प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने अपने 12 साल पूरे कर लिए हैं। 26 मई 2014 को नरेंद्र मोदी ने पहली बार देश के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी और तब से लेकर अब तक भारतीय राजनीति में कई बड़े बदलाव देखने को मिले। इन 12 वर्षों में मोदी सरकार ने ऐसे फैसले लिए जिनकी देशभर में जमकर चर्चा हुई। कुछ फैसलों को सरकार ने ऐतिहासिक बताया, तो कई मुद्दों पर विपक्ष ने तीखा विरोध भी किया। 

इन 12 सालों में मोदी सरकार ने सिर्फ राजनीति ही नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था, विदेश नीति, डिजिटल इंडिया, सुरक्षा और सामाजिक योजनाओं के स्तर पर भी अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश की। यही वजह है कि समर्थक इसे “निर्णायक नेतृत्व” कहते हैं, जबकि आलोचक कई फैसलों को विवादित भी बताते रहे हैं।

 

अनुच्छेद 370 हटाना बना सबसे बड़ा राजनीतिक फैसला

मोदी सरकार के सबसे बड़े फैसलों में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाना सबसे ऊपर माना जाता है। 5 अगस्त 2019 को केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म कर दिया और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांट दिया। 

सरकार ने इसे 'एक देश, एक विधान' की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया। बीजेपी लंबे समय से इसे अपने एजेंडे का हिस्सा मानती रही थी। वहीं विपक्ष और कई संगठनों ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया और संघीय ढांचे पर सवाल उठाने वाला कदम बताया। हालांकि सरकार का दावा रहा कि इस फैसले के बाद घाटी में विकास और निवेश के नए रास्ते खुले।

 

नोटबंदी ने पूरे देश को चौंका दिया था

8 नवंबर 2016 की रात शायद ही कोई भूल सकता है। प्रधानमंत्री मोदी ने अचानक 500 और 1000 रुपये के नोट बंद करने का ऐलान कर दिया था। इसे काले धन, नकली नोट और भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ा कदम बताया गया।

देशभर में लंबी लाइनें लगीं, लोगों को कैश की परेशानी हुई और छोटे कारोबार प्रभावित हुए। विपक्ष ने नोटबंदी को आर्थिक रूप से नुकसानदायक बताया। लेकिन सरकार का कहना था कि इससे डिजिटल भुगतान को बढ़ावा मिला और टैक्स सिस्टम में पारदर्शिता आई।आज भी नोटबंदी मोदी सरकार के सबसे चर्चित और विवादित फैसलों में गिनी जाती है।

 

GST लागू कर बदला टैक्स सिस्टम

मोदी सरकार ने Goods and Services Tax यानी GST लागू करके देश के टैक्स सिस्टम में बड़ा बदलाव किया। इसे 'वन नेशन, वन टैक्स' कहा गया। 

सरकार का दावा था कि इससे अलग-अलग टैक्स खत्म होंगे और कारोबार आसान होगा। हालांकि शुरुआती दौर में छोटे व्यापारियों और दुकानदारों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। कई बार GST दरों और नियमों को लेकर भी विवाद हुए। फिर भी इसे भारत के सबसे बड़े आर्थिक सुधारों में से एक माना जाता है।

 

डिजिटल इंडिया और UPI ने बदल दी भुगतान की तस्वीर

मोदी सरकार के कार्यकाल में डिजिटल भुगतान में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई। UPI, BHIM ऐप और ऑनलाइन ट्रांजैक्शन आज आम जिंदगी का हिस्सा बन चुके हैं।

आज छोटे दुकानदार से लेकर बड़े कारोबारी तक QR कोड से पेमेंट लेने लगे हैं। सरकार ने इसे 'डिजिटल इंडिया' मिशन की बड़ी सफलता बताया। हालांकि साइबर फ्रॉड और डिजिटल सुरक्षा को लेकर चिंताएं भी लगातार बढ़ी हैं।

 

