घर में बच्चे का जन्म किसी भी परिवार के लिए सबसे बड़ी खुशियों में से एक होता है। लेकिन इस खुशी के साथ कई नई जिम्मेदारियां भी आती हैं। अक्सर पूरा ध्यान मां और बच्चे पर रहता है, जबकि नए पिता भी एक बिल्कुल नई भूमिका में कदम रख रहे होते हैं। कई पुरुषों को समझ नहीं आता कि इस दौरान उन्हें क्या करना चाहिए ताकि पत्नी को सहारा मिले और बच्चे के साथ भी उनका रिश्ता शुरू से ही मजबूत बन सके।

विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चे के जन्म के बाद सिर्फ आर्थिक जिम्मेदारी निभाना ही काफी नहीं होता। अगर पिता शुरुआत से ही बच्चे की देखभाल और पत्नी की मदद में बराबर हिस्सा लें, तो इससे पूरा परिवार भावनात्मक रूप से मजबूत बनता है। साथ ही पत्नी को भी यह महसूस होता है कि वह इस सफर में अकेली नहीं है। आइए जानते हैं वे तीन जरूरी बातें, जिन्हें हर नए पिता को जरूर अपनाना चाहिए।

1. बच्चे की देखभाल में बराबर की जिम्मेदारी निभाएं

कई घरों में आज भी यह सोच देखने को मिलती है कि नवजात की देखभाल सिर्फ मां की जिम्मेदारी है। लेकिन अब समय बदल चुका है। अगर पिता भी डायपर बदलना, बच्चे को गोद में लेकर सुलाना, डकार दिलाना या डॉक्टर के पास ले जाने जैसे छोटे-छोटे काम करने लगें, तो इससे मां का बोझ काफी कम हो जाता है।

शुरुआत में यह सब थोड़ा मुश्किल लग सकता है, लेकिन धीरे-धीरे आत्मविश्वास बढ़ने लगता है। सबसे बड़ी बात यह है कि बच्चा भी शुरू से पिता की आवाज, स्पर्श और मौजूदगी को पहचानने लगता है। यही छोटी-छोटी बातें आगे चलकर पिता और बच्चे के बीच गहरा रिश्ता बनाती हैं। विशेषज्ञ भी मानते हैं कि बच्चे के साथ ज्यादा समय बिताने वाले पिता भावनात्मक रूप से उससे जल्दी जुड़ पाते हैं।

2. पत्नी का सिर्फ ख्याल नहीं, भावनात्मक साथ भी दें

बच्चे के जन्म के बाद महिला के शरीर और मन, दोनों में कई बदलाव आते हैं। नींद पूरी नहीं होना, लगातार बच्चे की देखभाल करना, हार्मोनल बदलाव और नई जिम्मेदारियां उन्हें मानसिक रूप से भी थका सकती हैं। ऐसे समय में पति का साथ सबसे ज्यादा मायने रखता है।

सिर्फ यह पूछ लेना कि "तुम कैसी हो?" या कुछ देर बच्चे को संभाल लेना ताकि पत्नी आराम कर सके, बहुत बड़ा फर्क ला सकता है। अगर वह अपनी परेशानियां साझा करना चाहती हैं, तो उन्हें बिना टोके सुनना भी जरूरी है। कई बार महिलाएं सलाह से ज्यादा समझे जाने की उम्मीद करती हैं।

पति अगर घर के छोटे-मोटे कामों में भी हाथ बंटा दें, जैसे खाना गर्म करना, सामान लाना या रात में बच्चे को संभालना, तो इससे पत्नी को काफी राहत मिलती है। यही छोटे प्रयास रिश्ते में सम्मान और भरोसा बढ़ाते हैं।

3. बच्चे के साथ रोज थोड़ा समय जरूर बिताएं

कई नए पिता सोचते हैं कि बच्चा अभी बहुत छोटा है, इसलिए उसे कुछ समझ नहीं आता। लेकिन यह धारणा पूरी तरह सही नहीं है। नवजात भी अपने आसपास की आवाजों, चेहरे और स्पर्श को पहचानना शुरू कर देता है।

