दिल्ली में अनधिकृत कॉलोनियों में रहने वाले लोगों को उनकी संपत्ति का कानूनी अधिकार देने के लिए शुरू की गई पीएम उदय (PM-UDAY) योजना एक बार फिर चर्चा में है। इस बार वजह कोई नई सुविधा नहीं, बल्कि योजना में लोगों की बेहद कम भागीदारी है। जानकारी के मुताबिक, अब तक इस योजना के तहत सिर्फ करीब 50 आवेदन ही आए हैं। इतनी कम संख्या को देखते हुए अब दिल्ली नगर निगम (MCD) ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) को पत्र लिखकर आवेदन शुल्क कम करने की मांग की है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इस योजना का फायदा उठा सकें। 

सरकार का मानना है कि अगर आवेदन शुल्क कम किया जाता है, तो लोगों का आर्थिक बोझ घटेगा और योजना में भागीदारी बढ़ सकती है। आइए जानते हैं कि यह योजना क्या है, इसका मकसद क्या है और आखिर लोग इसमें आवेदन क्यों नहीं कर रहे हैं।

 

क्या है पीएम उदय योजना?

पीएम उदय यानी प्रधानमंत्री अनऑथराइज्ड कॉलोनियों इन दिल्ली आवास अधिकार योजना की शुरुआत साल 2019 में की गई थी। इसका मकसद दिल्ली की अनधिकृत कॉलोनियों में रहने वाले लोगों को उनकी संपत्तियों पर कानूनी मालिकाना हक देना है। इस योजना के तहत पात्र लोगों को ऐसे दस्तावेज दिए जाते हैं, जिनकी मदद से वे अपनी संपत्ति को कानूनी रूप से बेच सकते हैं, खरीद सकते हैं, बैंक से लोन ले सकते हैं और भविष्य में कई सरकारी सुविधाओं का लाभ भी उठा सकते हैं। 

 

सिर्फ 50 आवेदन क्यों आए?

योजना शुरू होने के बाद उम्मीद थी कि बड़ी संख्या में लोग आवेदन करेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, अब तक करीब 50 आवेदन ही मिले हैं। अधिकारियों का मानना है कि इसकी एक बड़ी वजह आवेदन से जुड़ी फीस हो सकती है। कई लोगों को लगता है कि शुल्क ज्यादा है, जबकि कुछ लोगों को योजना की पूरी जानकारी ही नहीं है। यही कारण है कि आवेदन की रफ्तार काफी धीमी रही है। 

 

एमसीडी ने क्या मांग की है?

कम आवेदन को देखते हुए एमसीडी ने डीडीए को पत्र लिखकर कहा है कि आवेदन शुल्क में कमी की जाए। नगर निगम का मानना है कि अगर फीस कम होगी, तो ज्यादा लोग योजना से जुड़ने के लिए आगे आएंगे। साथ ही लोगों में जागरूकता बढ़ाने के लिए भी अभियान चलाने की जरूरत बताई गई है, ताकि पात्र परिवारों तक योजना की सही जानकारी पहुंच सके। 

 

योजना का सबसे बड़ा फायदा क्या है?

पीएम उदय योजना का सबसे बड़ा लाभ यह है कि लोगों को अपनी संपत्ति का कानूनी अधिकार मिलता है। अभी तक कई अनधिकृत कॉलोनियों में रहने वाले लोगों के पास मकान तो है, लेकिन उसके पूरे कानूनी दस्तावेज नहीं हैं। योजना के तहत अधिकार मिलने के बाद संपत्ति की खरीद-बिक्री आसान हो जाती है। इसके अलावा बैंक से होम लोन या दूसरे वित्तीय लाभ लेने में भी सुविधा मिलती है। कई मामलों में भवन निर्माण से जुड़ी प्रक्रियाएं भी आसान हो सकती हैं। 

 

किन लोगों को मिल सकता है लाभ?