राम मंदिर मुद्दे पर भी सरकार रही केंद्र में

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण भी मोदी सरकार के दौर का सबसे बड़ा राजनीतिक और सांस्कृतिक मुद्दा माना गया। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मंदिर निर्माण शुरू हुआ और राम मंदिर उद्घाटन राष्ट्रीय स्तर का बड़ा कार्यक्रम बना। समर्थकों ने इसे सदियों पुरानी आस्था की जीत बताया, जबकि विपक्षी दलों ने धर्म और राजनीति के मेल पर सवाल उठाए। फिर भी इसमें कोई शक नहीं कि इस मुद्दे ने भारतीय राजनीति को गहराई से प्रभावित किया।

 

विदेश नीति में भी बदली भारत की छवि

मोदी सरकार ने विदेश नीति में भी आक्रामक और सक्रिय रुख अपनाने की कोशिश की। अमेरिका, यूरोप, खाड़ी देशों और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत की सक्रियता बढ़ी। हाल के वर्षों में भारत-नॉर्डिक सहयोग, रक्षा साझेदारी और तकनीकी समझौतों पर भी जोर दिया गया। सरकार का दावा है कि भारत की वैश्विक छवि मजबूत हुई है और दुनिया में भारत की रणनीतिक भूमिका बढ़ी है।

 

कल्याणकारी योजनाओं पर भी रहा जोर

मोदी सरकार ने जनधन योजना, उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत, पीएम आवास योजना और मुफ्त राशन जैसी योजनाओं को बड़े स्तर पर लागू किया। सरकार का कहना है कि इन योजनाओं ने गरीब और मध्यम वर्ग तक सीधा लाभ पहुंचाया।

विशेषकर कोरोना महामारी के दौरान मुफ्त राशन योजना को सरकार ने बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश किया। हालांकि विपक्ष कई बार इन योजनाओं के आंकड़ों और जमीनी असर पर सवाल उठाता रहा है।

 

आलोचनाएं भी कम नहीं रहीं

जहां समर्थक मोदी सरकार को मजबूत और निर्णायक बताते हैं, वहीं आलोचक बेरोजगारी, महंगाई, कृषि संकट और सामाजिक ध्रुवीकरण जैसे मुद्दों को लेकर सवाल उठाते रहे हैं।

किसान आंदोलन, CAA-NRC विवाद और विपक्षी दलों के आरोप भी इन 12 सालों का बड़ा हिस्सा रहे। कई अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स में लोकतांत्रिक संस्थाओं और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर भी बहस हुई। यानी मोदी सरकार का कार्यकाल जितना समर्थकों के लिए उपलब्धियों का दौर रहा, उतना ही विपक्ष के लिए सवालों और विरोध का समय भी।

 

लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी भी बनी रिकॉर्ड

नरेंद्र मोदी देश के पहले गैर-कांग्रेसी नेता बने जिन्होंने लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री पद संभाला। यह अपने आप में बड़ा राजनीतिक रिकॉर्ड माना गया। इससे यह साफ हुआ कि बीजेपी अभी भी राष्ट्रीय राजनीति में मजबूत स्थिति में बनी हुई है।.

 

हमारी राय

मोदी सरकार के 12 साल भारतीय राजनीति के सबसे चर्चित और प्रभावशाली दौरों में गिने जाएंगे। इस दौरान ऐसे फैसले लिए गए जिन्होंने देश की राजनीति, अर्थव्यवस्था और समाज पर गहरा असर डाला। कुछ फैसलों को ऐतिहासिक समर्थन मिला तो कई मुद्दों पर तीखी आलोचना भी हुई। लेकिन इतना तय है कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व ने भारतीय राजनीति की शैली, चुनावी रणनीति और सत्ता के काम करने के तरीके को पूरी तरह बदल दिया। आने वाले वर्षों में भी इन फैसलों का असर देश की राजनीति और समाज में लंबे समय तक महसूस किया जाएगा।