हिंदू धर्म में मृत्यु को अंत नहीं, बल्कि एक नई यात्रा का शुरूआत माना जाता है। हर कोई सोचता है कि मरने के बाद क्या होता है? आत्मा कहां जाती है? अच्छे-बुरे कर्मों का हिसाब कैसे होता है? इन सवालों के जवाब गरुड़ पुराण में मिलते हैं। यह पुराण भगवान विष्णु और उनके वाहन गरुड़ जी के बीच हुए संवाद पर आधारित है। इसमें मृत्यु के बाद की पूरी प्रक्रिया, यम मार्ग की तकलीफें और पाप कर्मों की वजह से नरक में मिलने वाली सजाओं का विस्तार से जिक्र है।

 

आज हम आपको गरुड़ पुराण के आधार पर बताएंगे कि मृत्यु के बाद आत्मा का सफर कैसा होता है। किन लोगों को नरक जाना पड़ता है और वहां उन्हें किस तरह की यातनाएं भुगतनी पड़ती हैं। यह जानकारी पढ़कर आप समझ पाएंगे कि जीवन में अच्छे कर्म क्यों जरूरी हैं।

 

गरुड़ पुराण क्या है और क्यों महत्वपूर्ण?

 

गरुड़ पुराण हिंदू धर्म के 18 महापुराणों में से एक है। यह भगवान विष्णु को समर्पित है। इसमें गरुड़ जी भगवान विष्णु से कई सवाल पूछते हैं। खासतौर पर मृत्यु, पुनर्जन्म, नरक-स्वर्ग और कर्मों के फल के बारे में। भगवान विष्णु गरुड़ जी को बताते हैं कि जो लोग दया, धर्म और सच्चाई से दूर रहते हैं, बुरे लोगों की संगत करते हैं या मोह-माया में फंस जाते हैं, उन्हें मृत्यु के बाद भारी दुख झेलने पड़ते हैं। यह पुराण इसलिए भी पढ़ा जाता है क्योंकि इसमें मृत्यु के बाद की सच्चाई बताई गई है। परिवार के लोग मरने वाले के बाद 13 दिनों तक इसे सुनते हैं ताकि आत्मा को शांति मिले।

 

भगवान विष्णु और गरुड़ का संवाद

 

एक बार गरुड़ जी वैकुंठ में भगवान विष्णु के पास बैठे थे। उन्होंने पूछा, "हे प्रभु, आपने मुझे भक्ति का रास्ता कई बार बताया। अब मैं यम मार्ग के बारे में जानना चाहता हूं। पापी लोगों को वहां क्या-क्या दुख मिलते हैं?

 

भगवान विष्णु ने जवाब दिया कि जो लोग दया और धर्म को छोड़कर बुराई में लगे रहते हैं, उन्हें अपवित्र नरक में जाना पड़ता है। उनके पाप और पुण्य के फल भोगने के बाद शरीर में रोग लगते हैं। फिर काल अचानक आ जाता है।

 

मृत्यु का समय कैसे आता है?

 

जिंदगी भर पुण्य-पाप के फल भोगने के बाद इंसान बीमार पड़ जाता है। बुढ़ापे में घर वाले उसका सम्मान नहीं करते। वह अपमान सहते हुए खाना-पीना करता है। धीरे-धीरे भूख और इच्छाएं कम हो जाती हैं।

 

अंतिम समय में प्राण निकलने लगते हैं। आंखें उलट जाती हैं, खांसी आने लगती है, सांस लेना मुश्किल हो जाता है और गले से अजीब आवाज निकलने लगती है। इस वक्त इंसान को एक खास शक्ति मिल जाती है। वह इस लोक और परलोक दोनों को एक साथ देखने लगता है।

 

यमदूतों का आगमन और आत्मा का दर्द

 

जब यमदूत करीब आते हैं तो सारी इंद्रियां कमजोर पड़ जाती हैं। प्राण निकलने का एक-एक पल कल्प जितना लंबा लगता है। दर्द ऐसा होता है जैसे सौ बिच्छू एक साथ डंक मार रहे हों। मुंह में लार भर जाता है और फेन निकलने लगता है।

 

पापी लोगों के प्राण नीचे वाले द्वार यानी गुदा मार्ग से निकलते हैं। यमदूत हाथ में पाश और डंडा लिए आते हैं। वे कौए जैसे काले होते हैं, बाल ऊपर खड़े रहते हैं, दांत किटकिटाते हैं और आंखें गुस्से से लाल। कमजोर दिल वाला इंसान उन्हें देखकर मल-मूत्र कर देता है। यमदूत गले में पाश डालकर आत्मा को जबरदस्ती यम मार्ग पर ले जाते हैं। वे डराते हैं, चिल्लाते हैं और आत्मा को कांपने लगती है। भूख-प्यास, धूप और हवा से परेशान आत्मा की पीठ पर कोड़े पड़ते हैं।

