बिहार के ‘गया' शहर का बदला नाम, अब इस नाम से जानी जाएगी मोक्ष नगरी, जानें क्या है पौराणिक कहानी?

17 May 2025

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में ऐतिहासिक फैसला लिया गया है, जिसके तहत बिहार की मोक्ष नगरी गया शहर का नाम बदल कर ‘गया जी’ कर दिया है।

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बिहार सरकार का बड़ा फैसला

गया शहर का नाम बदलने के पीछे एक प्राचीन पौराणिक कथा है जो त्रेता युग के गयासुर राक्षस से जुड़ी है।

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गया नाम 'गया जी’ क्यों?

त्रेता युग का राक्षस गयासुर, भगवान विष्णु का बड़ा भक्त था। उसकी तपस्या से खुश होकर विष्णु भगवान ने उसे वरदान दिया कि जो कोई उसे देखे उसके समस्त पाप नष्ट हो जाएं। वह जीव पुण्य आत्मा हो जाए और उसे स्वर्ग में जगह मिले।

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Image Credit: Kaal Chakra YT

कौन था गयासुर?

गयासुर को देखते ही पाप नष्ट होने से विधी का विधान समाप्त हो रहा था इसलिए ब्रह्मा जी की चिंता बढ़ गई। अब गयासुर को स्थिर करना जरूरी था इसलिए ब्रह्मा जी गयासुर के पास गए।

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ब्रह्मा जी की बढ़ गई टेंशन!

ब्रह्म देव ने कहा कि मुझे ब्रह्म-यज्ञ करना है और तुम्हारे समान पुण्य-भूमि मुझे कहीं नहीं मिली। इतना सुनते ही गयासुर लेट गया, 5 कोस तक उसका शरीर फैला गया।

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ब्रह्मा जी ने गयासुर से मांगी जमीन

विशाल यज्ञ के बाद भी गयासुर का शरीर स्थिर नहीं हुआ। यह देखकर देवता चिंतित हो उठे। तब सभी ने मिलकर भगवान विष्णु से यज्ञ में शामिल होने की प्रार्थना की, ताकि गयासुर का शरीर स्थिर हो सके.

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शरीर पर हुआ यज्ञ

जब भगवान विष्णु उसके उपर बैठे तब गयासुर का शरीर स्थिर हो गया और इससे प्रभावित होकर भगवान विष्णु ने उसे वरदान मांगने को कहा।

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विष्णु जी ने दिया एक और वरदान

गया सुर ने वरदान मांगा कि उसे पत्थर की शिला में बदल दिया जाए और भगवान विष्णु समेत सारे देवता वहीं स्थापित हो जाए.

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शिला में बदल गया गयासुर

गयासुर ने इच्छा जताई कि यह स्थान मृत्यु के बाद होने वाले धार्मिक कर्मों का तीर्थ बने। भगवान विष्णु ने उसकी कल्याणकारी भावना की सराहना की और कहा— यहां पितरों के श्राद्ध-तर्पण होंगे, जिससे आत्माओं को मुक्ति मिलेगी।

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तीर्थस्थल की शुरुआत

गयासुर की इच्छा के बाद भगवान विष्णु ने यह वरदान दिया और तभी से गया जी पितृ कर्मों का प्रमुख केंद्र बन गया और आज भी हर साल लाखों लोग अपने पितृ का पिंडदान करने गया जी आते हैं।

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पितृ कर्मों का प्रमुख केंद्र

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