4 February 2026
इस्लाम में शब-ए-बारात को बड़ा ही पवित्र त्योहार माना जाता है। इस त्योहार पर मुस्लिम समुदाय से जुड़े लोग अपनी भूल के लिए माफी, दुआएं और दान-पुण्य करते हैं।
रमजान शुरू होने से ठीक 15 दिन पहले मनाया जाने वाला यह पर्व इस्लामिक कैलेंडर के आठवें महीने शाबान की 14वीं और 15वीं रात को अल्लाह की बरकत और गुनाहों के लिए माफी की रात के रूप में जाना जाता है।
यह तारीख इस्लामिक कैलेंडर के शाबान महीने की 14वीं और 15वीं रात के बीच आती है और चांद दिखने पर अंतिम रूप से तय होती है।
इंडो इस्लामिक स्कॉलर गुलाम रसूल देहलवी के अनुसार शब-ए-बारात का मतलब है मुक्ति की रात। वह रात जिसमें अल्लाह अपने फरिश्तों को दुनिया के आसमान पर उन लोगों के लिए भेजता है, जो पापों से मुक्ति चाहते हैं।
उनके लिए इस दिन दरवाजे खोल दिये जाते हैं ताकि वे जहन्नुम से छुटकारे के लिए दुआ कर सकें। इस पर्व पर रात में इबादत करना मान्यता है क्योंकि यह माना जाता है कि इस समय अल्लाह अपनी कृपा और दया बरसाता है।
गुलाम रसूल देहवली के अनुसार भारत की सूफी परंपरा से जुड़े लोग इस त्यौहार को जश्न के रूप में मनाते हैं। इस दिन मस्जिदों में रौनक होती है। इस त्यौहार पर विशेष रूप से हलवा बनाकर बांटा जाता है।
शब-ए-बारात का अर्थ और महत्व'शब' का मतलब रात और 'बारात' का अर्थ माफी या मुक्ति होता है।इसलिए इसे शब-ए-बारात कहा जाता है, यानी गुनाहों से आजाद वाली रात।