कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 भारत के लिए कई मायनों में यादगार रहे, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा अगर किसी की हुई तो वह थीं भारत की महिला खिलाड़ी। इस बार भारतीय बेटियों ने ऐसा प्रदर्शन किया, जिसने पूरे देश को गर्व करने का मौका दिया। भारत ने ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में कुल 13 स्वर्ण पदक जीते, जिनमें से 8 गोल्ड सिर्फ महिला खिलाड़ियों ने अपने नाम किए। यही वजह है कि इस बार भारत के शानदार प्रदर्शन के पीछे सबसे बड़ी ताकत ‘नारी शक्ति’ को माना जा रहा है।
महिला खिलाड़ियों ने वेटलिफ्टिंग, जूडो, पैरा एथलेटिक्स और बॉक्सिंग जैसे कई खेलों में गोल्ड जीतकर यह साबित कर दिया कि अब भारतीय खेलों की तस्वीर बदल चुकी है। उनके प्रदर्शन की बदौलत भारत ने कॉमनवेल्थ गेम्स का समापन 13 गोल्ड, 17 सिल्वर और 9 ब्रॉन्ज यानी कुल 39 पदकों के साथ किया और पदक तालिका में चौथा स्थान हासिल किया।
मीराबाई चानू ने दिलाया पहला गोल्ड
भारत के गोल्डन अभियान की शुरुआत स्टार वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने की। उन्होंने महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। यह कॉमनवेल्थ गेम्स में उनका लगातार तीसरा गोल्ड भी रहा, जो अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। मीराबाई ने सिर्फ गोल्ड ही नहीं जीता, बल्कि अपने अनुभव और शानदार प्रदर्शन से पूरी भारतीय टीम का मनोबल भी बढ़ाया। उनके गोल्ड ने बाकी खिलाड़ियों में भी आत्मविश्वास भर दिया।
शर्मिला धनखड़ ने संघर्ष को बनाया ताकत
पैरा एथलेटिक्स में भारत की शर्मिला धनखड़ ने महिलाओं की शॉटपुट F57 स्पर्धा में गोल्ड जीतकर इतिहास रच दिया। उनका सफर आसान नहीं रहा, लेकिन उन्होंने हर मुश्किल को पीछे छोड़ते हुए देश के लिए स्वर्ण पदक जीता। उनकी सफलता इस बात का उदाहरण है कि अगर हौसला मजबूत हो तो कोई भी चुनौती रास्ता नहीं रोक सकती।
जूडो में अस्मिता डे ने रचा इतिहास
कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत को जूडो में पहला स्वर्ण दिलाने का काम अस्मिता डे ने किया। उन्होंने फाइनल मुकाबले में शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड अपने नाम किया। उनकी इस जीत ने भारतीय जूडो को नई पहचान दी। लंबे समय से जिस उपलब्धि का इंतजार था, वह आखिरकार ग्लासगो में पूरी हुई।
बॉक्सिंग में बेटियों का पंच
अगर किसी एक खेल में भारतीय महिला खिलाड़ियों का सबसे ज्यादा दबदबा देखने को मिला तो वह बॉक्सिंग रही। भारत की महिला मुक्केबाजों ने एक के बाद एक शानदार मुकाबले जीतकर कुल पांच स्वर्ण पदक देश की झोली में डाले। साक्षी चौधरी, प्रीति पवार, जैस्मीन लम्बोरिया, प्रिया घांघस और अरुंधती चौधरी ने अपने-अपने भार वर्ग में गोल्ड जीतकर भारत का नाम रोशन किया। इन पांच गोल्ड ने भारत की पदक तालिका को मजबूत बनाने में बड़ी भूमिका निभाई।
102 डिग्री बुखार में भी जीता गोल्ड
