इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरते समय ज्यादातर लोग अपनी सैलरी, बिजनेस या दूसरी कमाई का तो पूरा हिसाब दे देते हैं, लेकिन बचत खाते (Savings Account) पर मिलने वाले ब्याज को बताना भूल जाते हैं। कई लोगों को लगता है कि सेविंग अकाउंट पर मिलने वाला ब्याज टैक्स फ्री होता है, इसलिए उसे ITR में दिखाने की जरूरत नहीं है। लेकिन यह सोच आगे चलकर भारी पड़ सकती है। आज के समय में इनकम टैक्स विभाग के पास बैंक, फाइनेंशियल संस्थानों और दूसरे स्रोतों से मिलने वाला डेटा पहले से कहीं ज्यादा होता है। ऐसे में अगर आपकी जानकारी और विभाग के रिकॉर्ड में अंतर मिलता है, तो नोटिस आने की संभावना बढ़ जाती है।
क्या सेविंग अकाउंट का ब्याज टैक्स के दायरे में आता है?
इस सवाल का जवाब है- हां। बचत खाते पर मिलने वाला ब्याज पूरी तरह टैक्स के दायरे में आता है। ITR भरते समय इसे ‘Income from Other Sources’ के तहत दिखाना होता है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि पूरा ब्याज टैक्स के रूप में देना पड़ेगा। आयकर कानून में कुछ छूट भी दी गई है, लेकिन पहले ब्याज की सही जानकारी देना जरूरी होता है।
80TTA के तहत मिलती है राहत
अगर आपकी उम्र 60 साल से कम है, तो आयकर अधिनियम की धारा 80TTA के तहत सेविंग अकाउंट से मिलने वाले ब्याज पर 10,000 रुपये तक की कटौती का लाभ मिल सकता है। ध्यान रखने वाली बात यह है कि यह सीमा सभी सेविंग अकाउंट के कुल ब्याज पर लागू होती है, किसी एक बैंक खाते पर नहीं। यानी अगर आपके अलग-अलग बैंकों में कई सेविंग अकाउंट हैं, तो उन सभी का ब्याज जोड़कर देखा जाएगा।
अगर ब्याज छिपा दिया तो क्या होगा?
मान लीजिए आपने ITR भरते समय बैंक से मिलने वाले ब्याज को नहीं दिखाया। अगर बाद में इनकम टैक्स विभाग के रिकॉर्ड में यह जानकारी मिल जाती है, तो आपको नोटिस भेजा जा सकता है। ऐसी स्थिति में विभाग आपसे स्पष्टीकरण मांग सकता है। अगर टैक्स बनता है तो बकाया टैक्स के साथ ब्याज भी देना पड़ सकता है। गंभीर मामलों में जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
क्या जेल भी हो सकती है?
यह सवाल भी अक्सर लोगों के मन में आता है। सिर्फ गलती से ब्याज की जानकारी छूट जाने पर सीधे जेल नहीं हो जाती। लेकिन अगर कोई व्यक्ति जानबूझकर आय छिपाता है, गलत जानकारी देता है या टैक्स चोरी करने की कोशिश करता है, तो आयकर कानून के तहत उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो सकती है। मामले की गंभीरता के आधार पर जुर्माना, ब्याज और कुछ परिस्थितियों में कानूनी कार्रवाई तक हो सकती है। इसलिए किसी भी आय को छिपाने की बजाय सही जानकारी देना ही समझदारी है।
बैंक TDS नहीं काटता, फिर भी जानकारी देना जरूरी
कई लोगों की गलतफहमी होती है कि क्योंकि सेविंग अकाउंट के ब्याज पर बैंक TDS नहीं काटता, इसलिए उसे ITR में दिखाने की जरूरत नहीं होती। असलियत यह है कि TDS कटे या न कटे, अगर ब्याज मिला है तो उसे आय के रूप में दिखाना जरूरी है। टैक्स की जिम्मेदारी आखिरकार टैक्सपेयर की ही होती है।
ब्याज की सही जानकारी कहां से मिलेगी?
अगर आपको याद नहीं कि पूरे साल में कितना ब्याज मिला, तो घबराने की जरूरत नहीं है। आप अपने बैंक की पासबुक, बैंक स्टेटमेंट, इंटरनेट बैंकिंग या सालाना इंटरेस्ट सर्टिफिकेट की मदद से यह जानकारी निकाल सकते हैं। इसके अलावा AIS (Annual Information Statement) और Form 26AS में भी कई वित्तीय लेनदेन की जानकारी उपलब्ध रहती है। ITR भरने से पहले इन रिकॉर्ड्स को जरूर मिला लें ताकि कोई जानकारी छूट न जाए।
अगर गलती हो गई है तो क्या करें?
अगर आपने ITR जमा करने के बाद महसूस किया कि ब्याज की जानकारी छूट गई है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। आयकर विभाग संशोधित या अपडेटेड रिटर्न दाखिल करने की सुविधा देता है। समय रहते गलती सुधार लेने से भविष्य में बड़ी परेशानी से बचा जा सकता है। हालांकि देरी होने पर अतिरिक्त टैक्स या अन्य शुल्क लग सकते हैं।
ITR भरते समय इन बातों का रखें ध्यान
ITR फाइल करते समय सिर्फ Form-16 पर भरोसा न करें। बैंक ब्याज, FD का ब्याज, डिविडेंड, कैपिटल गेन और दूसरी आय की भी जांच करें। AIS और Form 26AS से मिलान जरूर करें। रिटर्न भरने के बाद उसे समय पर ई-वेरिफाई करना भी उतना ही जरूरी है, क्योंकि बिना वेरिफिकेशन के रिटर्न अधूरा माना जा सकता है।
छोटी सी लापरवाही बन सकती है बड़ी परेशानी
आज के समय में टैक्स सिस्टम पहले से काफी डिजिटल हो चुका है। बैंक, म्यूचुअल फंड, शेयर बाजार और दूसरी संस्थाओं की जानकारी सीधे आयकर विभाग तक पहुंचती है। ऐसे में यह सोचकर कोई जानकारी छिपाना कि विभाग को पता नहीं चलेगा, अब सही नहीं है। इसलिए ITR भरते समय पूरी और सही जानकारी देना ही सबसे सुरक्षित तरीका है।
हमारी राय
ITR भरना सिर्फ एक औपचारिकता नहीं, बल्कि आपकी वित्तीय जिम्मेदारी है। सेविंग अकाउंट पर मिलने वाला ब्याज छोटा जरूर लग सकता है, लेकिन उसे छिपाना या भूल जाना आगे चलकर नोटिस, अतिरिक्त टैक्स और जुर्माने की वजह बन सकता है। इसलिए रिटर्न भरने से पहले अपने सभी बैंक खातों का ब्याज जोड़ें, सही जानकारी दर्ज करें और जरूरत पड़ने पर टैक्स विशेषज्ञ की सलाह लें। थोड़ी-सी सावधानी आपको भविष्य की बड़ी परेशानियों से बचा सकती है।









