हिंदू धर्म में अक्षय तृतीया सबसे शुभ और पवित्र तिथियों में से एक मानी जाती है। इस दिन किए गए शुभ कार्य, दान-पुण्य और निवेश को “अक्षय” यानी कभी न खत्म होने वाला फल देने वाला माना जाता है। यही वजह है कि इस दिन लोग नई शुरुआत, खरीदारी और धार्मिक कार्य विशेष रूप से करते हैं। आधुनिक समय में भी इस पर्व की महत्ता कम नहीं हुई है, बल्कि निवेश और समृद्धि के प्रतीक के रूप में इसकी लोकप्रियता और बढ़ी है।
इस साल कब है अक्षय तृतीया?
साल 2026 में अक्षय तृतीया 19 अप्रैल को मनाई जाएगी। तिथि को लेकर अक्सर भ्रम इसलिए होता है क्योंकि तृतीया तिथि दो दिनों तक फैलती है। लेकिन हिंदू पंचांग में उदय तिथि का विशेष महत्व होता है, इसलिए जिस दिन सूर्योदय के समय तृतीया तिथि रहती है, उसी दिन त्योहार मनाया जाता है।
इस दिन सुबह से ही पूजा, दान और खरीदारी का सिलसिला शुरू हो जाता है। कई लोग पूरे दिन को शुभ मानते हुए अलग-अलग समय पर धार्मिक कार्य करते हैं।
शुभ मुहूर्त कब?
अक्षय तृतीया का सबसे बड़ा आकर्षण इसका शुभ मुहूर्त होता है। इस दिन सुबह से दोपहर तक का समय पूजा और खरीदारी के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। हालांकि, इसे “अबूझ मुहूर्त” भी कहा जाता है, यानी इस दिन किसी भी समय बिना विशेष मुहूर्त देखे शुभ कार्य किए जा सकते हैं।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस दिन ग्रहों की स्थिति इतनी अनुकूल होती है कि हर कार्य सफलता की ओर बढ़ता है। इसलिए लोग इस दिन घर, वाहन या सोने जैसी कीमती चीजों की खरीदारी करते हैं।
अक्षय तृतीया का धार्मिक महत्व
इस दिन का धार्मिक महत्व बहुत गहरा है। “अक्षय” शब्द का अर्थ ही है, जो कभी खत्म न हो। माना जाता है कि इस दिन किए गए पुण्य कार्यों का फल जीवन भर और आने वाले जन्मों तक मिलता रहता है।
भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से धन, समृद्धि और सुख की प्राप्ति होती है। यही कारण है कि इस दिन लोग पूजा-पाठ के साथ-साथ दान को भी विशेष महत्व देते हैं। धार्मिक ग्रंथों में भी इस तिथि को अत्यंत पुण्यदायक बताया गया है।
पौराणिक मान्यताएं और कथाएं
अक्षय तृतीया से जुड़ी कई पौराणिक कथाएं इसकी महत्ता को और बढ़ाती हैं। मान्यता है कि इसी दिन भगवान परशुराम का जन्म हुआ था, जो भगवान विष्णु के छठे अवतार माने जाते हैं।
इसके अलावा महाभारत काल में द्रौपदी को अक्षय पात्र इसी दिन प्राप्त हुआ था, जिससे कभी भोजन की कमी नहीं होती थी। यह दिन त्रेता युग की शुरुआत का भी प्रतीक माना जाता है।
इन कथाओं से यह स्पष्ट होता है कि अक्षय तृतीया का संबंध समृद्धि, धर्म और नई शुरुआत से जुड़ा हुआ है।
इस दिन क्या करें?
अक्षय तृतीया के दिन लोग अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए कई कार्य करते हैं। इस दिन नई शुरुआत करना बेहद शुभ माना जाता है, चाहे वह नया व्यवसाय हो या कोई व्यक्तिगत लक्ष्य।
इसके अलावा, दान-पुण्य करना इस दिन का सबसे महत्वपूर्ण कार्य माना जाता है। गरीबों को अन्न, वस्त्र या धन दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। साथ ही, धार्मिक अनुष्ठान और व्रत करने से मानसिक शांति और आत्मिक संतोष मिलता है।
अक्षय तृतीया पर खरीदारी का महत्व
इस दिन खरीदारी करना विशेष रूप से शुभ माना जाता है। खासकर सोना खरीदने की परंपरा सदियों से चली आ रही है।
माना जाता है कि इस दिन खरीदी गई वस्तुएं भविष्य में समृद्धि और लाभ का कारण बनती हैं। आज के समय में लोग सिर्फ सोना ही नहीं, बल्कि प्रॉपर्टी, वाहन और अन्य निवेश विकल्पों में भी पैसा लगाते हैं।
यह दिन आर्थिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बन गया है, क्योंकि लोग इसे निवेश के लिए सबसे अच्छा समय मानते हैं।
क्या है पूजा की विधि?
अक्षय तृतीया के दिन विधि-विधान से पूजा करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। सुबह स्नान करके साफ वस्त्र पहनने के बाद भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है।
धूप-दीप, फूल, फल और प्रसाद अर्पित कर मंत्रों का जाप किया जाता है। इसके बाद दान करना इस पूजा का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है।
पूजा के दौरान मन में सकारात्मक भाव और श्रद्धा होना सबसे जरूरी माना जाता है, क्योंकि सच्ची भक्ति ही पूजा को सफल बनाती है।
अक्षय तृतीया और ज्योतिषीय महत्व
ज्योतिष के अनुसार इस दिन सूर्य और चंद्रमा दोनों उच्च स्थिति में होते हैं, जिससे यह तिथि बेहद शुभ बन जाती है। ग्रहों की यह स्थिति सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाती है और जीवन में नए अवसर लाती है। यही कारण है कि इस दिन किए गए कार्यों में सफलता मिलने की संभावना अधिक होती है।
इस दिन किसी भी शुभ कार्य के लिए अलग से मुहूर्त देखने की जरूरत नहीं होती, जो इसे और खास बनाता है।
सामाजि और सांस्कृतिक महत्व
अक्षय तृतीया का महत्व सिर्फ धार्मिक ही नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से भी बहुत बड़ा है। इस दिन कई जगहों पर सामूहिक विवाह आयोजित किए जाते हैं, जिससे समाज के कमजोर वर्गों को मदद मिलती है।
इसके अलावा, लोग एक-दूसरे की मदद करते हैं और समाज में दान और सेवा की भावना को बढ़ावा देते हैं। यह पर्व समाज में सकारात्मकता और एकता का संदेश देता है।
अक्षय तृतीया 2026, 19 अप्रैल को मनाई जाएगी और यह दिन हर तरह से शुभ और लाभदायक माना जाता है। इस दिन किया गया हर शुभ कार्य, निवेश या दान जीवन में सुख-समृद्धि और सफलता लाने वाला माना जाता है।
अगर आप अपने जीवन में नई शुरुआत करना चाहते हैं या आर्थिक रूप से मजबूत बनना चाहते हैं, तो यह दिन आपके लिए बेहद खास अवसर हो सकता है। साथ ही, यह पर्व हमें सिखाता है कि सच्ची समृद्धि केवल धन में नहीं, बल्कि अच्छे कर्म और सेवा में भी होती है।









