झारखंड की खूबसूरत वादियों और घने जंगलों के बीच बसे दलमा वाइल्डलाइफ सैंक्चुरी को अब एक नई पहचान मिलने जा रही है। राज्य सरकार ने यहां पर्यटकों के लिए 15 नए इको कॉटेज शुरू किए हैं। इन कॉटेज का मकसद सिर्फ पर्यटकों को ठहरने की बेहतर सुविधा देना नहीं है, बल्कि झारखंड में नेचर टूरिज्म को भी नई रफ्तार देना है। लंबे समय से दलमा अपने जंगलों, पहाड़ियों और हाथियों के लिए मशहूर रहा है, लेकिन अब यहां आने वाले लोगों को जंगल के बीच प्रकृति के और करीब रहने का अनुभव भी मिलेगा।
सरकार का मानना है कि इस पहल से देशभर से ज्यादा पर्यटक दलमा पहुंचेंगे। इससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा, आसपास के गांवों की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और इको-टूरिज्म को भी बढ़ावा मिलेगा।
क्यों खास है दलमा वाइल्डलाइफ सैंक्चुरी?
दलमा वाइल्डलाइफ सैंक्चुरी झारखंड के पूर्वी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां जिलों में फैली हुई है। यह जमशेदपुर से करीब 20 से 25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और करीब 193 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैली है। इसकी स्थापना साल 1975 में की गई थी। यह सैंक्चुरी खासतौर पर एशियाई हाथियों के प्राकृतिक आवास के लिए जानी जाती है। इसके अलावा यहां हिरण, भालू, जंगली सूअर, सियार, विशाल गिलहरी, पैंगोलिन और कई तरह के पक्षी भी देखने को मिलते हैं। घने साल के जंगल, ऊंची-नीची पहाड़ियां और शांत वातावरण इसे नेचर लवर्स और वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर्स के लिए खास बनाते हैं।
15 नए इको कॉटेज में क्या मिलेगा?
नए इको कॉटेज इस तरह डिजाइन किए गए हैं कि पर्यटक आधुनिक सुविधाओं के साथ जंगल के बीच रहने का अनुभव ले सकें। इन कॉटेज का निर्माण पर्यावरण को ध्यान में रखकर किया गया है ताकि प्राकृतिक संतुलन पर कम से कम असर पड़े।
यहां ठहरने वाले लोग सुबह पक्षियों की आवाज, जंगल की ताजी हवा और हरियाली के बीच समय बिता सकेंगे। साथ ही उन्हें जंगल सफारी, ट्रेकिंग और प्रकृति भ्रमण जैसी गतिविधियों का भी आनंद मिलेगा। सरकार की कोशिश है कि पर्यटकों को ऐसा अनुभव मिले, जिससे वे बार-बार यहां आना चाहें।
नेचर टूरिज्म को मिलेगा नया आयाम
पिछले कुछ वर्षों में लोग भीड़भाड़ वाले पर्यटन स्थलों की बजाय प्रकृति के करीब समय बिताना ज्यादा पसंद कर रहे हैं। इसी ट्रेंड को देखते हुए झारखंड सरकार ने दलमा को इको-टूरिज्म हब के रूप में विकसित करने की योजना बनाई है।
15 नए इको कॉटेज इसी योजना का हिस्सा हैं। इससे उम्मीद है कि राज्य में आने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी और झारखंड की पहचान सिर्फ खनिज संपदा वाले राज्य की नहीं, बल्कि प्राकृतिक पर्यटन स्थल के रूप में भी बनेगी।
स्थानीय लोगों को होगा सीधा फायदा
किसी भी पर्यटन परियोजना का सबसे बड़ा फायदा तब माना जाता है, जब उससे स्थानीय लोगों की आमदनी बढ़े। दलमा में भी यही उम्मीद की जा रही है। पर्यटकों की संख्या बढ़ने पर स्थानीय युवाओं को गाइड, होटल, ट्रांसपोर्ट, हस्तशिल्प, खाने-पीने की दुकानें और दूसरी सेवाओं में रोजगार के नए अवसर मिलेंगे। गांवों की महिलाओं के स्वयं सहायता समूह भी स्थानीय उत्पाद और पारंपरिक व्यंजन बेचकर अतिरिक्त आय कमा सकेंगे। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
