कर्नाटक की राजनीति में गुरुवार सुबह बड़ा राजनीतिक ड्रामा देखने को मिला। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने अपने आवास पर मंत्रियों के साथ हुई ब्रेकफास्ट मीटिंग में इस्तीफे का ऐलान कर दिया। इस खबर के सामने आते ही पूरे राज्य की राजनीति गरमा गई और कांग्रेस के अंदर सत्ता परिवर्तन की चर्चाएं तेज हो गईं। रिपोर्ट्स के मुताबिक अब डिप्टी सीएम D. K. Shivakumar को नया मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है। 

कई महीनों से कर्नाटक कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर अटकलें चल रही थीं। कहा जा रहा था कि कांग्रेस हाईकमान ‘ढाई-ढाई साल’ वाले फॉर्मूले पर काम कर सकता है। अब सिद्धारमैया के इस्तीफे की घोषणा के बाद उन चर्चाओं को और हवा मिल गई है। 

 

ब्रेकफास्ट मीटिंग में हुआ बड़ा फैसला

गुरुवार सुबह बेंगलुरु स्थित मुख्यमंत्री आवास ‘कावेरी’ में अहम बैठक बुलाई गई थी। इसमें कई मंत्री और वरिष्ठ नेता मौजूद थे। इसी दौरान सिद्धारमैया ने अपने सहयोगियों को बताया कि वे मुख्यमंत्री पद छोड़ने जा रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक बैठक का माहौल काफी भावुक भी दिखाई दिया। कई नेताओं ने सिद्धारमैया के लंबे राजनीतिक अनुभव और योगदान की तारीफ की। इस दौरान डीके शिवकुमार और सिद्धारमैया के बीच गर्मजोशी भी देखने को मिली।

 

डीके शिवकुमार ने छुए सिद्धारमैया के पैर

इस पूरे घटनाक्रम की सबसे ज्यादा चर्चा उस तस्वीर की हो रही है जिसमें डीके शिवकुमार सिद्धारमैया के पैर छूते नजर आए। इसके बाद सिद्धारमैया ने उन्हें गले लगाया। यह वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गईं। कई लोग इसे सत्ता हस्तांतरण से पहले सम्मान और राजनीतिक संदेश के तौर पर देख रहे हैं। कांग्रेस समर्थकों ने इसे ‘एकता की तस्वीर’ बताया, जबकि विपक्ष इसे अंदरूनी समझौते का हिस्सा कह रहा है।

 

क्या पहले से तय था सत्ता बदलने का फॉर्मूला?

जब 2023 में कांग्रेस ने कर्नाटक विधानसभा चुनाव जीता था, तब मुख्यमंत्री पद को लेकर सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच काफी खींचतान चली थी। आखिरकार कांग्रेस हाईकमान ने सिद्धारमैया को मुख्यमंत्री और डीके शिवकुमार को डिप्टी सीएम बनाया।

उसी समय से यह चर्चा शुरू हो गई थी कि दोनों नेताओं के बीच ‘ढाई-ढाई साल’ का फॉर्मूला तय हुआ है। हालांकि कांग्रेस ने कभी आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं की। अब सिद्धारमैया के इस्तीफे की खबर के बाद लोग उसी फॉर्मूले को याद कर रहे हैं।

 

कांग्रेस हाईकमान की क्या भूमिका?

सूत्रों के मुताबिक पिछले कुछ दिनों में दिल्ली में कांग्रेस नेतृत्व के साथ कई दौर की बातचीत हुई थी। बताया जा रहा है कि पार्टी नेतृत्व राज्य में किसी बड़े विवाद या असंतोष से बचना चाहता था। 

रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि राहुल गांधी और कांग्रेस हाईकमान ने नेतृत्व परिवर्तन को लेकर अंतिम फैसला लिया। यही वजह है कि अचानक राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गईं। कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला के बेंगलुरु पहुंचने को भी इसी रणनीति का हिस्सा माना गया। 

 

आखिर कौन हैं डीके शिवकुमार?