इन खेलों की सबसे प्रेरणादायक कहानी अरुंधती चौधरी की रही। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने करीब 102 डिग्री बुखार होने के बावजूद फाइनल मुकाबला खेला और गोल्ड मेडल जीत लिया। उनका यह जज्बा सिर्फ खिलाड़ियों के लिए ही नहीं, बल्कि हर भारतीय के लिए प्रेरणा बन गया। दर्द, कमजोरी और बीमारी के बावजूद देश के लिए खेलना आसान नहीं होता, लेकिन अरुंधती ने यह कर दिखाया।
महिला खिलाड़ियों ने बदली भारतीय खेलों की तस्वीर
एक समय था जब बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में भारत की उम्मीदें मुख्य रूप से पुरुष खिलाड़ियों पर टिकी रहती थीं। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में यह तस्वीर तेजी से बदली है।
अब ओलंपिक हो, एशियन गेम्स हो या कॉमनवेल्थ गेम्स, महिला खिलाड़ी लगातार भारत के लिए सबसे ज्यादा पदक जीत रही हैं। ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में भी यही देखने को मिला, जहां आधे से ज्यादा गोल्ड महिलाओं ने दिलाए।
सिर्फ पदक नहीं, समाज को भी मिला बड़ा संदेश
इन खिलाड़ियों की सफलता सिर्फ खेल तक सीमित नहीं है। इनकी कहानियां लाखों बेटियों को यह विश्वास दिलाती हैं कि मेहनत और लगन से कोई भी सपना पूरा किया जा सकता है।
इनमें से कई खिलाड़ी साधारण परिवारों से आती हैं। किसी ने आर्थिक तंगी देखी, किसी ने सुविधाओं की कमी झेली, तो किसी ने चोट और बीमारी से लड़ाई लड़ी। लेकिन इन सभी ने हार नहीं मानी और आखिरकार देश के लिए इतिहास रच दिया।
भारत के शानदार अभियान में महिलाओं की बड़ी भूमिका
भारत ने इस बार कुल 39 पदक जीते। इनमें 13 गोल्ड, 17 सिल्वर और 9 ब्रॉन्ज शामिल रहे। टीम इंडिया ने कई नए रिकॉर्ड बनाए और कई खेलों में पहली बार शानदार प्रदर्शन किया। हालांकि पूरे अभियान में महिला खिलाड़ियों का योगदान सबसे ज्यादा चर्चा में रहा। उनके आठ गोल्ड ने यह साफ कर दिया कि भारतीय खेलों का भविष्य अब महिलाओं के दम पर और मजबूत होता जा रहा है।
आने वाले बड़े टूर्नामेंट के लिए बढ़ा आत्मविश्वास
कॉमनवेल्थ गेम्स में मिली यह सफलता सिर्फ एक टूर्नामेंट तक सीमित नहीं है। इससे खिलाड़ियों का आत्मविश्वास बढ़ेगा और आने वाले एशियन गेम्स, विश्व चैंपियनशिप और ओलंपिक जैसे बड़े आयोजनों में भी भारत को इसका फायदा मिल सकता है। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि अगर खिलाड़ियों को इसी तरह सुविधाएं और बेहतर प्रशिक्षण मिलता रहा, तो भारत भविष्य में और ज्यादा अंतरराष्ट्रीय पदक जीत सकता है।
हमारी राय
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय महिला खिलाड़ियों का प्रदर्शन सिर्फ पदकों की कहानी नहीं है, बल्कि यह बदलते भारत की तस्वीर भी दिखाता है। आज देश की बेटियां हर खेल में दुनिया की सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों को चुनौती दे रही हैं और जीत भी रही हैं। जरूरत इस बात की है कि सरकार, खेल संघ और समाज मिलकर इन खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं, प्रशिक्षण और समर्थन दें। अगर ऐसा होता रहा, तो आने वाले वर्षों में भारत की ‘नारी शक्ति’ दुनिया के हर बड़े खेल मंच पर तिरंगा और ऊंचा लहराएगी।









