20 रुपए के हरे नोट के पीछे दाएं साइड स्थित इमारत एलोरा की गुफाएं हैं जिनका निर्माण 600 से 1000 A.D. में हुआ था। यहां 34 धार्मिक मूर्तियां है जो अपनी विशेष कलाकृति की वजह से विश्वभर में प्रसिद्ध हैं। इन मूर्तियों का निर्माण ज्वालमुखी से निकली चट्टानों से हुआ है। जब ज्वालामुखी भूटता है तो ज्वाला के छोटे कण तेजी से बाहर इधर-उधर बिखर जाते हैं। ये तेजी से ठंडे होते हैं तो चट्टानों का निर्माण होता है। इन्ही चट्टानों को कुरेदकर मूर्तियों का निर्माण किया गया है। एलोरा की गुफाएं 1500 साल पुरानी भारती की संस्कृति का प्रारूप है।


एक साथ 3 धर्मों के अवशेष

 

एलोरा की गुफाओं में एक साथ 3 धर्मों के अवशेष देखने को मिलते हैं। हिंदू, जैन और बौद्ध धर्म की कई धार्मिक मूर्तियों और परंपराओं के अवशेष यहां आज भी मौजूद हैं जिन्हें देखने लोग दूर-दराज से आते हैं। महाराष्ट्र के संभाजीनगर (पहले औरंगाबाद) से 30 किमी. की दूरी पर ये एलोरा की गुफाएं स्थित हैं। एलोरा की ये गुफाएं अपनी अद्भुत वास्तुकला और धार्मिक सद्भाव के लिए प्रसिद्ध है। यहां राष्ट्रकूट राजाओं द्वारा निर्मित कैलाश मंदिर है जो दुनिया के सबसे बड़े अखंड रॉक-कट मंदिरों में से एक है।


एलोरा की गुफाएं घूमने का सही समय

 

एलोरा की गुफाएं घूमने का सही समय सर्दी और मानसून का समय है यानी अक्टूबर से फरवरी या जून से सितंबर के महीनों में आप कभी भी यहां आ सकते हैं। मार्च से मई तक यहां बहुत गर्मी रहती है। अगर आप भी भारत की प्राचीन संस्कृति को जानने और देखने के शौकीन हैं तो अपने परिवारवालों और बच्चों के साथ एक बार आपको यहां जरूर आना चाहिए।


20 रुपए के नोट में एलोरा की गुफाएं क्यों हैं

 

20 रुपए के हरे नोट में एलोरा की गुफाएं कुछ सोचकर ही बनाई गई होंगी। दरअसल ये गुफाएं 1983 से यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल हैं। भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और अद्वितीय वास्तुकला का प्रतीक होने के साथ ही देश की कलात्मक और ऐतिहासिक विरासत को एक वैश्विक पहचान दिलाता है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 'महात्मा गांधी (नई) शृंखला' के हिस्से के रूप में एलोरा को नोट पर मुद्रित किया ताकि भारत की सांस्कृतिक विविधता और इतिहास को बढ़ावा दिया जा सके।