देश में नेशनल हाईवे और एक्सप्रेसवे का नेटवर्क तेजी से बढ़ रहा है। हर दिन लाखों वाहन इन सड़कों का इस्तेमाल करते हैं और बदले में टोल टैक्स चुकाते हैं। लेकिन लंबे समय से कुछ खास श्रेणी के लोगों और सरकारी वाहनों को टोल टैक्स से छूट मिलती रही है। अब खबरें सामने आ रही हैं कि केंद्र सरकार इस व्यवस्था की समीक्षा कर रही है और आने वाले समय में कई सरकारी अधिकारियों तथा VIP श्रेणी के वाहनों को मिलने वाली टोल छूट खत्म की जा सकती है। अगर ऐसा होता है तो यह देश में VIP कल्चर को कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जाएगा। साथ ही इससे सरकार के टोल कलेक्शन में भी बढ़ोतरी हो सकती है।

 

आखिर क्या है पूरा मामला?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सरकार ने टोल टैक्स छूट व्यवस्था की समीक्षा के लिए एक हाई-लेवल कमेटी बनाई थी। इस समिति ने सुझाव दिया है कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल फ्री वाहनों की सूची को छोटा किया जाए या कई श्रेणियों में दी जा रही छूट को समाप्त कर दिया जाए। सबसे पहले उन वाहनों पर फोकस किया जा सकता है जो वरिष्ठ केंद्रीय और राज्य सरकारी अधिकारियों से जुड़े हैं। फिलहाल यह केवल प्रस्ताव के स्तर पर है और सरकार की ओर से अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। लेकिन जिस तरह से इस पर चर्चा चल रही है, उससे साफ है कि आने वाले समय में टोल नियमों में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

 

अभी किन लोगों को मिलती है टोल टैक्स से छूट?

वर्तमान नियमों के तहत कुछ संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों और विशेष श्रेणी के वाहनों को टोल टैक्स नहीं देना पड़ता। इनमें राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल, सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के न्यायाधीश, सांसद, विधायक और कुछ अन्य श्रेणियां शामिल हैं। इसके अलावा कई सरकारी विभागों की ड्यूटी पर लगी गाड़ियों को भी टोल छूट मिलती है। ऐमरजेंसी सेवाओं से जुड़ी एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड और सुरक्षा बलों के कुछ वाहन भी टोल से मुक्त होते हैं। यह व्यवस्था वर्षों से लागू है और इसी वजह से कई लोग इसे VIP संस्कृति का हिस्सा मानते हैं।

 

सरकार बदलाव क्यों करना चाहती है?

इस प्रस्ताव के पीछे सबसे बड़ा कारण राजस्व बढ़ाना बताया जा रहा है। सरकार हर साल राष्ट्रीय राजमार्गों, एक्सप्रेसवे और सड़क बुनियादी ढांचे पर हजारों करोड़ रुपये खर्च करती है। इन परियोजनाओं के निर्माण और रखरखाव में लगातार निवेश की जरूरत होती है। टोल टैक्स इसी खर्च की भरपाई का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। यदि बड़ी संख्या में वाहन बिना टोल दिए सफर करते हैं तो इससे सरकार की आय प्रभावित होती है। इसलिए माना जा रहा है कि सरकार टोल संग्रह प्रणाली को अधिक प्रभावी और संतुलित बनाना चाहती है।

 

VIP कल्चर खत्म करने की भी चर्चा

पिछले कुछ वर्षों में केंद्र सरकार कई बार VIP कल्चर को कम करने की बात कह चुकी है। लाल बत्ती संस्कृति खत्म करने से लेकर कई विशेष सुविधाओं को सीमित करने तक सरकार ने पहले भी कदम उठाए हैं। अब टोल टैक्स छूट की समीक्षा को भी उसी दिशा में देखा जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार नीति निर्माताओं का मानना है कि जब आम नागरिक टोल टैक्स देते हैं तो कई श्रेणियों के सरकारी अधिकारियों को स्थायी छूट देने की व्यवस्था पर दोबारा विचार किया जाना चाहिए। अगर यह बदलाव लागू होता है तो हाईवे पर यात्रा करने वाले कई सरकारी अधिकारी भी आम लोगों की तरह टोल टैक्स चुकाते नजर आ सकते हैं।

