आज के समय में बदलती लाइफस्टाइल, बढ़ता तनाव, देर से शादी और स्वास्थ्य संबंधी कई कारणों की वजह से कई कपल्स को माता-पिता बनने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। ऐसे मामलों में आईवीएफ (IVF - In Vitro Fertilization) कई लोगों के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आया है। हालांकि, IVF को लेकर समाज में आज भी कई तरह की गलतफहमियां और अफवाहें फैली हुई हैं। कई लोग बिना सही जानकारी के इसे लेकर डर जाते हैं या फिर इलाज शुरू करने से पहले ही पीछे हट जाते हैं।

फर्टिलिटी एक्सपर्ट्स का कहना है कि IVF को लेकर सही जानकारी होना बेहद जरूरी है। इससे लोग सही समय पर इलाज शुरू कर सकते हैं और बेवजह के डर से भी बच सकते हैं। आइए जानते हैं IVF से जुड़े कुछ आम मिथकों और उनकी सच्चाई के बारे में।

 

क्या IVF सिर्फ महिलाओं की समस्या का इलाज है?

यह सबसे आम गलतफहमी है। कई लोग मानते हैं कि IVF की जरूरत सिर्फ तब पड़ती है जब महिला में कोई समस्या हो। जबकि सच्चाई यह है कि बांझपन या गर्भधारण में परेशानी के पीछे महिला और पुरुष दोनों की स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं जिम्मेदार हो सकती हैं। कई मामलों में पुरुषों में स्पर्म की संख्या कम होना, उनकी गुणवत्ता खराब होना या अन्य कारण भी IVF की जरूरत पैदा कर सकते हैं। इसलिए जांच हमेशा दोनों पार्टनर की की जाती है और इलाज भी उसी आधार पर तय किया जाता है। 

 

क्या IVF से पैदा होने वाले बच्चे सामान्य नहीं होते?

यह भी एक बड़ा मिथक है। बहुत से लोगों को लगता है कि IVF से जन्म लेने वाले बच्चे सामान्य बच्चों से अलग होते हैं। जबकि विशेषज्ञों के मुताबिक ऐसा बिल्कुल नहीं है। IVF में सिर्फ निषेचन (फर्टिलाइजेशन) की प्रक्रिया लैब में कराई जाती है। इसके बाद भ्रूण को महिला के गर्भाशय में स्थापित किया जाता है और आगे का विकास सामान्य गर्भावस्था की तरह ही होता है। इसलिए IVF से जन्म लेने वाले बच्चे भी दूसरे बच्चों की तरह सामान्य होते हैं। 

 

क्या IVF हमेशा पहली बार में सफल हो जाता है?

कई लोग सोचते हैं कि IVF करवाते ही पहली कोशिश में गर्भधारण हो जाएगा। लेकिन यह पूरी तरह सही नहीं है। IVF की सफलता कई बातों पर निर्भर करती है, जैसे महिला की उम्र, अंडाणुओं की गुणवत्ता, स्पर्म की स्थिति, स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं और भ्रूण की गुणवत्ता। कुछ लोगों को पहली कोशिश में सफलता मिल जाती है, जबकि कुछ को एक से ज्यादा साइकल की जरूरत पड़ सकती है। इसलिए धैर्य रखना जरूरी होता है। 

 

क्या IVF सिर्फ ज्यादा उम्र की महिलाओं के लिए है?

ऐसा बिल्कुल नहीं है। IVF किसी भी उम्र की महिला के लिए नहीं, बल्कि उसकी मेडिकल जरूरत के आधार पर किया जाता है। अगर किसी युवा महिला को फैलोपियन ट्यूब की समस्या है, एंडोमेट्रियोसिस है या किसी अन्य कारण से प्राकृतिक रूप से गर्भधारण में दिक्कत आ रही है, तो डॉक्टर IVF की सलाह दे सकते हैं। वहीं, अधिक उम्र में भी हर महिला को IVF की जरूरत पड़े, यह जरूरी नहीं है। इलाज का फैसला मेडिकल जांच के बाद ही किया जाता है। 

 

क्या IVF प्रक्रिया बहुत दर्दनाक होती है?

