भारतीय क्रिकेट में इन दिनों एक नई चर्चा ने जोर पकड़ लिया है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या वीवीएस लक्ष्मण टीम इंडिया के हेड कोच बनना चाहते थे? क्या वह गौतम गंभीर की जगह यह जिम्मेदारी संभालने के इच्छुक थे? यह चर्चा तब शुरू हुई जब टीम इंडिया के व्यस्त अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम के बीच बीसीसीआई ने कुछ टूर्नामेंट्स और दौरों के लिए वीवीएस लक्ष्मण को टीम की जिम्मेदारी सौंपी। इसके बाद कई तरह की अटकलें लगने लगीं।
हालांकि सामने आई रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला उतना सीधा नहीं है, जितना सोशल मीडिया पर बताया जा रहा है। दरअसल, चर्चा का केंद्र स्प्लिट कोचिंग मॉडल है, यानी एक ही समय में अलग-अलग टीमों के लिए अलग-अलग कोचिंग स्टाफ का इस्तेमाल करना। इसी वजह से वीवीएस लक्ष्मण का नाम फिर से चर्चा में आया है।
आखिर कैसे शुरू हुई ये चर्चा?
हाल ही में खबरें सामने आईं कि भारत के व्यस्त क्रिकेट कैलेंडर को देखते हुए बीसीसीआई ने कुछ सीमित दौरों और प्रतियोगिताओं के लिए वीवीएस लक्ष्मण को टीम की जिम्मेदारी देने का फैसला किया। गौतम गंभीर सीनियर टीम के साथ अपने मुख्य असाइनमेंट में व्यस्त थे, इसलिए लक्ष्मण को जिम्बाब्वे दौरे और एशियन गेम्स जैसी जिम्मेदारियां सौंपी गईं।
इसके बाद यह चर्चा शुरू हो गई कि क्या लक्ष्मण स्थायी रूप से हेड कोच बनना चाहते हैं। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि उन्होंने इस भूमिका में रुचि दिखाई थी, लेकिन उपलब्ध जानकारी से यह साफ नहीं होता कि उन्होंने गौतम गंभीर की जगह लेने की कोई औपचारिक इच्छा जताई थी।
स्प्लिट कोचिंग मॉडल क्या होता है?
स्प्लिट कोचिंग मॉडल का मतलब है कि जब एक देश की दो टीमें अलग-अलग टूर्नामेंट या सीरीज खेल रही हों, तब दोनों के लिए अलग-अलग कोच नियुक्त किए जाएं। भारत जैसे बड़े क्रिकेट देश के लिए यह मॉडल नया नहीं है। पहले भी राहुल द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्मण कई बार अंतरिम कोच की भूमिका निभा चुके हैं। अब एक बार फिर बीसीसीआई इसी मॉडल का इस्तेमाल कर रही है ताकि खिलाड़ियों पर भी ज्यादा दबाव न पड़े और कोचिंग स्टाफ को भी पर्याप्त आराम मिल सके।
क्या गौतम गंभीर की कुर्सी पर कोई खतरा है?
फिलहाल ऐसी कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है जिससे यह कहा जा सके कि गौतम गंभीर को हटाने की तैयारी चल रही है। वह अब भी भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम के नियमित हेड कोच हैं और बीसीसीआई का उन पर भरोसा कायम है। हालांकि टीम के प्रदर्शन और व्यस्त कार्यक्रम को देखते हुए कोचिंग स्टाफ में बदलाव या अतिरिक्त जिम्मेदारियां बांटने की चर्चा जरूर चल रही है। लेकिन इसे हेड कोच बदलने की प्रक्रिया मानना सही नहीं होगा।
वीवीएस लक्ष्मण को क्यों मिलती रहती है जिम्मेदारी?
