8वें वेतन आयोग के लागू होने की आधिकारिक तारीख का ऐलान अभी तक नहीं हुआ है, लेकिन उम्मीद जताई जा रही है कि नया वेतनमान 1 जनवरी 2026 से लागू किया जा सकता है। हालांकि आयोग की सिफारिशों को पूरी तरह लागू होने में 2028 तक का समय लग सकता है। इसी बीच कर्मचारियों के मन में यह सवाल बना हुआ है कि क्या वेतन आयोग लागू होने तक महंगाई भत्ता मिलता रहेगा या फिर DA रोक दिया जाएगा।

 

सरकार के नियमों के मुताबिक, नया वेतन आयोग लागू होने तक महंगाई भत्ता जारी रहेगा। DA हर छह महीने बाद, यानी जनवरी और जुलाई में संशोधित होता रहेगा। नए आयोग के लागू होने के बाद मौजूदा DA को बेसिक पे में मर्ज कर दिया जाएगा, जिससे यह फिर से ‘जीरो’ से शुरू होगा।

 

8वें वेतन आयोग का उद्देश्य केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी, पेंशन और अलाउंस में तर्कसंगत संशोधन करना है। इसमें महंगाई, कर्मचारियों की जरूरतों और सरकार की आर्थिक क्षमता को ध्यान में रखा जाएगा। केंद्र सरकार ने हाल ही में आयोग की शर्तों यानी टर्म्स ऑफ रेफरेंस को मंजूरी दे दी है। आयोग बनने के 18 महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंप देगा।

 

सैलरी बढ़ोतरी कितनी होगी, यह पूरी तरह फिटमेंट फैक्टर और DA मर्जर पर निर्भर करता है। 7वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 2.57 था, जबकि 8वें में इसे घटाकर 2.46 किए जाने की चर्चा है। नया वेतनमान शुरू होते ही DA को शून्य किया जाता है, क्योंकि नई बेसिक सैलरी पहले से ही महंगाई को ध्यान में रखकर तय होती है। इसलिए नई सैलरी में बढ़ोतरी दिखने के बावजूद कुल पैकेज पर वास्तविक असर DA हटने के कारण थोड़ा संतुलित रहता है।

 

केंद्रीय कर्मचारियों, रक्षा कर्मियों, रेलवे कर्मचारियों, केंद्रीय संस्थान के शिक्षकों, 100% सरकारी स्वामित्व वाले PSUs और पेंशनर्स को इस आयोग का लाभ मिलेगा। जबकि राज्य कर्मचारी, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक कर्मचारी, RBI और अन्य स्वायत्त संस्थानों पर इसका असर नहीं होगा। बैंक कर्मचारियों का वेतन IBA के समझौतों से तय होता है।

 

पहले के वेतन आयोगों की टाइमलाइन भी लगभग ऐसी ही रही है। 5वां आयोग 1996 से, 6वां आयोग 2006 से और 7वां आयोग 2016 से लागू किया गया था। इसी पैटर्न को देखते हुए 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें भी 1 जनवरी 2026 से लागू होने की संभावना है।

 

सिफारिशों को तैयार करते समय आयोग देश की आर्थिक स्थिति, महंगाई, सरकार का खर्च, पेंशन सिस्टम पर बोझ और सरकारी व प्राइवेट सेक्टर में वेतन स्तर जैसे कई कारकों का विश्लेषण करेगा। इसका उद्देश्य कर्मचारियों को बेहतर वेतन संरचना देना और सरकार पर वित्तीय बोझ को संतुलित रखना है।

 

नई सिफारिशें लागू होते ही कर्मचारियों को लगभग 17–18 महीने का एरियर भी मिल सकता है। इससे लगभग 50 लाख केंद्रीय कर्मचारी और 69 लाख पेंशनर्स प्रभावित होंगे।