गर्मी ने इस साल लोगों का हाल बेहाल कर रखा है। सुबह से ही तेज धूप, गर्म हवाएं और उमस लोगों को परेशान कर रही हैं। इसी बीच अब नौतपा की शुरुआत हो चुकी है। हिंदू पंचांग और ज्योतिष में नौतपा को बेहद खास माना जाता है। मान्यता है कि इन 9 दिनों में सूर्य देव का प्रभाव सबसे ज्यादा तेज हो जाता है और धरती पर भीषण गर्मी पड़ती है।
हालांकि नौतपा को सिर्फ गर्मी से जोड़कर नहीं देखा जाता। ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं में इसे प्रकृति के संतुलन और ग्रहों के प्रभाव से भी जोड़ा जाता है। खास बात यह है कि जहां एक तरफ सूर्य की तपिश बढ़ती है, वहीं दूसरी तरफ चंद्रमा की पूजा और ठंडक को भी इस दौरान महत्वपूर्ण माना जाता है।
आखिर क्या होता है नौतपा?
नौतपा का मतलब होता है ‘नौ दिनों की तपिश’। जब सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करता है, तब नौतपा शुरू माना जाता है। ज्योतिष के अनुसार इस समय सूर्य की किरणें धरती पर ज्यादा सीधी और प्रभावशाली मानी जाती हैं। यही वजह है कि इस दौरान गर्मी काफी बढ़ जाती है।
पुराने समय में लोग नौतपा को मौसम के बड़े बदलाव का संकेत मानते थे। माना जाता था कि अगर नौतपा के दौरान अच्छी गर्मी पड़े, तो आगे चलकर मानसून भी बेहतर हो सकता है। यही वजह है कि किसान भी इस समय पर खास नजर रखते थे।
सूर्य पूजा का क्यों बढ़ जाता है महत्व?
नौतपा के दौरान सूर्य देव की पूजा को बेहद शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि सूर्य ऊर्जा, आत्मविश्वास और स्वास्थ्य के प्रतीक हैं। इसलिए इस दौरान सुबह जल्दी उठकर सूर्य को जल अर्पित करने की परंपरा काफी पुरानी है। कई लोग तांबे के लोटे से सूर्य को जल चढ़ाते हैं और आदित्य हृदय स्तोत्र या गायत्री मंत्र का जाप करते हैं। मान्यता है कि इससे सकारात्मक ऊर्जा मिलती है और जीवन की परेशानियां कम होती हैं।
हालांकि वैज्ञानिक नजरिए से देखें तो सुबह की हल्की धूप शरीर के लिए फायदेमंद मानी जाती है क्योंकि इससे विटामिन D मिलता है। लेकिन दोपहर की तेज धूप से बचने की सलाह दी जाती है।
चंद्रमा की पूजा को भी क्यों माना जाता है खास?
दिलचस्प बात यह है कि नौतपा में सिर्फ सूर्य ही नहीं, बल्कि चंद्रमा की भी चर्चा होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूर्य जहां गर्मी और ऊर्जा का प्रतीक हैं, वहीं चंद्रमा शांति और ठंडक का प्रतीक माने जाते हैं। lइसी वजह से कई लोग इस दौरान रात में चंद्रमा को देखने और चंद्र पूजा करने को शुभ मानते हैं। मान्यता है कि इससे मानसिक शांति मिलती है और मन का तनाव कम होता है
ज्योतिष में चंद्रमा को मन का कारक ग्रह माना जाता है। इसलिए जिन लोगों को मानसिक तनाव, बेचैनी या भावनात्मक अस्थिरता महसूस होती है, उन्हें चंद्र पूजा करने की सलाह दी जाती है।
नौतपा और मौसम के बीच क्या है संबंध?