वीवीएस लक्ष्मण लंबे समय से भारतीय क्रिकेट की युवा प्रतिभाओं के साथ काम कर रहे हैं। वह राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी (अब सेंटर ऑफ एक्सीलेंस) से जुड़े रहे हैं और कई युवा खिलाड़ियों के विकास में उनकी अहम भूमिका रही है। जब भी सीनियर टीम के नियमित कोच उपलब्ध नहीं होते, बीसीसीआई अक्सर लक्ष्मण पर भरोसा जताती है। इसकी वजह उनका अनुभव, खिलाड़ियों के साथ बेहतर तालमेल और भारतीय क्रिकेट सिस्टम की गहरी समझ है।
क्या खिलाड़ियों को पसंद है लक्ष्मण का तरीका?
जिम्बाब्वे दौरे के दौरान खिलाड़ियों ने भी लक्ष्मण के साथ काम करने के अनुभव की तारीफ की। कप्तान श्रेयस अय्यर ने सार्वजनिक रूप से उनका धन्यवाद किया और कहा कि उनके मार्गदर्शन से टीम को काफी फायदा मिला। युवा खिलाड़ियों के साथ उनका शांत स्वभाव और व्यक्तिगत मार्गदर्शन उन्हें एक सफल कोच के रूप में अलग पहचान दिलाता है।
गौतम गंभीर और लक्ष्मण की कोचिंग शैली में क्या फर्क है?
गौतम गंभीर को आक्रामक सोच और निडर फैसलों के लिए जाना जाता है। वह खिलाड़ियों से सकारात्मक लेकिन तेज़ क्रिकेट खेलने की उम्मीद रखते हैं। वहीं वीवीएस लक्ष्मण का अंदाज थोड़ा अलग माना जाता है। वह खिलाड़ियों के मानसिक विकास, तकनीक और धैर्य पर ज्यादा जोर देते हैं। यही वजह है कि कई युवा खिलाड़ी उनके साथ सहज महसूस करते हैं। दोनों की अपनी-अपनी खूबियां हैं और भारतीय क्रिकेट को दोनों के अनुभव का फायदा मिल रहा है।
क्या भविष्य में स्थायी बदलाव हो सकता है?
क्रिकेट में भविष्य के बारे में निश्चित तौर पर कुछ भी कहना मुश्किल होता है। अगर आने वाले समय में बीसीसीआई स्थायी रूप से स्प्लिट कोचिंग मॉडल अपनाती है, तो संभव है कि अलग-अलग फॉर्मेट या टूर्नामेंट के लिए अलग कोचिंग व्यवस्था देखने को मिले। हालांकि फिलहाल ऐसा कोई आधिकारिक फैसला नहीं लिया गया है। मौजूदा समय में गौतम गंभीर ही टीम इंडिया के मुख्य कोच हैं और लक्ष्मण जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
बीसीसीआई की प्राथमिकता क्या है?
भारतीय टीम का अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम लगातार व्यस्त होता जा रहा है। ऐसे में बोर्ड की कोशिश यही है कि खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ पर जरूरत से ज्यादा दबाव न पड़े। इसी वजह से जरूरत के हिसाब से अलग कोचिंग टीम तैयार करने की रणनीति अपनाई जा रही है। इससे खिलाड़ियों को बेहतर तैयारी का मौका मिलता है और टीम का प्रदर्शन भी प्रभावित नहीं होता।
हमारी राय
वीवीएस लक्ष्मण और गौतम गंभीर को लेकर चल रही चर्चा को फिलहाल कोचिंग सिस्टम के बदलाव के नजरिए से देखना चाहिए, न कि किसी पद की लड़ाई के रूप में। उपलब्ध जानकारी के अनुसार वीवीएस लक्ष्मण के गौतम गंभीर की जगह स्थायी हेड कोच बनने का कोई आधिकारिक संकेत नहीं मिला है। बीसीसीआई फिलहाल व्यस्त क्रिकेट कैलेंडर को संभालने के लिए स्प्लिट कोचिंग मॉडल पर भरोसा कर रही है। ऐसे में दोनों दिग्गजों का अनुभव भारतीय क्रिकेट के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।









