नए जूते या चप्पल पहनने का उत्साह तो हर किसी को होता है, लेकिन कई बार यही खुशी दर्द में बदल जाती है। नया फुटवियर पहनने के कुछ ही घंटों बाद एड़ी या पैर की उंगलियों के पास छाले पड़ जाते हैं, त्वचा लाल हो जाती है और चलना भी मुश्किल लगने लगता है। इसे आम भाषा में शू बाइट (Shoe Bite) कहा जाता है।
अक्सर लोग इसे मामूली समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन अगर समय रहते इसकी सही देखभाल न की जाए तो संक्रमण का खतरा भी बढ़ सकता है। अच्छी बात यह है कि ज्यादातर मामलों में कुछ आसान घरेलू उपाय अपनाकर और थोड़ी सावधानी रखकर इस परेशानी से राहत पाई जा सकती है।
आखिर शू बाइट होता क्यों है?
शू बाइट का सबसे बड़ा कारण जूते और त्वचा के बीच लगातार होने वाला घर्षण है। जब नया जूता काफी टाइट होता है या उसका मटेरियल सख्त होता है, तो वह बार-बार त्वचा से रगड़ खाता है। धीरे-धीरे उस जगह की ऊपरी त्वचा खराब होने लगती है और वहां छाला या घाव बन जाता है। इसके अलावा लंबे समय तक लगातार चलना, पसीने की वजह से पैरों का गीला रहना, गलत साइज के जूते पहनना या बिना मोजे के नए जूते पहनना भी शू बाइट की वजह बन सकता है।
बर्फ से मिल सकती है तुरंत राहत
अगर नया जूता पहनने के बाद पैर में जलन या दर्द शुरू हो गया है, तो सबसे पहले बर्फ की सिकाई करें। एक साफ कपड़े में बर्फ के टुकड़े लपेटकर प्रभावित जगह पर 5 से 10 मिनट तक रखें। इससे सूजन कम होती है और दर्द में भी काफी राहत मिल सकती है। हालांकि बर्फ को सीधे त्वचा पर लगाने से बचें, क्योंकि इससे त्वचा को नुकसान पहुंच सकता है।
एलोवेरा जेल भी है असरदार
एलोवेरा को प्राकृतिक हीलिंग एजेंट माना जाता है। अगर शू बाइट हो गया है, तो प्रभावित जगह पर ताजा एलोवेरा जेल लगाएं। यह त्वचा को ठंडक देता है, जलन कम करता है और घाव को जल्दी भरने में मदद कर सकता है। दिन में दो से तीन बार एलोवेरा लगाने से आराम महसूस हो सकता है।
शहद का इस्तेमाल भी कर सकते हैं
शहद में प्राकृतिक एंटीबैक्टीरियल और एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं। अगर छाला फूट गया है या त्वचा छिल गई है, तो थोड़ा सा शुद्ध शहद प्रभावित हिस्से पर लगाया जा सकता है। इससे संक्रमण का खतरा कम हो सकता है और त्वचा को ठीक होने में मदद मिल सकती है। हालांकि अगर घाव बहुत गहरा है या उसमें पस बनने लगी है, तो घरेलू इलाज की बजाय डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर रहेगा।
नारियल तेल भी पहुंचा सकता है फायदा
नारियल तेल त्वचा को नमी देता है और सूखी या फटी हुई त्वचा को ठीक करने में मदद करता है। कई लोग इसमें हल्दी मिलाकर भी लगाते हैं, क्योंकि हल्दी में भी एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं। हालांकि अगर घाव खुला हुआ है या उसमें संक्रमण के लक्षण दिखाई दे रहे हैं, तो किसी भी घरेलू नुस्खे को अपनाने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
छाले को फोड़ने की गलती न करें
कई लोग दर्द से परेशान होकर छाले को सुई से फोड़ देते हैं। ऐसा करना सही नहीं माना जाता। छाले के अंदर मौजूद तरल पदार्थ त्वचा की सुरक्षा करता है और घाव को जल्दी भरने में मदद करता है। अगर छाला अपने आप फूट जाए तो उस जगह को हल्के साबुन और पानी से साफ करें, एंटीसेप्टिक लगाएं और साफ पट्टी से ढक दें। इससे संक्रमण का खतरा कम हो जाता है।
जब तक ठीक न हो जाए, वही जूता दोबारा न पहनें
अगर किसी जूते की वजह से शू बाइट हुआ है, तो कुछ दिनों तक उस जूते को पहनने से बचें। उसकी जगह आरामदायक चप्पल या मुलायम जूते पहनें ताकि घाव पर दोबारा रगड़ न लगे। अगर मजबूरी में वही जूता पहनना पड़े तो प्रभावित जगह पर बैंडेज, ब्लिस्टर पैड या कुशन लगा सकते हैं ताकि घर्षण कम हो सके।
शू बाइट से बचने के आसान तरीके
अगर आप नए जूते खरीद रहे हैं, तो सबसे पहले उनका सही साइज चुनें। नए जूते को पूरे दिन पहनने की बजाय शुरुआत में कुछ घंटे ही पहनें ताकि पैर धीरे-धीरे उसके अनुसार ढल जाए। मोजे पहनकर नए जूते इस्तेमाल करना भी अच्छा तरीका माना जाता है। इसके अलावा जहां जूता ज्यादा रगड़ खाता है, वहां पहले से पेट्रोलियम जेली या एंटी-फ्रिक्शन जेल लगाने से भी फायदा हो सकता है।
कब डॉक्टर के पास जाना चाहिए?
अगर शू बाइट के कारण दर्द लगातार बढ़ रहा है, घाव से पस निकल रही है, तेज लालिमा या सूजन हो रही है या बुखार आने लगे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। इसके अलावा डायबिटीज, खराब ब्लड सर्कुलेशन या कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों को शू बाइट को बिल्कुल हल्के में नहीं लेना चाहिए। ऐसे लोगों में छोटा सा घाव भी गंभीर रूप ले सकता है।
हमारी राय
शू बाइट एक आम समस्या जरूर है, लेकिन सही देखभाल न होने पर यह काफी तकलीफदेह बन सकती है। नए जूते खरीदते समय सिर्फ उनका डिजाइन नहीं, बल्कि उनका फिट और आराम भी उतना ही जरूरी है। अगर फिर भी शू बाइट हो जाए, तो शुरुआती घरेलू उपाय दर्द और जलन कम करने में मदद कर सकते हैं।
हालांकि अगर घाव गहरा हो, बार-बार खून आए या संक्रमण के लक्षण दिखाई दें, तो घरेलू नुस्खों पर निर्भर रहने की बजाय डॉक्टर से सलाह लेना सबसे सही कदम होगा। थोड़ी सी सावधानी और सही फुटवियर का चुनाव आपको इस परेशानी से काफी हद तक बचा सकता है।









