आज साल का पहला त्योहार मकर संक्रांति की धूम है, इस दिन देशभर में लोग स्वादिष्ट व्यंजन से लेकर तरह-तरह के तिल के पकवान बनाकर खाते हैं और दान पुण्य करते हैं। साथ ही साथ इस दिन पतंगबाजी का अपना एक अलग महत्व है। हर साल 14 फरवरी को आसमान आपको रंग-बिरंगे पतंगों से घिरा नजर आता है। मकर संक्रांति पर पतंगबाजी के पीछे कई धार्मिक, सांस्कृतिक और वैज्ञानिक कारण छिपे हुए हैं। 

 

मकर संक्रांति के दिन पतंगबाजी का महत्व 

 

हिंदू कैलेंडर के मुताबिक, मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव अयुष्य की उत्तर दिशा यानी मकर राशि में प्रवेश करते हैं। इसे उत्तरायण कहा जाता है। ये सर्दियों के अंत और गर्मियों की ओर बढ़ते मौसम का प्रतीक है। इस दिन पृथ्वी पर सूर्य की किरणें अधिक समय तक रहती हैं जो स्वास्थ्य और कृषि दोनों के लिए फायदेमंद है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो सर्दियों में पतंग उड़ाने से शरीर को लंबे समय तक धूप मिलता है, जिससे विटामिन-D का उत्पादन बढ़ता है और प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत होती है। खुले वातावरण में समय बिताने से तनाव भी कम होता है। पतंगबाजी के दौरान कुछ सावधानियां भी बरतनी जरूरी हैं। ध्यान रखें कि चाइनीज मांझे का उपयोग न करें। ये पक्षियों और लोगों के लिए खतरनाक होता है। 

 

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। कहा जाता है कि भगवान श्रीराम ने त्रेतायुग में इसी दिन पतंग उड़ाई थी और तब से ये रिवाज चला आ रहा है। पतंग को खुशहाली, स्वतंत्रता और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक भी माना जाता है। पतंग उड़ाना सिर्फ खेल या मनोरंजन से ही जुड़ा नहीं है, बल्कि ये सामाजिक एकता और उत्साह का प्रतीक है। इस दिन परिवार, दोस्त और पड़ोसी छतों पर एक साथ इकट्ठा होकर पतंगों का आनंद लेते हैं।