साल 1986 में तत्कालीन वित्त मंत्री वी.पी. सिंह ने बजट पेश किया जिसका नाम गाजर और छड़ी वाला बजट यानी Carrot and Stick Budget 1986 रखा गया। आज हम आपको इस आर्टिकल में बताएंगे कि इस बजट का नाम Carrot and Stick Budget कैसे पड़ा। तत्कालीन वित्त मंत्री वी.पी. सिंह ने 1986 में 28 फरवरी को बजट पेश किया था यानि महीने के सबसे आखिरी दिन ये बजट पेश किया गया था। इस बजट को अर्थशास्त्र के इतिहास में एक बड़ा मोड़ बताया गया क्योंकि अर्थव्यवस्था में सुधार की दिशा में ये पहला कदम रहा था। इसने Licence Raj को हटाने की प्रक्रिया को तेज किया।

 

ऐसे पड़ा Carrot and Stick Budget 1986 नाम 

 

इस बजट का नाम Carrot and Stick इसलिए पड़ा क्योंकि इसमें पुरस्कार (carrot) और सजा (stick) दोनों ही मौजूद थे। इस बजट का पहला हिस्सा व्यापार और उद्योगों को प्रोत्साहित करने पर केंद्रित था, वहीं बजट का दूसरा हिस्सा काले बाजार, कर चोरी और प्रतिबंधों के उल्लंघनों पर कड़े कदम उठाने पर केंद्रित था।

 

इस बजट की महत्वपूर्म बात ये थी कि ये MODVAT (Modified Value Added Tax) से लैस था। इसका फायदा ये था कि अब उत्पादन के कच्चे माल पर पहले से लगे कर का क्रेडिट अंतिम उत्पाद पर लगने वाले कर से हटाया जा सकता था। इससे उत्पादों पर टैक्स-ऑन-टैक्स की समस्या कम हुई और उद्योगों के उत्पादन लागत में राहत मिली। 

 

इतना ही नहीं, इस बजट ने काले बाजार, तस्करी और कर चोरी की समस्या से निपटने के मामले में भी अहम भूमिका निभाई थी । वित्त मंत्रालय और संबंधित विभागों को ऐसे उल्लंघनों की जांच और रोकथाम के लिए अधिक पावर दिए गए। ऐसे में ये बजट इसका उदाहरण बन गया कि अब सरकार भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं को बर्दाश्त नहीं करेगी। ये Licence Raj समाप्ति की दिशा में पहला कदम था। 1986 का यह बजट भारत की अर्थव्यवस्था के आधुनिकरण की ओर पहला बड़ा कदम रहा।