 

यम मार्ग पर भयानक यात्रा

 

यम मार्ग पर कोई आराम नहीं, न पानी। गर्म रेत का रास्ता है। आत्मा को पैदल चलना पड़ता है। जंगल में भटकती हुई आत्मा रोती-चिल्लाती है। दो या तीन मुहूर्त में यमलोक पहुंच जाती है। रास्ते में यमदूत उसे नरक की भयानक यातनाएं दिखाते हैं। इन यातनाओं को देखकर आत्मा डर जाती है। फिर यम की आज्ञा से आकाश मार्ग से वापस मनुष्य लोक आती है। यहां शरीर में घुसने की कोशिश करती है लेकिन यमदूत पकड़कर पाश से बांध लेते हैं। थकान से जगह-जगह गिर पड़ती है।

 

पिंडदान न करने पर प्रेत योनि

 

जिन लोगों का पिंडदान नहीं किया जाता, उनकी आत्मा प्रेत बन जाती है। वे जंगलों में दुखी होकर घूमते रहते हैं। इसलिए श्राद्ध और पिंडदान बहुत जरूरी है। इससे आत्मा को राहत मिलती है और आगे की यात्रा आसान हो जाती है।

 

पाप कर्मों से नरक में कैसी सजा?

 

गरुड़ पुराण बताता है कि बुरे कर्म करने वालों को अलग-अलग नरकों में भेजा जाता है। जो लोग दूसरों को धोखा देते हैं, चोरी करते हैं, हिंसा करते हैं या धर्म से मुंह मोड़ते हैं, उन्हें भयंकर यातनाएं झेलनी पड़ती हैं। यमदूत उन्हें पाश से बांधकर ले जाते हैं। गर्म रेत, कोड़े, भूख-प्यास जैसी तकलीफें तो आम हैं। नरक में और भी भयानक सजाएं हैं जो पाप के हिसाब से दी जाती हैं। आत्मा को इन यातनाओं के बाद फिर से जन्म लेना पड़ता है। कभी पशु-पक्षी, कीड़े-मकोड़े या निचली योनि में। भगवान विष्णु ने गरुड़ जी को बताया कि दया, सत्य और भक्ति से बचने वाले लोग ही इस रास्ते पर जाते हैं। अच्छे कर्म करने वाले को सुख मिलता है।

 

अच्छे कर्मों का फल

 

गरुड़ पुराण सिर्फ डराने के लिए नहीं है। यह सिखाता है कि जीवन में अच्छे काम करो। गरीबों की मदद करो, मंदिर जाओ, भगवान का नाम लो। ऐसे लोगों की आत्मा को आसानी से अच्छा जन्म या स्वर्ग मिलता है। मृत्यु के बाद का सफर कर्मों पर निर्भर करता है। इसलिए आज से ही सोचो कि क्या कर रहे हो। परिवार को भी अच्छी संस्कार दो।

 

क्यों पढ़ा जाता है गरुड़ पुराण?

 

मृत्यु के बाद 13 दिनों तक गरुड़ पुराण पढ़ने का रिवाज है। इससे आत्मा को शांति मिलती है और परिवार को समझ आती है कि जीवन कितना कीमती है। कई लोग कहते हैं कि यह पुराण सुनकर जीवन बदल जाता है। पाप से बचने की प्रेरणा मिलती है।

 

गरुड़ पुराण का मुख्य संदेश है, मृत्यु निश्चित है लेकिन कर्म अमर हैं। जो आज अच्छाई करता है, कल उसे अच्छा फल मिलेगा। बुराई करने वाला नरक की आग में जलता रहेगा। आजकल के व्यस्त जीवन में हम भूल जाते हैं कि एक दिन सब छोड़कर जाना है। गरुड़ पुराण हमें याद दिलाता है कि धर्म, दया और सत्य का रास्ता अपनाओ। भक्ति करो, तो मृत्यु के बाद का सफर भी आसान हो जाएगा।

 

यह रहस्य जानकर कई लोगों की आंखें खुल जाती हैं। अगर आप भी मृत्यु के बाद की यात्रा समझना चाहते हैं तो गरुड़ पुराण जरूर पढ़ें या सुनें। यह न सिर्फ जानकारी देता है बल्कि जीवन जीने का सही तरीका भी सिखाता है।