जंगल सफारी का भी मिलेगा रोमांच
दलमा आने वाले पर्यटकों के लिए सिर्फ ठहरने की सुविधा ही नहीं बढ़ाई जा रही, बल्कि जंगल सफारी जैसी गतिविधियों को भी बेहतर बनाया जा रहा है। सरकार पहले ही यहां पर्यटन सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है।
जंगल सफारी के दौरान पर्यटक हाथियों समेत कई वन्य जीवों और पक्षियों को उनके प्राकृतिक वातावरण में देख सकेंगे। हालांकि वन विभाग लगातार यह भी सुनिश्चित कर रहा है कि पर्यटन की वजह से वन्यजीवों को किसी तरह की परेशानी न हो।
पर्यावरण संरक्षण पर भी रहेगा फोकस
इको कॉटेज का मकसद सिर्फ पर्यटकों को आकर्षित करना नहीं है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा देना है। इन कॉटेज के निर्माण में प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित इस्तेमाल करने पर जोर दिया गया है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर पर्यटन को जिम्मेदारी के साथ विकसित किया जाए, तो इससे जंगलों और वन्यजीवों के संरक्षण के लिए भी आर्थिक संसाधन जुटाए जा सकते हैं। यही वजह है कि दलमा परियोजना को इको-टूरिज्म का अच्छा उदाहरण माना जा रहा है।
वीकेंड ट्रिप के लिए शानदार जगह
रांची, जमशेदपुर, बोकारो, धनबाद और पश्चिम बंगाल के कई इलाकों से आने वाले लोगों के लिए दलमा एक बेहतरीन वीकेंड डेस्टिनेशन बन सकता है। यहां लोग परिवार या दोस्तों के साथ कुछ दिन सुकून से बिता सकते हैं। पहाड़, जंगल, ट्रेकिंग, वन्यजीव और शांत माहौल उन लोगों को खास तौर पर पसंद आएगा जो शहर की भागदौड़ से दूर कुछ समय प्रकृति के बीच बिताना चाहते हैं।
झारखंड के पर्यटन को मिलेगी नई पहचान
झारखंड में बेतला नेशनल पार्क, हुंडरू फॉल्स, दशम फॉल्स, नेतरहाट और पारसनाथ जैसे कई प्रसिद्ध पर्यटन स्थल हैं। अब दलमा में आधुनिक इको कॉटेज शुरू होने से राज्य का पर्यटन और मजबूत होने की उम्मीद है। अगर यहां बेहतर सड़क, ऑनलाइन बुकिंग, गाइड सुविधा और प्रचार-प्रसार पर लगातार काम किया गया, तो दलमा आने वाले वर्षों में देश के प्रमुख नेचर टूरिज्म स्थलों में शामिल हो सकता है।
पर्यटकों को क्या रखना होगा ध्यान?
जंगल घूमने के दौरान पर्यटकों को वन विभाग के नियमों का पालन करना होगा। प्लास्टिक का इस्तेमाल कम करना, कचरा जंगल में न फेंकना, वन्यजीवों से सुरक्षित दूरी बनाए रखना और तेज आवाज से बचना जरूरी होगा। इससे प्राकृतिक वातावरण सुरक्षित रहेगा और दूसरे पर्यटक भी बेहतर अनुभव ले सकेंगे।
हमारी राय
दलमा वाइल्डलाइफ सैंक्चुरी में 15 नए इको कॉटेज की शुरुआत झारखंड के पर्यटन क्षेत्र के लिए एक सकारात्मक कदम है। इससे न सिर्फ पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। हालांकि इस पूरे विकास के दौरान सबसे ज्यादा ध्यान पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण पर देना होगा। अगर पर्यटन और प्रकृति के बीच सही संतुलन बनाए रखा गया, तो दलमा आने वाले समय में झारखंड की सबसे बड़ी पर्यटन पहचान बन सकता है।









