है कि मिडिल क्लास परिवार की पहुंच से बाहर हो रहा है...गरीबों को तो छोड़ ही दीजिए। लेकिन जो भी हो सोने पर लोगों का भरोसा आज भी उतनी ही अटूट है जितना पहले थे...लेकिन पहुंच से बाहर होने के कारण इसके उपयोग में कमी आ गई है।