अगर आप रोज कुछ मिनट बच्चे को गोद में लेकर उससे बात करें, लोरी सुनाएं, उसके साथ टहलें या बस उसे सीने से लगाकर रखें, तो यह समय उसके विकास के लिए भी अच्छा होता है और आपके रिश्ते को भी मजबूत बनाता है।

विशेषज्ञ बताते हैं कि स्किन-टू-स्किन कॉन्टैक्ट, यानी बच्चे को सीने से लगाकर रखना, पिता और बच्चे दोनों के बीच भावनात्मक जुड़ाव बढ़ाने में मदद करता है। यह जरूरी नहीं कि प्यार पहली बार गोद में लेने के साथ ही महसूस हो। कई पिताओं के लिए यह रिश्ता धीरे-धीरे समय के साथ मजबूत होता है, और यह बिल्कुल सामान्य बात है।

 

नए पिता किन गलतियों से बचें?

कई बार पुरुष यह सोचकर खुद को अलग कर लेते हैं कि मां ही बच्चे को बेहतर संभाल सकती है। इससे वे धीरे-धीरे बच्चे की देखभाल से दूर होते जाते हैं। दूसरी गलती यह होती है कि वे सारी जिम्मेदारी सिर्फ कमाई तक सीमित मान लेते हैं।

असल में बच्चे की परवरिश सिर्फ पैसों से नहीं, बल्कि समय, प्यार और मौजूदगी से भी होती है। अगर शुरुआत से ही पिता सक्रिय भूमिका निभाते हैं, तो बच्चे के साथ उनका रिश्ता ज्यादा मजबूत बनता है और पत्नी पर भी जरूरत से ज्यादा दबाव नहीं पड़ता।

 

क्या पिता का जुड़ाव बच्चे के विकास पर असर डालता है?

जी हां। कई शोध बताते हैं कि जिन बच्चों के जीवन में पिता की सक्रिय भागीदारी होती है, उनमें आत्मविश्वास, सामाजिक व्यवहार और भावनात्मक संतुलन बेहतर देखने को मिलता है। ऐसे बच्चे परिवार के साथ ज्यादा सुरक्षित महसूस करते हैं।

इसके अलावा जब बच्चा दोनों माता-पिता के साथ समय बिताता है, तो उसकी सीखने की क्षमता और संवाद कौशल पर भी सकारात्मक असर पड़ता है। इसलिए पिता की भूमिका सिर्फ सहायक नहीं, बल्कि बच्चे के विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है।

 

अगर शुरुआत में जुड़ाव महसूस न हो तो घबराएं नहीं

कई नए पिता इस बात को लेकर परेशान हो जाते हैं कि उन्हें बच्चे से तुरंत गहरा लगाव महसूस नहीं हो रहा। विशेषज्ञों का कहना है कि यह बिल्कुल सामान्य है। मां और बच्चे का रिश्ता गर्भावस्था से ही बनना शुरू हो जाता है, जबकि पिता का रिश्ता अक्सर बच्चे के साथ समय बिताने और उसकी देखभाल करने के दौरान धीरे-धीरे मजबूत होता है। इसलिए खुद की तुलना किसी और से करने की जरूरत नहीं है। सबसे जरूरी बात यह है कि आप लगातार बच्चे के साथ मौजूद रहें और उसकी देखभाल में हिस्सा लेते रहें। समय के साथ यह रिश्ता अपने आप गहरा होता जाता है।

 

हमारी राय

पिता बनना सिर्फ परिवार में एक नया सदस्य आने की खुशी नहीं, बल्कि जीवन की सबसे बड़ी जिम्मेदारियों में से एक है। अगर नए पिता शुरुआत से ही बच्चे की देखभाल में हाथ बंटाएं, पत्नी का भावनात्मक सहारा बनें और रोज थोड़ा समय बच्चे के साथ बिताएं, तो इससे पूरा परिवार खुशहाल बन सकता है। याद रखें, बच्चे को सिर्फ एक कमाने वाले पिता नहीं, बल्कि एक ऐसा पापा चाहिए जो उसके साथ मौजूद रहे, उसे समय दे और हर छोटे-बड़े पल का हिस्सा बने।