यह योजना दिल्ली की उन अनधिकृत कॉलोनियों के निवासियों के लिए है, जो योजना के दायरे में आती हैं। सभी कॉलोनियां इसके तहत शामिल नहीं हैं। कुछ संवेदनशील या प्रतिबंधित क्षेत्रों को योजना से बाहर रखा गया है। इसलिए आवेदन करने से पहले यह जांचना जरूरी है कि आपकी कॉलोनी योजना के अंतर्गत आती है या नहीं। इसके लिए आधिकारिक पोर्टल पर पूरी जानकारी उपलब्ध कराई गई है। 

 

आवेदन की प्रक्रिया कैसी है?

पीएम उदय योजना के तहत आवेदन पूरी तरह ऑनलाइन किए जाते हैं। आवेदक को अपनी संपत्ति और पहचान से जुड़े जरूरी दस्तावेज पोर्टल पर अपलोड करने होते हैं। दस्तावेजों की जांच के बाद संबंधित अधिकारी आवेदन पर फैसला लेते हैं। प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए अलग-अलग प्रोसेसिंग सेंटर भी बनाए गए हैं, ताकि लोगों को जरूरत पड़ने पर सहायता मिल सके। 

 

जागरूकता की कमी भी बड़ी वजह

एक्सपर्ट्स का मानना है कि कम आवेदन आने की वजह सिर्फ फीस नहीं है। बड़ी संख्या में लोगों को अभी तक योजना की पूरी जानकारी नहीं है। कई लोग यह भी नहीं जानते कि योजना का लाभ लेने से उन्हें भविष्य में क्या फायदे मिल सकते हैं। ऐसे में जागरूकता अभियान चलाना भी उतना ही जरूरी माना जा रहा है जितना कि आवेदन शुल्क कम करना।

 

सरकार की आगे की क्या तैयारी है?

फिलहाल डीडीए एमसीडी के सुझाव पर विचार कर रहा है। अगर शुल्क में कमी का फैसला होता है, तो इससे अधिक लोगों के आवेदन करने की संभावना बढ़ सकती है। सरकार का लक्ष्य ज्यादा से ज्यादा पात्र परिवारों को कानूनी संपत्ति अधिकार उपलब्ध कराना है। इसके लिए आवेदन प्रक्रिया को और आसान बनाने तथा लोगों तक सही जानकारी पहुंचाने पर भी जोर दिया जा रहा है। 

 

लोगों को क्यों करना चाहिए आवेदन?

अगर कोई व्यक्ति योजना के लिए पात्र है, तो आवेदन करने से उसे भविष्य में कई फायदे मिल सकते हैं। कानूनी मालिकाना हक मिलने से संपत्ति से जुड़े विवाद कम हो सकते हैं। साथ ही जरूरत पड़ने पर बैंक से ऋण लेना या संपत्ति का ट्रांसफर करना भी आसान हो सकता है। हालांकि आवेदन करने से पहले सभी नियम, पात्रता और जरूरी दस्तावेजों की जानकारी अच्छी तरह समझ लेना जरूरी है।

 

हमारी राय

पीएम उदय योजना का उद्देश्य दिल्ली की अनधिकृत कॉलोनियों में रहने वाले लाखों लोगों को कानूनी अधिकार देना है। अगर इतनी महत्वपूर्ण योजना में बहुत कम आवेदन आ रहे हैं, तो यह साफ संकेत है कि कहीं न कहीं लोगों तक इसकी जानकारी या पहुंच पर्याप्त नहीं बन पाई है। आवेदन शुल्क भी कई परिवारों के लिए एक बड़ी बाधा हो सकता है।

अगर सरकार शुल्क में राहत देती है और साथ ही बड़े स्तर पर जागरूकता अभियान चलाती है, तो योजना का लाभ ज्यादा लोगों तक पहुंच सकता है। किसी भी सरकारी योजना की सफलता सिर्फ उसे शुरू करने से नहीं, बल्कि इस बात से तय होती है कि उसका फायदा वास्तव में कितने लोगों तक पहुंचता है।