भारत सरकार ने नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट की मीटिंग में एक अहम फैसला लिया है। सरकार ने 7,280 करोड़ रुपये की नई योजना को मंजूरी दी है, जिसका मकसद देश में रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट्स (REPM) की मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना है। यह भारत में इस तरह की पहली योजना है।

 

इस योजना के तहत, भारत में सालाना 6,000 मीट्रिक टन की क्षमता वाला एक एकीकृत REPM मैन्युफैक्चरिंग प्लांट स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। इस काम के लिए देशभर में ज़रूरी इंतज़ाम किए जा रहे हैं।

 

अश्विनी वैष्णव (सूचना एवं प्रसारण मंत्री) ने बताया कि इस नई “सिन्टर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट्स मैन्युफैक्चरिंग प्रमोशन स्कीम” का उद्देश्य भारत को इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना है।

 

क्यों जरूरी था यह?


दुनिया में लगभग 80 प्रतिशत रेयर अर्थ संसाधन और मैग्नेट्स का उत्पादन फिलहाल चीन के पास है। इसके कारण भारत और कई अन्य देश चीन पर बहुत निर्भर हैं। हाल ही में चीन ने रेयर अर्थ से जुड़ी वस्तुओं के निर्यात पर पाबंदी लगाई थी , जिससे यह बात और गंभीर हो गई कि भारत को अपने लिए इन महत्वपूर्ण मटीरियल्स का उत्पादन खुद करना चाहिए। उदाहरण के लिए, वित्तीय वर्ष 2024-25 में भारत को चीन से लगभग 870 टन रेयर अर्थ मैग्नेट्स आयात करने पड़े थे।

 

लेकिन अब, इस नई योजना के साथ उम्मीद है कि आने वाले समय में भारत की चीन पर निर्भरता काफी कम हो जाएगी। साथ ही, भारत इस तकनीकी रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक मजबूत कदम उठा रहा है।