देश में पेट्रोल और डीजल के बढ़ते इस्तेमाल को कम करने और विदेशी तेल पर निर्भरता घटाने के लिए सरकार लगातार एथेनॉल ब्लेंडिंग को बढ़ावा दे रही है। अब इस दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया गया है। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने E85 फ्यूल लॉन्च कर दिया है, जिसके बाद ऑटो सेक्टर और आम वाहन मालिकों के बीच इसकी खूब चर्चा हो रही है।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर E85 फ्यूल क्या है, क्या इससे मौजूदा गाड़ियों पर कोई असर पड़ेगा और क्या लोगों को अपनी कार या बाइक बदलनी पड़ेगी? इन सवालों का जवाब देते हुए हरदीप पुरी ने साफ कहा है कि E20 फ्यूल पर चलने वाले वाहनों को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है। E20 गाड़ियां पूरी तरह सुरक्षित हैं और उन पर किसी तरह का नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा। 

 

आखिर क्या है E85 फ्यूल?

सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि E85 फ्यूल आखिर होता क्या है। दरअसल E85 में करीब 85 फीसदी एथेनॉल और 15 फीसदी पेट्रोल होता है। वहीं अभी देश में बड़े पैमाने पर E20 फ्यूल इस्तेमाल हो रहा है, जिसमें 20 फीसदी एथेनॉल और 80 फीसदी पेट्रोल मिलाया जाता है। सरकार का मानना है कि ज्यादा एथेनॉल वाले फ्यूल के इस्तेमाल से कच्चे तेल के आयात पर खर्च कम होगा। साथ ही किसानों को भी फायदा मिलेगा क्योंकि एथेनॉल का उत्पादन गन्ने और दूसरी कृषि फसलों से किया जाता है। 

 

E20 गाड़ियों को लेकर क्यों उठे सवाल?

जैसे ही E85 फ्यूल लॉन्च हुआ, लोगों के मन में यह सवाल आने लगा कि क्या उनकी मौजूदा कार या बाइक अब बेकार हो जाएगी। कई लोगों को लगा कि सरकार धीरे-धीरे E20 की जगह E85 को पूरी तरह लागू कर सकती है।

इसी चिंता के बीच हरदीप पुरी ने स्पष्ट किया कि E20 गाड़ियों को लेकर किसी तरह की परेशानी नहीं है। उन्होंने कहा कि जो वाहन E20 के लिए डिजाइन किए गए हैं, वे सुरक्षित हैं और उन पर किसी प्रकार का असर नहीं पड़ेगा। यानी जिन लोगों ने हाल के वर्षों में नई कार या बाइक खरीदी है, उन्हें फिलहाल चिंता करने की जरूरत नहीं है। 

 

हर वाहन E85 पर नहीं चल सकता

यह बात समझना बेहद जरूरी है कि E85 कोई ऐसा फ्यूल नहीं है जिसे हर पेट्रोल वाहन में भर दिया जाए। इसके लिए खास तरह के फ्लेक्स-फ्यूल वाहन यानी Flex Fuel Vehicles की जरूरत होती है।

इन वाहनों के इंजन और फ्यूल सिस्टम को इस तरह डिजाइन किया जाता है कि वे E20 से लेकर E85 तक अलग-अलग एथेनॉल मिश्रण वाले फ्यूल पर आसानी से चल सकें। इसलिए अगर किसी सामान्य पेट्रोल कार में सीधे E85 भर दिया जाए तो तकनीकी दिक्कतें आ सकती हैं। 

 

E85 सस्ता क्यों रखा गया है?

सरकार चाहती है कि लोग धीरे-धीरे फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों की तरफ बढ़ें। इसी वजह से E85 की कीमत E20 पेट्रोल से काफी कम रखी गई है। हरदीप पुरी ने घोषणा की है कि E85 फ्यूल E20 पेट्रोल की तुलना में लगभग 20 रुपये प्रति लीटर तक सस्ता मिलेगा। दिल्ली में इसकी शुरुआती कीमत करीब 82 रुपये प्रति लीटर रखी गई है। 

हालांकि इसके पीछे एक तकनीकी पहलू भी है। एथेनॉल में पेट्रोल की तुलना में कम ऊर्जा होती है। ऐसे में माइलेज थोड़ा कम हो सकता है। इसी अंतर को संतुलित करने के लिए सरकार ने कीमत कम रखी है ताकि उपभोक्ताओं को आर्थिक फायदा मिलता रहे। 

 

सरकार की बड़ी योजना क्या है?

