आजकल के दौर में अगर आपके फोन की घंटी बजती है, तो मन में सबसे पहला ख्याल यही आता है कि कहीं ये कोई स्पैम या फ्रॉड कॉल तो नहीं है। हाल ही में ट्रूकॉलर ने साल 2025 की अपनी एक चौंकाने वाली रिपोर्ट जारी की है, जिसमें भारत की स्थिति काफी चिंताजनक दिखाई दे रही है। इस रिपोर्ट के मुताबिक भारत अब दुनिया के उन टॉप देशों में शामिल हो गया है जहां सबसे ज्यादा स्पैम कॉल्स आती हैं।
हम सभी इस बात को महसूस कर रहे हैं कि कैसे दिन भर में अनगिनत अनजान नंबरों से कॉल आते हैं, जो कभी लोन देने का वादा करते हैं तो कभी लॉटरी लगने का झांसा देते हैं। यह समस्या अब सिर्फ एक मामूली परेशानी नहीं रह गई है, बल्कि इसने एक बड़े मानसिक और आर्थिक खतरे का रूप ले लिया है। लोग अब अनजान नंबरों से आने वाली कॉल उठाने से कतराने लगे हैं, जिसकी वजह से कई बार जरूरी काम की बातें भी छूट जाती हैं।
ट्रूकॉलर रिपोर्ट 2025 के आंकड़े और भारत की रैंकिंग
ट्रूकॉलर की इस नई रिपोर्ट ने डिजिटल दुनिया में हलचल मचा दी है क्योंकि भारत अब स्पैम कॉल्स के मामले में दुनिया के टॉप तीन देशों में अपनी जगह बना चुका है। रिपोर्ट बताती है कि भारत में औसतन हर स्मार्टफोन यूजर को महीने में कम से कम पच्चीस से तीस स्पैम कॉल्स का सामना करना पड़ता है। पिछले साल के मुकाबले इस साल इन कॉल्स की संख्या में भारी बढ़ोतरी देखी गई है।
ताज्जुब की बात यह है कि तकनीकी रूप से हम जितना आगे बढ़ रहे हैं, ये स्कैमर्स भी उतने ही शातिर होते जा रहे हैं। डेटा के मुताबिक भारत में करोड़ों की तादाद में हर दिन ऐसी कॉल्स की जाती हैं जिनका मकसद सिर्फ लोगों को परेशान करना या उनके साथ ठगी करना होता है। यह रैंकिंग दर्शाती है कि हमारे देश में टेलीमार्केटिंग और फ्रॉड कॉल्स को रोकने के लिए जो मौजूदा कानून हैं, वे अभी भी पूरी तरह से कारगर साबित नहीं हो पा रहे हैं।
स्पैम कॉल्स इतनी ज्यादा क्यों बढ़ रही हैं?
भारत में स्पैम कॉल्स की इस बाढ़ के पीछे कई बड़े कारण छिपे हुए हैं। सबसे प्रमुख वजह है डेटा की आसानी से उपलब्धता, क्योंकि आज के समय में हमारा फोन नंबर और निजी जानकारियां बाजार में बहुत सस्ते में बिक रही हैं। जब भी हम किसी मॉल में शॉपिंग करते हैं, किसी वेबसाइट पर रजिस्टर करते हैं या कोई अनजान ऐप डाउनलोड करते हैं, तो हम अनजाने में अपना नंबर उन लोगों के हाथ में दे देते हैं जो इसका गलत इस्तेमाल करते हैं।
इसके अलावा आजकल ऑटोमेटेड डायलिंग सॉफ्टवेयर और एआई तकनीक ने इन कॉल करने वालों का काम और भी आसान कर दिया है। अब एक साथ हजारों लोगों को कंप्यूटर के जरिए कॉल किया जा सकता है, जिसमें कॉल करने वाले का खर्चा भी बहुत कम आता है। कंपनियों की बढ़ती प्रतिस्पर्धा और सेल्स टारगेट पूरा करने का दबाव भी टेलीमार्केटिंग कॉल्स को बढ़ावा देता है, जिससे आम आदमी का चैन छिन गया है।
स्कैमर्स के नए तरीके और लोगों को फंसाने के जाल