डीके शिवकुमार कर्नाटक कांग्रेस के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं। उन्हें पार्टी का मजबूत संगठनकर्ता माना जाता है। राज्य में कांग्रेस को दोबारा सत्ता में लाने में उनकी भूमिका काफी अहम मानी जाती है।

वे लंबे समय से मुख्यमंत्री पद के दावेदार रहे हैं। खासकर कांग्रेस के संकट के समय विधायकों को एकजुट रखने की वजह से उनकी छवि ‘संकटमोचक’ नेता की बनी। अगर उन्हें मुख्यमंत्री बनाया जाता है, तो यह उनके राजनीतिक करियर का सबसे बड़ा पड़ाव माना जाएगा।

 

सिद्धारमैया का राजनीतिक सफर भी रहा लंबा

Siddaramaiah कर्नाटक की राजनीति के सबसे बड़े नेताओं में गिने जाते हैं। वे दो बार राज्य के मुख्यमंत्री रहे और हाल ही में वे कर्नाटक के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले मुख्यमंत्रियों में शामिल हुए। 

उनकी पहचान पिछड़े वर्गों के बड़े नेता के रूप में रही है। उन्होंने कई लोककल्याणकारी योजनाएं शुरू कीं और कांग्रेस के सामाजिक समीकरण को मजबूत करने में भूमिका निभाई। हालांकि उनके कार्यकाल में भ्रष्टाचार और प्रशासनिक फैसलों को लेकर विपक्ष लगातार हमलावर भी रहा।

 

विपक्ष को मिला हमला करने का मौका

बीजेपी और जेडीएस ने इस पूरे घटनाक्रम पर कांग्रेस को घेरना शुरू कर दिया है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि कांग्रेस सत्ता संघर्ष में उलझी हुई है और सरकार अस्थिर दिखाई दे रही है। कुछ विपक्षी नेताओं ने इसे ‘कुर्सी की लड़ाई’ बताया। वहीं कांग्रेस का कहना है कि पार्टी लोकतांत्रिक तरीके से नेतृत्व परिवर्तन कर रही है और सरकार पूरी तरह स्थिर है।

 

सोशल मीडिया पर मची हलचल

सिद्धारमैया के इस्तीफे की खबर सामने आते ही X, Instagram और YouTube पर #KarnatakaCM और #DKShivakumar ट्रेंड करने लगे।

कांग्रेस समर्थक डीके शिवकुमार को बधाई देते नजर आए, जबकि कई लोग यह सवाल भी उठा रहे हैं कि क्या नेतृत्व बदलने से सरकार की नीतियों पर असर पड़ेगा। सोशल मीडिया पर पैर छूने और गले मिलने वाली तस्वीरें सबसे ज्यादा शेयर की जा रही हैं। 

 

क्या बदलेगी कर्नाटक की राजनीति?

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर डीके शिवकुमार मुख्यमंत्री बनते हैं, तो कर्नाटक कांग्रेस की रणनीति और प्रशासनिक शैली में कुछ बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

हालांकि कांग्रेस की कोशिश यही होगी कि नेतृत्व परिवर्तन के बावजूद सरकार की स्थिरता और संगठन पर असर न पड़े। विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि 2028 विधानसभा चुनाव को देखते हुए कांग्रेस अभी से नए समीकरण तैयार कर रही है।

 

क्या सिद्धारमैया को मिलेगी नई जिम्मेदारी?

कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा जा रहा है कि सिद्धारमैया को राष्ट्रीय राजनीति में बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है। हालांकि इसको लेकर अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। कई लोग मानते हैं कि कांग्रेस उनके अनुभव का इस्तेमाल राष्ट्रीय स्तर पर करना चाहेगी।

 

हमारी राय

कर्नाटक में सिद्धारमैया का इस्तीफा सिर्फ एक राजनीतिक बदलाव नहीं, बल्कि कांग्रेस के अंदर शक्ति संतुलन की बड़ी तस्वीर भी दिखाता है। यह साफ है कि पार्टी नेतृत्व अब आने वाले चुनावों और संगठनात्मक रणनीति को ध्यान में रखकर फैसले ले रहा है। अगर नेतृत्व परिवर्तन शांतिपूर्ण तरीके से होता है, तो यह कांग्रेस के लिए सकारात्मक संदेश हो सकता है। लेकिन अगर अंदरूनी खींचतान बढ़ती है, तो इसका असर सरकार और पार्टी दोनों पर पड़ सकता है। आने वाले कुछ दिन कर्नाटक की राजनीति के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं।