हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि का खास महत्व माना जाता है। लेकिन जब यह पूर्णिमा अधिक मास यानी पुरुषोत्तम मास में पड़े, तो इसका महत्व और बढ़ जाता है। इस साल अधिक मास की पूर्णिमा को लेकर धार्मिक मान्यताओं और शुभ योगों की काफी चर्चा हो रही है। मान्यता है कि इस दिन पूजा-पाठ, दान और चंद्रमा को अर्घ्य देने से विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है।
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक अधिक मास को भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है। इसलिए इस दौरान किए गए जप, तप और दान को बेहद फलदायी माना जाता है। वहीं पूर्णिमा तिथि पर चंद्र पूजा का भी विशेष महत्व बताया गया है।
क्या होता है अधिक मास?
हिंदू पंचांग के अनुसार हर लगभग 3 साल में एक अतिरिक्त महीना आता है, जिसे अधिक मास या पुरुषोत्तम मास कहा जाता है। इस महीने को बेहद पवित्र माना जाता है। धार्मिक ग्रंथों में इसे भगवान विष्णु का प्रिय महीना बताया गया है।मान्यता है कि इस दौरान पूजा-पाठ और धार्मिक कार्यों का फल कई गुना बढ़ जाता है।
पूर्णिमा का क्यों है खास महत्व?
पूर्णिमा तिथि को चंद्रमा अपने पूर्ण आकार में दिखाई देता है। हिंदू धर्म में इस दिन स्नान, दान और पूजा का विशेष महत्व माना गया है।
कई लोग इस दिन व्रत भी रखते हैं और भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी तथा चंद्र देव की पूजा करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि पूर्णिमा पर मन और वातावरण दोनों में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।
इस बार बन रहे हैं शुभ योग
ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक इस बार अधिक मास पूर्णिमा पर कई शुभ योग बनने की बात कही जा रही है। मान्यता है कि ऐसे शुभ संयोग में पूजा-पाठ करने से विशेष लाभ मिल सकता है। इसी वजह से धार्मिक दृष्टि से यह पूर्णिमा काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
चंद्रमा को अर्घ्य देने की परंपरा
पूर्णिमा की रात चंद्रमा को जल अर्पित करने की परंपरा काफी पुरानी मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चंद्रमा को शांति, मन और भावनाओं का कारक माना जाता है। ऐसे में चंद्र देव को अर्घ्य देने से मानसिक शांति और सकारात्मकता मिलने की मान्यता है। कई लोग इस दिन दूध मिला जल भी चंद्रमा को अर्पित करते हैं।
कैसे दिया जाता है चंद्रमा को अर्घ्य?
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक रात में चंद्रमा दिखाई देने के बाद साफ पात्र में जल लेकर अर्घ्य दिया जाता है।कुछ लोग जल में दूध, अक्षत और सफेद फूल भी मिलाते हैं। इसके बाद चंद्र देव से सुख-शांति और अच्छे स्वास्थ्य की कामना की जाती है। हालांकि अलग-अलग क्षेत्रों में इसकी विधि थोड़ी अलग हो सकती है।
भगवान विष्णु की पूजा का महत्व
अधिक मास को भगवान विष्णु का महीना माना जाता है। इसलिए इस दौरान विष्णु पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक इस महीने ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप शुभ माना जाता है। कई भक्त इस दौरान गीता पाठ और विष्णु सहस्रनाम का पाठ भी करते हैं।
दान-पुण्य को क्यों माना जाता है शुभ?
पूर्णिमा और अधिक मास दोनों ही दान के लिए शुभ माने जाते हैं। मान्यता है कि इस दिन जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र और सफेद चीजों का दान करना पुण्यदायी माना जाता है। कई लोग गरीबों को खीर, चावल और दूध का दान भी करते हैं।
मानसिक शांति से भी जोड़ा जाता है चंद्रमा
ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा को मन का स्वामी माना जाता है। इसी वजह से पूर्णिमा के दिन ध्यान, पूजा और मंत्र जाप को मानसिक शांति से भी जोड़कर देखा जाता है। कई लोग इस दिन मेडिटेशन और भजन-कीर्तन भी करते हैं।
सोशल मीडिया पर भी चर्चा
अधिक मास पूर्णिमा और चंद्र अर्घ्य को लेकर सोशल मीडिया पर भी काफी चर्चा देखने को मिल रही है। कई लोग पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व से जुड़े वीडियो और पोस्ट शेयर कर रहे हैं। YouTube और Instagram पर भी इससे जुड़े कंटेंट तेजी से वायरल हो रहे हैं।
क्या वैज्ञानिक नजरिया भी है?
कई विशेषज्ञ मानते हैं कि पूर्णिमा का असर प्रकृति और इंसानी व्यवहार पर भी देखा जाता है। हालांकि धार्मिक मान्यताओं और वैज्ञानिक तथ्यों को लोग अलग-अलग नजरिए से देखते हैं। लेकिन भारत में पूर्णिमा का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व सदियों से बना हुआ है।
किन बातों का रखा जाता है ध्यान?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पूर्णिमा के दिन सात्विक भोजन करना शुभ माना जाता है। कई लोग इस दिन तामसिक भोजन और नकारात्मक विचारों से दूर रहने की कोशिश करते हैं। इसके अलावा पूजा के समय मन को शांत रखने की सलाह दी जाती है।
घरों में भी दिखती है अलग रौनक
पूर्णिमा और अधिक मास के दौरान मंदिरों और घरों में पूजा-पाठ का माहौल देखने को मिलता है। कई लोग घर में दीपक जलाकर भगवान विष्णु और चंद्र देव की पूजा करते हैं। इसी वजह से यह दिन धार्मिक माहौल और श्रद्धा से जुड़ा माना जाता है।
हमारी राय
अधिक मास पूर्णिमा सिर्फ एक धार्मिक तिथि नहीं, बल्कि आस्था, पूजा और मानसिक शांति से जुड़ा विशेष अवसर मानी जाती है। चंद्रमा को अर्घ्य देने और भगवान विष्णु की पूजा की परंपराएं लोगों को आध्यात्मिक रूप से जोड़ती हैं। हालांकि धार्मिक मान्यताएं व्यक्ति की श्रद्धा पर निर्भर करती हैं, लेकिन ऐसे पर्व लोगों को सकारात्मक सोच, दान और आत्मचिंतन की तरफ प्रेरित जरूर करते हैं। यही वजह है कि अधिक मास पूर्णिमा का महत्व आज भी करोड़ों लोगों के बीच बना हुआ है।