 

FASTag सिस्टम में भी हो सकते हैं बदलाव

जानकारी के मुताबिक समीक्षा समिति ने यह भी सुझाव दिया है कि टोल छूट की जगह कुछ नई व्यवस्थाओं पर विचार किया जाए। इनमें वार्षिक FASTag पास जैसी व्यवस्था भी शामिल हो सकती है। इससे टोल संग्रह प्रक्रिया को और आसान बनाया जा सकेगा। सरकार का लक्ष्य यह भी है कि टोल भुगतान पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी रहे। FASTag पहले ही देशभर में टोल कलेक्शन को काफी हद तक आसान बना चुका है। अब भविष्य में इसे और मजबूत बनाने की दिशा में काम किया जा सकता है।

 

लोगों की क्या है राय?

इस प्रस्ताव को लेकर लोगों की राय बंटी हुई है। कई लोग इसे सकारात्मक कदम मान रहे हैं। उनका कहना है कि अगर सभी के लिए समान नियम होंगे तो व्यवस्था ज्यादा पारदर्शी बनेगी और VIP संस्कृति को बढ़ावा नहीं मिलेगा। वहीं दूसरी ओर कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि कुछ सरकारी अधिकारी लगातार सरकारी कार्यों के लिए यात्रा करते हैं। ऐसे में पूरी तरह छूट समाप्त करने से प्रशासनिक कार्यों पर असर पड़ सकता है। इसलिए किसी भी बदलाव से पहले सभी पहलुओं पर विचार करना जरूरी होगा। यानी यह मुद्दा सिर्फ टोल टैक्स का नहीं बल्कि प्रशासनिक सुविधा और समानता के बीच संतुलन बनाने का भी है।

 

आखिरी फैसला अभी बाकी

फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सरकार ने अभी कोई आखिरी आदेश जारी नहीं किया है। अलग-अलग मंत्रालयों, विभागों और संबंधित पक्षों से राय ली जा रही है। समीक्षा प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही यह तय होगा कि किन श्रेणियों को छूट जारी रहेगी और किन्हें टोल टैक्स देना होगा। इसलिए अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि सभी VIP या सरकारी अधिकारी टोल देने लगेंगे। लेकिन इतना जरूर है कि इस प्रस्ताव ने देशभर में नई बहस छेड़ दी है।

 

आने वाले समय में क्या बदल सकता है?

यदि सरकार समिति की सिफारिशों को स्वीकार कर लेती है तो राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल छूट पाने वाले वाहनों की संख्या काफी कम हो सकती है। इससे टोल संग्रह बढ़ेगा और सड़क परियोजनाओं के लिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध होंगे। इसके साथ ही यह संदेश भी जाएगा कि सड़कों के उपयोग के लिए सभी नागरिकों पर समान नियम लागू होते हैं। हालांकि सुरक्षा, आपातकालीन सेवाओं और कुछ संवैधानिक पदों से जुड़े मामलों में विशेष प्रावधान बने रह सकते हैं।

 

हमारी राय

टोल टैक्स छूट व्यवस्था की समीक्षा करना गलत नहीं है, क्योंकि समय के साथ नियमों को बदलती जरूरतों के अनुसार अपडेट करना जरूरी होता है। यदि किसी श्रेणी को दी जा रही छूट का स्पष्ट और व्यावहारिक आधार नहीं है, तो उस पर दोबारा विचार किया जा सकता है। इससे व्यवस्था अधिक पारदर्शी और समान बन सकती है। हालांकि सरकार को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि जिन अधिकारियों और सेवाओं का काम लगातार सार्वजनिक हित से जुड़ा है, उनके कार्यों में किसी तरह की बाधा न आए। इसलिए किसी भी बदलाव को जल्दबाजी में लागू करने के बजाय व्यापक समीक्षा और संतुलित दृष्टिकोण के साथ लागू किया जाना चाहिए। अगर ऐसा होता है तो यह कदम VIP संस्कृति कम करने और बेहतर राजस्व प्रबंधन दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।