IVF को लेकर यह डर भी काफी आम है। कई लोगों को लगता है कि पूरी प्रक्रिया बेहद दर्दनाक होती है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि IVF के दौरान कुछ स्टेप्स में हल्की असहजता हो सकती है, लेकिन आधुनिक तकनीकों और दवाओं की मदद से ज्यादातर प्रक्रियाएं आराम से पूरी कर ली जाती हैं। अंडाणु निकालने की प्रक्रिया भी डॉक्टर की निगरानी में की जाती है, जिससे मरीज को ज्यादा तकलीफ नहीं होती। 

 

क्या IVF कराने के बाद बेड रेस्ट जरूरी होता है?

बहुत से लोग मानते हैं कि भ्रूण ट्रांसफर होने के बाद महिला को कई दिनों तक सिर्फ बिस्तर पर ही रहना चाहिए। लेकिन एक्सपर्ट्स के मुताबिक यह जरूरी नहीं है। ज्यादातर मामलों में डॉक्टर सामान्य दिनचर्या अपनाने की सलाह देते हैं। हां, बहुत ज्यादा भारी काम, तनाव या डॉक्टर द्वारा मना की गई गतिविधियों से बचने की सलाह दी जाती है। बाकी मरीज सामान्य जीवन जी सकती है। 

 

क्या IVF सिर्फ अमीर लोगों के लिए है?

पहले IVF को काफी महंगा इलाज माना जाता था, लेकिन अब कई शहरों में अलग-अलग बजट और जरूरत के हिसाब से इलाज की सुविधाएं उपलब्ध हैं। इलाज की लागत अस्पताल, तकनीक और मरीज की स्थिति के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। इसलिए सिर्फ खर्च के डर से इलाज से दूर रहना सही नहीं है। पहले विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर होता है।

 

क्या लाइफस्टाइल भी IVF की सफलता पर असर डालती है?

जी हां। एक्सपर्ट्स का कहना है कि स्वस्थ जीवनशैली IVF की सफलता में मददगार हो सकती है। स्मोकिंग, शराब, ज्यादा तनाव, मोटापा और नींद की कमी जैसी चीजें फर्टिलिटी पर असर डाल सकती हैं। इसलिए डॉक्टर इलाज के दौरान संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और तनाव कम रखने की सलाह देते हैं। 

 

IVF कराने से पहले किन बातों का रखें ध्यान?

अगर कोई कपल IVF कराने की सोच रहा है तो सबसे पहले किसी योग्य फर्टिलिटी विशेषज्ञ से सलाह लें। इंटरनेट या लोगों की बातों पर भरोसा करने की बजाय मेडिकल जांच कराएं और उसी के आधार पर इलाज शुरू करें। इलाज के दौरान धैर्य रखना भी जरूरी है क्योंकि हर मरीज की स्थिति अलग होती है। डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाएं लेना, समय पर जांच कराना और सकारात्मक सोच बनाए रखना भी अहम माना जाता है।

 

सही जानकारी ही सबसे बड़ी ताकत

IVF को लेकर समाज में फैली गलत धारणाओं की वजह से कई कपल्स इलाज में देरी कर देते हैं। जबकि समय पर सही सलाह और आधुनिक तकनीक की मदद से कई लोगों का माता-पिता बनने का सपना पूरा हो सकता है। इसलिए किसी भी अफवाह या मिथक पर भरोसा करने के बजाय विशेषज्ञ से सलाह लेना ही सबसे सही रास्ता है।

 

हमारी राय

IVF आज मेडिकल साइंस की एक महत्वपूर्ण तकनीक है, जिसने लाखों दंपतियों को माता-पिता बनने का मौका दिया है। इसे लेकर फैली गलतफहमियां अक्सर लोगों को सही इलाज से दूर कर देती हैं। अगर गर्भधारण में परेशानी आ रही है तो बिना झिझक फर्टिलिटी एक्सपर्ट से सलाह लें और सही जानकारी के आधार पर फैसला करें। याद रखें, हर मरीज की स्थिति अलग होती है, इसलिए इलाज भी उसी के अनुसार तय किया जाता है। सही समय पर सही कदम उठाना ही सबसे अहम होता है।