स्पैम कॉल्स करने वाले अब पुराने घिसे-पिटे तरीकों को छोड़कर नए और खतरनाक रास्ते अपना रहे हैं। आजकल केवाईसी अपडेट करने के नाम पर, बिजली बिल बकाया होने के बहाने या फिर बैंक अकाउंट बंद होने का डर दिखाकर लोगों को तुरंत कॉल पर लिया जाता है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि अब एआई वॉइस क्लोनिंग जैसी तकनीक का इस्तेमाल करके अपनों की आवाज में कॉल करके पैसे ऐंठने के मामले भी बढ़ रहे हैं। लोग अक्सर डर या लालच में आकर अपनी निजी जानकारी जैसे ओटीपी या पिन नंबर शेयर कर देते हैं और पलक झपकते ही उनका बैंक खाता खाली हो जाता है। ये अपराधी इतने प्रोफेशनल तरीके से बात करते हैं कि पढ़े-लिखे लोग भी उनके झांसे में आ जाते हैं। वे अक्सर खुद को सरकारी अधिकारी या किसी नामी बैंक का कर्मचारी बताते हैं ताकि सामने वाले का भरोसा जीता जा सके।
टेलीमार्केटिंग और सेल्स कॉल्स का दबाव
स्पैम कॉल्स का एक बड़ा हिस्सा उन कंपनियों का होता है जो अपने प्रोडक्ट बेचना चाहती हैं। इसमें सबसे आगे बैंक, इंश्योरेंस कंपनियां और रियल एस्टेट वाले होते हैं। आप चाहे डीएनडी यानी डू नॉट डिस्टर्ब सेवा एक्टिवेट ही क्यों न कर लें, ये कंपनियां किसी न किसी तरीके से आप तक पहुंच ही जाती हैं। रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि भारत में टेलीमार्केटिंग का बाजार बहुत बड़ा है और कंपनियां अपने फायदे के लिए नियमों को ताक पर रख देती हैं। कभी-कभी तो एक ही दिन में एक ही इंसान को पांच-छह बार अलग-अलग नंबरों से लोन के लिए कॉल किया जाता है। इससे न केवल समय की बर्बादी होती है बल्कि इंसान का मानसिक तनाव भी बढ़ता है। काम के बीच में बार-बार फोन बजना और फिर वही रटा-रटाया सेल्स का भाषण सुनना किसी को भी चिड़चिड़ा बना सकता है।
सरकार और ट्राई के नए नियम कितने प्रभावी
भारत सरकार और टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी ट्राई ने इन स्पैम कॉल्स पर लगाम लगाने के लिए कई बार सख्त कदम उठाए हैं। हाल ही में मैसेजिंग और कॉलिंग के नियमों में बदलाव भी किए गए हैं ताकि अनजान और फर्जी नंबरों की पहचान की जा सके। ट्राई ने कंपनियों को निर्देश दिए हैं कि वे केवल रजिस्टर्ड हेडर के जरिए ही प्रमोशनल कॉल या मैसेज करें। हालांकि इन सबके बावजूद स्पैमर्स ने नए रास्ते ढूंढ लिए हैं, जैसे वे अब साधारण सिम कार्ड का इस्तेमाल करके कॉल करते हैं जिन्हें ट्रैक करना मुश्किल होता है।
रिपोर्ट के अनुसार सरकारी प्रयासों के बाद भी जमीन पर इनका असर उतना नहीं दिख रहा है जितना होना चाहिए था। जब तक टेलीकॉम कंपनियां इन फर्जी कॉल्स को फिल्टर करने के लिए मजबूत एआई सिस्टम का इस्तेमाल नहीं करेंगी, तब तक आम जनता को पूरी राहत मिलना मुश्किल है।
स्पैम कॉल्स का आम जनता की जिंदगी पर असर
