आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में इंसान हर समय किसी न किसी दबाव में जी रहा है। काम का तनाव, बढ़ती जिम्मेदारियां, मोबाइल और सोशल मीडिया की लत ने मानसिक शांति को लगभग हमसे छीन लिया है। ऐसे विचलित माहौल में लोग अब ध्यान और मंत्र जाप की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं। बता दें आपको कि ये केवल एक धार्मिक अभ्यास नहीं, बल्कि मानसिक और भावनात्मक संतुलन पाने का सरल माध्यम भी बनता जा रहा है।

 

बीते कुछ सालों में स्ट्रेस, एंग्जायटी और नींद न आने जैसी समस्याएं लोगों के बीच बढ़ती जा रही हैं। डॉक्टर और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी मानते हैं कि नियमित ध्यान करने से मन शांत होता है और एकाग्रता भी बढ़ती है। इतना ही नहीं मंत्र जाप से सांसों की गति नियंत्रित होती है, जिससे दिमाग को आराम भी मिलता है। यहीं कारण है कि युवा वर्ग भी अब सुबह या रात के समय जब भी समय मिलता है तो कुछ मिनट ध्यान और मंत्र जाप करते हैं।


वर्क फ्रॉम होम से बढ़ी मानसिक थकान

 

वर्क फ्रॉम होम और लंबी स्क्रीन टाइम ने लोगों को शारीरिक रूप से भले ही आराम दिया हो, लेकिन मानसिक थकान बढ़ा दी है। ऐसे में ध्यान और मंत्र जाप एक डिजिटल डिटॉक्स की तरह काम कर रहे हैं। बिना किसी उपकरण के शांत जगह पर बैठकर किया गया ध्यान व्यक्ति को खुद से जोड़ने में मददगार साबित होता है।

 

सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर भी इस ट्रेंड का असर साफ दिखता है। योग गुरुओं, आध्यात्मिक वक्ताओं और मंदिरों के ध्यान सत्रों के वीडियो लाखों लोग देख रहे हैं। खास बात ये है कि अब लोग इसे किसी धर्म विशेष से जोड़कर नहीं, बल्कि आंतरिक शांति और सकारात्मक सोच के साधन के रूप में अपना रहे हैं।

 

इसके अलावा, बदलती जीवनशैली में लोगों को ये एहसास हो गया है कि सिर्फ पैसा और सफलता ही सुख का पैमाना नहीं है। मानसिक संतुलन और आत्मिक शांति भी उतनी ही जरूरी है। ध्यान और मंत्र जाप व्यक्ति को वर्तमान में जीना सिखाते हैं और नकारात्मक विचारों से दूरी बनाने में मदद करते हैं।

 

कुल मिलाकर, भागदौड़ भरी जिंदगी में ध्यान और मंत्र जाप एक आवश्यक जीवन अभ्यास बनता जा रहा है। ये न केवल मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है, बल्कि इंसान को भीतर से मजबूत और संतुलित भी बनाता है।