राजधानी दिल्ली में डिजिटल अरेस्ट का जाल फैलता जा रहा है। एक सप्ताह के अंदर बुजुर्गों से 22 करोड़ की ठगी डिजिटल अरेस्ट के माध्यम से हुई। इस मामले ने सभी को चौंका दिया है। राजधानी में बढ़ते साइबर ठगी से निपटना आज बेहद जरूरी है। आज का ये मामला हमें बताएगा कि राजधानी दिल्ली जैसे बड़े शहर में ठगों तक पहुंचना कितना मुश्किल हो गया है। साथ ही साथ हम ये जानने की कोशिश करेंगे कि इनसे कैसे निपटा जाए।
क्या है डिजिटल अरेस्ट
दरअसल, डिजिटल अरेस्ट एक ऑनलाइन साइबर फ्रॉड की तकनीक है। डिजिटल अरेस्ट मामले में अक्सर देखा गया है कि ठग खुद को पुलिस, सीबीआई, ईडी या किसी सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताते हैं। लोगों को अधिकारी बनकर कॉल या वीडियो कॉल करते हैं और कानूनी कार्रवाई में फंसाने का झांसा देते हैं। ये बदमाश ये कहते हैं कि आपके खिलाफ कोई गंभीर मामले में वारंट जारी हुआ है। अगर आप हमारे साथ कार्रवाई में सहयोग नहीं करते तो आपको गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
ये बदमाश मासूम लोगों को वीडियो कॉल करके लंबे समय तक उसे डिजिटल अरेस्ट करके रखते हैं। फिर कंप्यूटर स्क्रीन के माध्यम से उनपर लगातार निगरानी करते हैं। ऐसे कठिन परिस्थिति में लोग बेहद डर जाते हैं और पैसे ट्रांसफर करने के लिए उन्हें मजबूर कर दिया जाता है।
राजधानी दिल्ली में ठगी का बड़ा जाल
कई सालों से राजधानी दिल्ली में फ्रॉड की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। एक मामला जो 2.2 करोड़ से भी अधिक की ठगी का है। जहां बदमाशों ने 78 साल के बुजुर्ग को ठगी का शिकार बनाया। बदमाश ने खुद को लखनऊ पुलिस और सीबीआई अधिकारी बताकर पीड़ित को डराया। घर पर ही डिजिटल अरेस्ट कर बड़ी राशि अपने खाते में ट्रांसफर करवा ली।
दूसरा मामला, NRI बुजुर्ग दंपति का है। इन्हें ब्लैकमेल करके लगभग 15 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी की गई। इन धोखेबाजों ने 2 हफ्ते तक बुजुर्ग दंपति को अरेस्ट करके रखा। साइबर ठग ये पैसे बाद में अलग अलग स्थानों पर अलग अलग अकाउंट्स में ट्रांसफर कर देते हैं। अन्य मामलों को भी जोड़े तो एक सप्ताह में लगभग 22 करोड़ से अधिक की ठगी सिर्फ और सिर्फ राजधानी दिल्ली में की गई है। चौंकाने वाली बात ये है कि ज्यादातर ठगी बुजुर्गों के साथ की गई है।
ऐसे बिछाते हैं ठगी का जाल और फिर बनाते हैं आपको शिकार
डिजिटल अरेस्ट को अंजाम देने वाले बदमाशों का बड़ा जाल राजधानी दिल्ली में हर घंटे ताक लगाए बैठा है। ये आपके फोन का डाटा, अकाउंट ट्रांजेक्शन सब कुछ दूर बैठे चेक कर लेता है, जैसे ही उसे लगता है आपके अकाउंट से बड़ी रकम उड़ाई जा सकती है ये आपको शिकार बनाने के लिए फिर जाल बिछाता है।
सबसे पहले ठग अधिकारी के नाम का फर्जी पहचान पत्र और सरकारी दस्तावेज तैयार करते हैं। इसके बाद बदमाश अपने शिकार को कॉल या वीडियो कॉल करते हैं और डिजिटल अरेस्ट करने की बात करते हैं। जिस दौरान उन्हें फोन का यूज करने से मना किया जाता है।
साइबर ठग तक पहुंच आखिर इतनी मुश्किल क्यों

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ये ठग अपनी जगह, मोबाइल फोन, अकाउंट डिटेल सब कुछ एक समय के बाद बदल लेते हैं। ऐसे में इनका कोई निश्चित डिटेल पुलिस वालों को मिल पाना बेहद मुश्किल होता है। अगर बहुत कोशिश के बाद साइबर ब्रांच को इनका अकाउंट डिटेल मिल भी जाए तो ये बदमाश ट्रांजेक्शन हिस्ट्री को छुपा लेते हैं। साइबर ठग अपनी असली पहचान कभी नहीं उजागर करते। ये सार्वजनिक जगहों पर फर्जी दस्तावेज का यूज करते हैं। ऐसे में उनकी असली पहचान नहीं हो पाती।
आम नागरिकों को ये सावधानियां रखनी होगी
विशेषज्ञों की मानें तो एक आम आदमी को आज के समय में बेहद सजग रहने की जरूरत है। यदि कोई अनजान नंबर से कॉल करके सरकारी अधिकारी होने का दावा करता है तो सावधान हो जाएं। कॉल आने पर घबराए नहीं। आधिकारिक दस्तावेज, वीडियो कॉल के डर से या फिर वारंट के डर से पैसे ट्रांजेक्शन न करें। बैंक का ओटीपी, डिटेल या कोई अन्य जानकारी नहीं साझा करें।
मामले में अब तक क्या कुछ हुआ
राजधानी दिल्ली में एक सप्ताह के अंदर 22 करोड़ की ठगी ने हर किसी को झकझोर दिया है। हालांकि दिल्ली पुलिस और साइबर क्राइम की टीम मामले में गंभीरता से जांच कर रही है। कई आरोपियों के खिलाफ पुलिस द्वारा छापेमारी और गिरफ्तारी भी की जा चुकी। अब इन आरोपियों के साथियों की तलाश जारी है साथ ही अकाउंट डिटेल्स और बैंकिंग फॉरेंसिक पर भी कार्रवाई हो.
डिजिटल स्कैम ने राजधानी दिल्ली में गढ़ बना लिया है। यदि आप जागरूक और सजग नहीं रहेंगे तो ये करोड़ों का नुकसान भी करवा सकती है। इन सावधानियों को अपनाकर आप अपना और अपनों का ख्याल रख सकते हैं।
क्यों फंसते हैं लोग डिजिटल अरेस्ट की जाल में
आपके दिमाग में यही बात आ रही होगी कि आखिर कोई इतना बेवकूफ कैसे बन सकता है लेकिन ये बात हर किसी को समझना पड़ेगा कि ये साइबर ठग बेहद ही चालाकी से आपका भरोसा जीत लेते हैं। जिसके बाद आपको धीरे धीरे अपनी जाल में फंसा सकते हैं। ऐसे में ये बेहद जरूरी है कि आपको यदि ऐसे किसी फ्रॉड का कॉल आए तो नजदीकी पुलिस सेंटर से संपर्क करें, साइबर ब्रांच को इसकी।जानकारी दे। अपना पर्सनल डिटेल शेयर करने से बचें।
जब आप सुरक्षित रहिएगा और बहुत हद तक आपका अकाउंट डिटेल्स और पासवर्ड सुरक्षित रहेगा। कृपया अपना फोन या ओटीपी किसी के साथ भी शेयर न करें। सावधान रहें, सुरक्षित रहें।









