14 फरवरी, 2026 एक ही तारीख पर मकर संक्रांति और एकादशी पड़ने से सबसे बड़ी दुविधा ये हो गई कि चावल खाए कि नहीं, क्योंकि मकर संक्रांति के दिन चावल की खिचड़ी खाना परंपरा है और एकादशी के दिन चावल खाना नहीं चाहिए। अब जब मकर संक्रांति और एकादशी एक ही दिन पड़ रहा हो तो क्या किया जाए, इस बात को लेकर आज हम चर्चा करेंगे।
दरअसल, मकर संक्रांति और एकादशी दोनों एक ही दिन पड़ रहा है, ऐसा योग लगभग 23 साल बाद बना। यह संयोग धार्मिक रूप से अत्यंत शुभ माना जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि एक ही दिन सूर्य का मकर राशि में प्रवेश और एकादशी की तारीख में मिलना, ये एक दुर्लभ संयोग है। इस दौरान दान पुण्य और उपासना का फल कई गुना बढ़कर मिलता है।
बता दें, मकर संक्रांति हिन्दू पंचाग में एक प्रमुख त्यौहार है। साल का पहला त्यौहार भी है जिसमें सूर्य का उत्तरायण की ओर आगमन होता है। यह दिन नई शुरुआत, समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक है। इस दिन तिल, गुड़ के पकवान बनाए जाते हैं। साथ ही साथ इस दिन दान पुण्य करना शुभ माना जाता है।
उधर, दूसरी तरफ एकादशी का भी उतना ही महत्व है। ये दुर्लभ संयोग आजकल इसलिए चर्चा में है क्योंकि एकादशी के दिन चावल, दाल और खिचड़ी नहीं खाते लेकिन मकर संक्रांति भी उसी दिन है, अब ऐसे में दोनों पर्व की मान्यताओं का पालन कैसे किया जाए, इसे लेकर संकोच हो रहा है।
ऐसे मनाए दोनों त्यौहार एक ही दिन
दरअसल, मकर संक्रांति में चावल , दाल या खिचड़ी का दान पुण्य करना महत्वपूर्ण माना जाता है। आप इसे दान देकर आसानी से मकर संक्रांति का पर्व मना सकते हैं । ऐसा करने से एकादशी का पावन दिन भी मनाया जा सकेगा और आठ ही मकर संक्रांति की परंपरा भी टिकी रहेगी।
मकर संक्रांति के दिन गुड़, चना, चावल का भोग लगाना जरूरी होता है। ये शुभ फल देता है। इस साल मकर संक्रांति और एकादशी संतों भक्तों के लिए पुण्य, दान और आराधना का विशेष महत्व है। अपने रीति रिवाज में संतुलन बनाए रखिए।









