Facebook, Instagram और WhatsApp की पैरेंट कंपनी Meta ने किशोरों की सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए एक नया फीचर शुरू किया है। अब अगर कोई किशोर Meta AI के साथ बातचीत के दौरान आत्महत्या, खुद को नुकसान पहुंचाने या गंभीर मानसिक परेशानी जैसे विषयों पर बात करता है, तो कुछ मामलों में उसके माता-पिता को अलर्ट भेजा जा सकता है। कंपनी का कहना है कि इस फीचर का मकसद बच्चों को समय रहते जरूरी मदद दिलाना है, ताकि किसी भी गंभीर स्थिति को रोका जा सके।
कैसे काम करेगा नया सेफ्टी फीचर?
Meta के मुताबिक, अगर AI को बातचीत के दौरान ऐसा लगे कि कोई किशोर खुद को नुकसान पहुंचाने या आत्महत्या जैसे गंभीर विषय पर बात कर रहा है, तो सबसे पहले AI उस बच्चे को हेल्पलाइन से संपर्क करने और किसी भरोसेमंद बड़े व्यक्ति से बात करने की सलाह देगा। अगर बातचीत में जोखिम ज्यादा नजर आता है, तो उसकी समीक्षा की जा सकती है। इसके बाद जरूरत पड़ने पर Instagram के पैरेंटल सुपरविजन टूल का इस्तेमाल कर रहे माता-पिता को सूचना भेजी जाएगी।
किन यूजर्स पर लागू होगा यह फीचर?
यह सुविधा खासतौर पर उन किशोरों के लिए तैयार की गई है, जिनके अकाउंट पर Teen Account और Parental Supervision फीचर सक्रिय है। यानी अगर माता-पिता पहले से अपने बच्चे के Instagram अकाउंट की निगरानी कर रहे हैं, तो उन्हें ऐसे मामलों में अतिरिक्त जानकारी मिल सकेगी। Meta का कहना है कि शुरुआत में यह फीचर कुछ देशों में उपलब्ध कराया जा रहा है और बाद में इसे अन्य देशों में भी चरणबद्ध तरीके से शुरू किया जाएगा।
सिर्फ अलर्ट ही नहीं, AI भी देगा सही सलाह
नई व्यवस्था में Meta AI केवल अलर्ट भेजने तक सीमित नहीं रहेगा। यदि कोई किशोर मानसिक तनाव, आत्महत्या या खुद को नुकसान पहुंचाने जैसी बात करता है, तो AI उसे संवेदनशील और सहायक जवाब देगा। साथ ही उसे मानसिक स्वास्थ्य सहायता सेवाओं, हेल्पलाइन और भरोसेमंद लोगों से संपर्क करने की सलाह भी देगा। कंपनी का कहना है कि इसके लिए मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों और चिकित्सकों से भी सलाह ली गई है।
पहले भी बढ़ाए गए थे पैरेंटल कंट्रोल
यह पहला मौका नहीं है जब Meta ने किशोरों की सुरक्षा के लिए कदम उठाया हो। इससे पहले कंपनी ने पैरेंट्स के लिए ऐसा फीचर शुरू किया था, जिससे वे यह देख सकते थे कि पिछले सात दिनों में उनके बच्चे ने Meta AI से किन-किन विषयों पर बातचीत की है। हालांकि उन्हें पूरी चैट नहीं दिखाई जाती, बल्कि सिर्फ बातचीत के विषयों की जानकारी मिलती है। अब नए फीचर के साथ गंभीर मामलों में सीधे अलर्ट भी भेजा जाएगा।
क्यों उठाना पड़ा यह कदम?
पिछले कुछ समय से दुनिया भर में AI चैटबॉट्स और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर किशोरों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। कई देशों की सरकारें और विशेषज्ञ इस बात को लेकर चिंता जता चुके हैं कि मानसिक तनाव से जूझ रहे बच्चों को AI किस तरह जवाब देता है। इसी बीच Meta ने अपने सुरक्षा उपायों को और मजबूत करने का फैसला लिया है, ताकि जरूरत पड़ने पर समय रहते हस्तक्षेप किया जा सके।
क्या इससे प्राइवेसी पर असर पड़ेगा?
कई लोगों के मन में यह सवाल भी उठ सकता है कि क्या इससे बच्चों की निजी बातचीत पूरी तरह माता-पिता के पास पहुंच जाएगी। Meta का कहना है कि यह फीचर केवल संभावित गंभीर जोखिम वाले मामलों के लिए बनाया गया है। सामान्य बातचीत की निगरानी नहीं की जाएगी। कंपनी का दावा है कि इसका उद्देश्य बच्चों की निजता का सम्मान करते हुए उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
माता-पिता की क्या होगी जिम्मेदारी?
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल तकनीक के भरोसे बच्चों की सुरक्षा पूरी तरह संभव नहीं है। अगर किसी माता-पिता को ऐसा अलर्ट मिलता है, तो उन्हें बच्चे को डांटने या सजा देने के बजाय उससे खुलकर बात करनी चाहिए। बच्चे की मानसिक स्थिति को समझना, उसकी बात ध्यान से सुनना और जरूरत पड़ने पर मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ की मदद लेना ज्यादा जरूरी है। तकनीक सिर्फ संकेत दे सकती है, लेकिन असली मदद परिवार ही कर सकता है।
AI सुरक्षा पर Meta का बढ़ता फोकस
Meta ने हाल के महीनों में AI से जुड़े कई सुरक्षा फीचर्स लॉन्च किए हैं। कंपनी लगातार यह कोशिश कर रही है कि उसके AI टूल्स खासकर किशोरों के लिए सुरक्षित रहें। कंटेंट फिल्टर, सीमित कंटेंट सेटिंग, पैरेंटल कंट्रोल और अब सेफ्टी अलर्ट जैसे फीचर्स इसी दिशा में उठाए गए कदम माने जा रहे हैं। आने वाले समय में कंपनी और भी सुरक्षा उपाय जोड़ सकती है।
डिजिटल दौर में बढ़ी अभिभावकों की भूमिका
आज के समय में बच्चे पढ़ाई, मनोरंजन और जानकारी के लिए AI और इंटरनेट का पहले से कहीं ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे में माता-पिता के लिए यह जरूरी हो गया है कि वे सिर्फ स्क्रीन टाइम पर नजर न रखें, बल्कि बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और ऑनलाइन व्यवहार को भी समझें। नई तकनीक का सही इस्तेमाल तभी संभव है, जब परिवार और तकनीक दोनों मिलकर बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करें।
हमारी राय
Meta का यह नया फीचर किशोरों की ऑनलाइन सुरक्षा की दिशा में एक अहम कदम माना जा सकता है। अगर किसी बच्चे को मानसिक तनाव है और समय रहते उसके माता-पिता तक इसकी जानकारी पहुंच जाती है, तो कई गंभीर घटनाओं को रोका जा सकता है। हालांकि तकनीक हर समस्या का समाधान नहीं है। सबसे जरूरी है कि माता-पिता अपने बच्चों के साथ भरोसेमंद रिश्ता बनाएं, उनसे नियमित बातचीत करें और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की मदद लेने में बिल्कुल भी देर न करें। AI एक सहायक माध्यम हो सकता है, लेकिन बच्चों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य की सबसे बड़ी जिम्मेदारी परिवार और समाज की ही है।









