सरकार देश में ऐसी कई स्कीम चलाती है जिससे देश के छोटे व्यापारियों, स्वरोजगार करने वाले और नए उद्यमियों को आर्थिक सहायता मिल सके और वो अपना बिजनेस शुरू कर सकें। इसी कड़ी में पीएम मुद्रा योजना और क्रेडिट गारंटी योजना, ऐसी दो स्कीम है जो एक बार में सुनने में काफी एक जैसे लगते हैं लेकिन असल में इनका उद्देश्य और काम करने का तरीका अलग-अलग है।
क्रेडिट गारंटी स्कीम (Credit Guarantee Scheme)
सरकार के इस स्कीम का मकसद लोन लेने वाले व्यक्ति के लिए नहीं बल्कि बैंकों या वित्तीय संस्थानों के लिए है। इस स्कीम के जरिए सरकार बैंकों और वित्तीय संस्थानों को यह भरोसा दिलाती है कि अगर कर्ज लेने वाला व्यक्ति भविष्य में लोन नहीं चुका पाता तो सरकार तय सीमा तक बैंक को नुकसान की भरपाई करेगी।
इससे बैंक बिना जमानत के लोन दे देते हैं। इसका फायदा यह होता है कि MSME, स्टार्टअप और छोटे उद्योगों को आसानी से लोन मिल जाता है। 1 अप्रैल 2025 से इस स्कीम के तहत सरकार Micro and Small Enterprises (MSE) को 10 करोड़ रुपये तक के लोन समर्थन के लिए क्रेडिट गारंटी की सुविधा प्रदान करती है।
उदाहरण- यह योजना आमतौर पर MSME, SME, स्टार्टअप और छोटे उद्योगों के लिए होती है।
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PM Mudra Yojana)
इस सरकारी स्कीम का मकसद छोटे व्यापारियों और खुद का काम शुरू करने वालों को सीधे लोन उपलब्ध कराना है।
केंद्र सरकार इस योजना के तहत बिना गिरवी के ₹10 लाख तक लोन देती है। इसमें रेहड़ी-पटरी लगाने वाले, दुकानदार, छोटे कारोबारी, कारीगर और स्वरोजगार करने वाले लोग शामिल हैं। मुद्रा योजना को चार कैटेगरियों- शिशु, किशोर और तरुण और तरुण प्लस में बांटा गया है। इस योजना में बैंक, एनबीएफसी और माइक्रोफाइनेंस संस्थाएं सीधे लोगों को लोन देती हैं।
- शिशु कैटेगरी में 50 हजार रुपये तक का लोन मिलता है।
- किशोर कैटेगरी में 50 हजार रुपये से लेकर 5 लाख रुपये तक का लोन मिलता है।
- तरुण कैटेगरी में 5 लाख रुपये से 10 लाख रुपये तक का लोन मिलता है।
- तरुण प्लस कैटेगरी में 10 लाख रुपये से 20 लाख रुपये तक का लोन मिलता है।
उदाहरण- अगर कोई व्यक्ति छोटी दुकान, टिफिन सर्विस या अपना बिजनेस शुरू करना चाहता है, तो वह सीधे मुद्रा लोन के लिए अप्लाई कर सकता है।









