अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में एक बयान में कहा है कि ग्रीनलैंड को अमेरिका के नियंत्रण में लाना जरूरी है ताकि रूस और चीन जैसी शक्तियां वहां प्रभाव न बढ़ा सकें। उन्होंने कहा कि अगर आसान तरीके से ग्रीनलैंड हासिल नहीं हुआ तो मुश्किल रास्ता अपनाया जा सकता है, इसका मतलब साफ तौर पर है कि ग्रीनलैंड को अपनाने के लिए अमेरिका हर विकल्प पर विचार कर रहा है।
...इसलिए ट्रंप चाहते हैं पूरा ग्रीनलैंड
ट्रंप का तर्क है कि ग्रीनलैंड की रणनीतिक स्थिति और खनिज संपदा अमेरिका के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। ये विशाल बर्फीला द्वीप उत्तरी अटलांटिक और आर्कटिक महासागरों के बीच स्थित है, जो इसे भू-राजनीतिक दृष्टि से बेहद अहम बनाता है।
ट्रंप का कहना है कि ग्रीनलैंड में रेयर अर्थ मिनरल्स, यूरेनियम, तेल और अन्य महत्वपूर्ण खनिज मौजूद हैं, जिनका नियंत्रण चीन और रूस जैसे देशों को मिलने से रणनीति और सुरक्षा मामले और जटिल हो सकते हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि यहां से खनिज निकालना आसान नहीं है क्योंकि बर्फीली स्थिति, कठिन मौसम और बुनियादी अवसंरचना की कमी ग्रीनलैंड को निवेश के लिए चुनौतीपूर्ण बनाती है।
ट्रंप ने ये भी संकेत दिए है कि अमेरिका ग्रीनलैंड के निवासियों को प्रत्यक्ष आर्थिक प्रोत्साहन देने पर भी विचार कर रहा है, ताकि वे डेनमार्क से अलग होकर अमेरिका के साथ जुड़ने के पक्ष में हों। कहा जा रहा है कि कुछ योजनाओं में प्रति व्यक्ति $10,000 से $100,000 तक का प्रस्ताव शामिल हो सकता है, हालांकि अंतिम रूप दिया जाना बाकी है। डेनमार्क और ग्रीनलैंड दोनों ही स्पष्ट रूप से कह चुके हैं कि ‘ग्रीनलैंड न तो बिक सकता है और न ही उसके बारे में कोई निर्णय बाहरी ताकत ले सकती है।’ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री ने इस तरह के प्रस्तावों को खारिज करते हुए कहा है कि इसका भविष्य सिर्फ ग्रीनलैंड और डेनमार्क खुद तय करेंगे।
ये नाटो संबंधों को प्रभावित कर सकता है
यूरोपीय नेताओं ने भी संयुक्त बयान जारी कर कहा है कि ग्रीनलैंड पर किसी भी तरह का जबरन दावा उसकी सार्वभौमिक संप्रभुता का उल्लंघन करना होगा साथ ही ये नाटो-संबंधों को भी प्रभावित कर सकता है।









