अजमेर शहर में स्थित अजमेर दरगाह विश्वभर में आस्था, अमन और सूफी परंपराएं का विश्वविख्यात केंद्र है। अजमेर शहर में स्थित ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह को अजमेर दरगाह शरीफ कहते हैं। ये दुनिया में आस्था का बहुत बड़ा केंद्र है। ये दरगाह सूफी संत ख्वाजा गरीब नवाज को समर्पित है। ये दरगाह हमें भाईचारे, प्रेम और इंसानियत का संदेश देती है।  कहा जाता है कि यदि आप यहां आकर सच्चे मन से दुआ मांगेंगे तो दुआ कभी खाली नहीं जाएगी। बता दें, यहीं वजह है कि हर साल गहन लाखों जायरीन हाजिरी लगाने आते हैं।

 

अजमेर दरगाह के बारे में

 

अजमेर दरगाह की स्थापना 13वीं शताब्दी में ख़्वाजा मुइनुद्दीन चिश्ती के इंतकाल के बाद हुई। मुगल काल से लेकर आज तक इस दरगाह को शासकों और आम लोगों का संरक्षण मिलता रहा। प्राचीन काल में अकबर से लेकर जहांगीर तक सभी मुगल सम्राट यहां पैदल चलकर जियारत करने आए।

 

अजमेर दरगाह में रोजाना कुरान की तिलावत, कव्वाली और चादर पेश करने की परंपरा है। यहां का माहौल धर्म, जाति और वर्ग की सीमाओं से ऊपर उठकर अमन और मोहब्बत का संदेश देती है। चाहे आप मुस्लिम हो, हिन्दू, सिख या ईसाई आप यहां सच्ची मन से आकर अरदास कर सकते हैं।

 

हर साल होता है उर्स आयोजित

 

अजमेर दरगाह में हर साल उर्स आयोजित किया जाता है। इस दौरान देश और विदेशों से लाखों जायरीन अजमेर आते हैं। उर्स के मौके पास विशेष व्यवस्थाएं जैसे सुरक्षा, स्वास्थ्य, पानी और यातायात प्रबंध किए जाते हैं। अजमेर दरगाह न सिर्फ एक धार्मिक स्थल है बल्कि सामाजिक सौहार्द और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है। यहां आने वाला हर व्यक्ति जाति और धर्म से ऊपर उठकर इंसानियत और भाईचारे का अनुभव करता है। आप भी अपने परिवार वालों के साथ यहां घूमने जरूर आए यकीन मानिए यहां आकर आपको बेहद ही शांति का सुकून का अनुभव मिलेगा।