श्री गोविंद देवजी मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण आपको घड़ी पहने अवतार में मिलेंगे। ये घड़ी सामान्य घड़ी नहीं है। ये भगवान श्रीकृष्ण के पल्स से चलती है। लोगों का मानना है कि इस मूर्ति में प्राण होने का सबूत है। प्राचीन काल में अंग्रेजों ने प्राण होने का सबूत देखने के लिए घड़ी पहनाई थी और तब कुछ ऐसा हुआ कि सभी देखकर हैरान रह गए। जी हां, जब श्रीकृष्ण जी को घड़ी पहनाई गई तो रुकी घड़ी अपने आप चालू हो गई और समय बताने लगी। तब से ये घड़ी भगवान जी की कलाई पर बंधी है। रोज लाखों की संख्या में भक्तगण दर्शन करने आते हैं।
इस घड़ी की एक और खासियत है कि ये व्यक्ति की पल्स से चलती है, वरना नहीं चलती। इसलिए कहा जाता है कि गोविंद देवजी मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण खुद विराजमान हैं। तभी तो ये घड़ी मूर्ति में पहनाने पर चल उठती है।
गोविंद देवजी जाने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश
मंदिर जयपुर रेलवे स्टेशन से 4 किमी. की दूरी पर है, वहीं जयपुर बस स्टैंड से 3 किमी की दूरी पर। अगर आप एयरपोर्ट से आ रहे हैं तो आपको 15 से 20 किमी. की यात्रा करनी पड़ेगी। मंदिर सुबह 8 बजे से रात के 12 बजे तक खुला रहता है। ध्यान रहे कि मंदिर के अंदर फोटो क्लीक की अनुमति नहीं है, इस बात का ध्यान रखें कि पूजा श्रद्धाभाव से हो।
बता दें इस मंदिर में श्री कृष्ण की बाल्यावस्था के रूप की पूजा की जाती है। इस मंदिर का निर्माण महाराज जयसिंह द्वितीय ने 1590 में कराया था। इस मंदिर की मिश्रित वास्तुकला है। ये राजस्थानी और मुगल शैली दोनों की मिश्रित वास्तुकला से निर्मित मंदिर है। इस मंदिर में प्रतिदिन भव्य मंगला, शयन आरती होती है जो विश्वभर में प्रसिद्ध है। हर रोज हजारों की संख्या में भक्तगण दर्शन करने आते हैं। इसके आसपास का इलाका बहुत ही सुंदर और शांत है।