इन अनचाही कॉल्स की वजह से लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर बहुत बुरा असर पड़ रहा है। सबसे बड़ी समस्या तो यह है कि अब लोग सही और जरूरी कॉल उठाने से भी डरने लगे हैं। कई बार ऑफिस की कोई जरूरी बात या परिवार के किसी सदस्य का इमरजेंसी कॉल सिर्फ इसलिए मिस हो जाता है क्योंकि वह नंबर फोन में सेव नहीं होता और यूजर उसे स्पैम समझ लेता है। इसके अलावा बुजुर्गों के लिए यह स्थिति और भी भयानक है क्योंकि वे तकनीकी रूप से उतने जागरूक नहीं होते और अक्सर स्कैमर्स का आसान शिकार बन जाते हैं। इस वजह से समाज में एक तरह का अविश्वास पैदा हो रहा है। लोग अब डिजिटल लेनदेन और फोन पर बात करने को लेकर हमेशा आशंकित रहते हैं। मानसिक रूप से भी यह बहुत थकाने वाला होता है जब आप किसी जरूरी मीटिंग या आराम के वक्त में हों और आपको कोई फालतू की कॉल परेशान करे।
खुद को इन स्पैम और फ्रॉड कॉल्स से कैसे बचाएं
भले ही स्पैम कॉल्स की संख्या बढ़ रही है, लेकिन थोड़ी सी सावधानी बरतकर हम खुद को सुरक्षित रख सकते हैं। सबसे पहले तो अपने फोन में ट्रूकॉलर जैसे कॉलर आईडी ऐप का इस्तेमाल करें जो संदिग्ध कॉल्स को पहले ही लाल रंग में मार्क कर देते हैं। कभी भी किसी अनजान नंबर से आई कॉल पर अपनी निजी जानकारी, बैंक डिटेल या ओटीपी शेयर न करें, चाहे सामने वाला खुद को कितना ही बड़ा अधिकारी क्यों न बताए।
अगर कोई कॉल आपको संदिग्ध लगती है तो उसे तुरंत ब्लॉक कर दें और उसकी रिपोर्ट भी करें ताकि दूसरों को भी इसकी जानकारी मिल सके। अपने फोन की सेटिंग्स में जाकर अनजान कॉलर्स को साइलेंस करने वाले फीचर का इस्तेमाल करना भी एक अच्छा विचार हो सकता है। साथ ही अपने मोबाइल ऑपरेटर के पास जाकर डीएनडी सर्विस को पूरी तरह से एक्टिवेट करवाएं, जिससे कम से कम रजिस्टर्ड कंपनियों की फालतू कॉल्स आना बंद हो सकें।
भविष्य की चुनौतियां और तकनीकी समाधान
आने वाले समय में स्पैम कॉल्स की समस्या और भी जटिल हो सकती है क्योंकि अब स्कैमर्स डीपफेक और एआई का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करने की तैयारी में हैं। ऐसे में केवल नियमों के भरोसे रहना काफी नहीं होगा, बल्कि हमें खुद को तकनीकी रूप से अपडेट रखना होगा। टेलीकॉम कंपनियों को अपने नेटवर्क में ऐसी फिल्टरिंग तकनीक लगानी होगी जो फेक कॉल्स को यूजर तक पहुंचने से पहले ही ब्लॉक कर दे।
साथ ही डेटा प्रोटेक्शन बिल जैसे कानूनों का सख्ती से पालन होना जरूरी है ताकि हमारा पर्सनल डेटा लीक न हो। जनता के बीच जागरूकता फैलाना भी बहुत जरूरी है ताकि हर कोई यह समझ सके कि कौन सी कॉल असली है और कौन सी फर्जी। अगर हम सतर्क रहेंगे और संदिग्ध नंबरों को रिपोर्ट करते रहेंगे, तभी इस ग्लोबल समस्या का मुकाबला किया जा सकता है। ट्रूकॉलर की 2025 की रिपोर्ट हमारे लिए एक चेतावनी की तरह है कि अब हमें अपनी डिजिटल सुरक्षा को लेकर और भी गंभीर होने की जरूरत है।