पुराने समय में मौसम विज्ञान इतना विकसित नहीं था, इसलिए लोग प्रकृति के संकेतों से मौसम का अनुमान लगाते थे। नौतपा भी उन्हीं संकेतों में से एक माना जाता था।
कई मान्यताओं में कहा जाता है कि अगर नौतपा के दौरान अच्छी गर्मी पड़ती है, तो मानसून अच्छा होता है। वहीं अगर इन दिनों में बारिश हो जाए या तापमान कम रहे, तो मानसून कमजोर रहने की आशंका जताई जाती थी। हालांकि आधुनिक मौसम वैज्ञानिक इन बातों को पूरी तरह वैज्ञानिक आधार पर सही नहीं मानते, लेकिन ग्रामीण इलाकों में आज भी लोग नौतपा को मौसम से जोड़कर देखते हैं।
इस दौरान सेहत का खास ध्यान रखना जरूरी
नौतपा के दौरान गर्मी काफी बढ़ जाती है, इसलिए डॉक्टर और स्वास्थ्य विशेषज्ञ लोगों को सावधानी बरतने की सलाह देते हैं। तेज धूप में ज्यादा देर रहने से हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और कमजोरी जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
ऐसे में ज्यादा पानी पीना, हल्का भोजन करना और दोपहर में धूप से बचना जरूरी माना जाता है। कई लोग इस दौरान बेल का शरबत, सत्तू, छाछ और नारियल पानी जैसी चीजें पीना पसंद करते हैं। पुराने समय में भी लोग गर्मी से बचने के लिए मिट्टी के घड़े का पानी, खस के पर्दे और सूती कपड़ों का इस्तेमाल करते थे।
धार्मिक कार्यों में क्यों बढ़ जाती है रुचि?
नौतपा के दौरान कई लोग पूजा-पाठ, दान और मंत्र जाप पर ज्यादा ध्यान देते हैं। माना जाता है कि सूर्य देव की कृपा पाने के लिए इस दौरान गेहूं, गुड़ और लाल वस्त्र का दान शुभ होता है। कुछ लोग गरीबों को पानी पिलाने और छांव की व्यवस्था करने को भी पुण्य का काम मानते हैं। कई जगहों पर राहगीरों के लिए प्याऊ लगाई जाती हैं। यह परंपरा आज भी कई शहरों और गांवों में देखने को मिलती है।
सोशल मीडिया पर भी हो रही खूब चर्चा
हर साल की तरह इस बार भी नौतपा सोशल मीडिया पर चर्चा में बना हुआ है। लोग गर्मी से जुड़े मीम्स, वीडियो और देसी उपाय शेयर कर रहे हैं। कई लोग यह भी चर्चा कर रहे हैं कि इस बार नौतपा में तापमान पिछले वर्षों से ज्यादा महसूस हो रहा है। कुछ लोग ज्योतिषीय उपायों की बात कर रहे हैं, तो कुछ इसे जलवायु परिवर्तन से जोड़ रहे हैं। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार बढ़ती गर्मी और हीटवेव अब बड़ा खतरा बनती जा रही है।
क्या नौतपा सिर्फ आस्था है या विज्ञान भी?
यह सवाल अक्सर पूछा जाता है कि नौतपा का संबंध सिर्फ धार्मिक मान्यताओं से है या इसका कोई वैज्ञानिक पहलू भी है। दरअसल मई के आखिर और जून की शुरुआत में भारत के कई हिस्सों में तापमान सामान्य रूप से काफी बढ़ जाता है। इसी समय सूर्य की स्थिति भी ऐसी होती है कि गर्मी ज्यादा महसूस होती है। यानी नौतपा को पूरी तरह अंधविश्वास कहना भी सही नहीं होगा, क्योंकि यह मौसम के प्राकृतिक चक्र से जुड़ा हुआ माना जाता है। हालांकि इससे जुड़े कई धार्मिक दावे आस्था पर आधारित हैं।
हमारी राय
नौतपा सिर्फ भीषण गर्मी का नाम नहीं है, बल्कि यह भारतीय परंपराओं, मौसम और आस्था से जुड़ा एक खास दौर माना जाता है। जहां एक तरफ यह लोगों को प्रकृति की ताकत का एहसास कराता है, वहीं दूसरी तरफ सेहत और संतुलित जीवन की जरूरत भी याद दिलाता है। ऐसे समय में धार्मिक मान्यताओं का सम्मान करते हुए वैज्ञानिक सावधानियां अपनाना सबसे जरूरी है। क्योंकि चाहे आस्था हो या मौसम, दोनों यही कहते हैं कि इस भीषण गर्मी में शरीर और मन दोनों को संतुलित रखना बेहद जरूरी है।