E85 लॉन्च सिर्फ एक फ्यूल लॉन्च नहीं है बल्कि यह एक बड़ी रणनीति का हिस्सा है। सरकार आने वाले वर्षों में देशभर में फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों और एथेनॉल आधारित ईंधन का नेटवर्क तैयार करना चाहती है।योजना के तहत पहले चरण में कई शहरों में E85 पंप लगाए जा रहे हैं। सरकार का लक्ष्य 2027 तक हजारों E85 स्टेशन तैयार करने का है ताकि लोगों को आसानी से यह फ्यूल उपलब्ध हो सके। 

 

ऑटो कंपनियां भी कर रही हैं तैयारी

सरकार की इस पहल के साथ-साथ वाहन निर्माता कंपनियां भी तेजी से तैयारी कर रही हैं। कई कंपनियां फ्लेक्स-फ्यूल कार और बाइक बाजार में उतार चुकी हैं या उन पर काम कर रही हैं। हाल ही में फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक वाली नई गाड़ियों को पेश किया गया है जो E20 से लेकर E85 तक अलग-अलग मिश्रण वाले फ्यूल पर चल सकती हैं। इससे साफ संकेत मिलता है कि आने वाले समय में भारतीय ऑटो बाजार में फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों की संख्या बढ़ सकती है। 

 

पर्यावरण को कैसे होगा फायदा?

सरकार का दावा है कि एथेनॉल मिश्रित ईंधन से कार्बन उत्सर्जन कम करने में मदद मिलेगी। एथेनॉल को पेट्रोल की तुलना में ज्यादा पर्यावरण अनुकूल माना जाता है।भारत लंबे समय से स्वच्छ ईंधन और ग्रीन मोबिलिटी की दिशा में काम कर रहा है। इलेक्ट्रिक वाहनों के साथ-साथ एथेनॉल आधारित ईंधन को भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। 

 

क्या अभी लोगों को कुछ बदलने की जरूरत है?

फिलहाल इसका जवाब है, नहीं! अगर आपकी कार या बाइक E20 फ्यूल पर चल रही है तो आपको किसी तरह की जल्दबाजी में कोई फैसला लेने की जरूरत नहीं है। सरकार और उद्योग दोनों का कहना है कि मौजूदा E20 वाहन सुरक्षित हैं।

E85 का इस्तेमाल केवल उन्हीं वाहनों में किया जाएगा जो फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक के साथ आएंगे। इसलिए आम उपभोक्ताओं के लिए फिलहाल सबसे जरूरी बात यह है कि वे अपनी गाड़ी के निर्माता की सलाह के अनुसार ही ईंधन का इस्तेमाल करें। 

 

भारत की ऊर्जा रणनीति में बड़ा कदम

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर एथेनॉल ब्लेंडिंग का दायरा बढ़ता है तो भारत को तेल आयात पर होने वाले भारी खर्च में राहत मिल सकती है। इससे देश की ऊर्जा सुरक्षा भी मजबूत होगी और कृषि क्षेत्र को नया बाजार भी मिलेगा। इसी वजह से सरकार E20 के बाद अब E85 की तरफ बढ़ रही है। हालांकि इसका पूरा असर देखने में अभी समय लगेगा क्योंकि इसके लिए वाहन, पंप और सप्लाई नेटवर्क तीनों का विस्तार जरूरी है। 

 

हमारी राय

हमारी राय में E85 फ्यूल की शुरुआत भारत की ऊर्जा नीति के लिए एक बड़ा और महत्वपूर्ण कदम है। इससे देश को आयातित तेल पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है और किसानों को भी अप्रत्यक्ष फायदा मिल सकता है। सबसे अच्छी बात यह है कि सरकार ने साफ कर दिया है कि मौजूदा E20 गाड़ियों को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है। हालांकि E85 को बड़े स्तर पर सफल बनाने के लिए फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों की संख्या बढ़ानी होगी और देशभर में पर्याप्त फ्यूल स्टेशन भी तैयार करने होंगे। अगर यह योजना सही तरीके से लागू होती है तो आने वाले वर्षों में भारत के फ्यूल सेक्टर की तस्वीर काफी बदल सकती है।