1 फरवरी 2026 को भारत का केंद्रीय बजट पेश होने वाला है। भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 9वीं बार केंद्रीय बजट पेश करने वाली हैं। इस पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के व्यापारिक एजेंडा और अमेरिका की टैरिफ-नीतियों का भारतीय बजट पर सीधा प्रभाव देखने को मिलेगा। इस बार भारत को निर्यात, मुद्रा-स्थिति और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं से निपटने के लिए रणनीतिक तैयारियां करनी होगी। ऐसे में अमेरिका की टैरिफ नीति का प्रभाव इस बार के केंद्रीय बजट में भी देखने को मिलेगा। 

 

बता दें कि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2025-26 के सत्र में वर्ल्ड बिजनेस रुल्स में बदलाव का रूख दिखाते हुए टैरिफ को बढ़ा दिया है। खासतौर से ट्रंप ने रिसिप्रोकल टैरिफ के तहत ऐसे शुल्क लगाए हैं जिसका असर सबसे ज्यादा भारत जैसे व्यापारिक साझेदारी वाले देशों को होने वाला है। डोनाल्ड ट्रंप की इस नीति का उद्देश्य अमेरिका-केंद्रित व्यापार घाटा घटाना और घरेलू उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति को सुदृढ़ करना है।

 

टैरिफ विस्तार का भारत-अमेरिकी व्यापार पर असर 

 

डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नियम के कारण भारत और अमेरिका का व्यापार बेहद प्रभावित होगा। टैरिफों में भारत पर उच्च दरें लगाई गई हैं। मान लीजिए, अमेरिका भारतीय निर्यात वस्तुओं पर पहले 27% और फिर कुल मिलाकर लगभग 50% तक शुल्क लगा दिया जो व्यापारिक साझेदार पर लगाए गए सबसे ऊंची दरें हैं। इससे भारत को अमेरिका में कोई भी चीज निर्यात करने में घाटा का सामना करना पड़ेगा। रत्न-आभूषण, औषधियां, टेक्सटाइल और मेटल उत्पाद आदि। इस तरह डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ युद्ध का असर वित्त वर्ष 2026-27 में न सिर्फ राजकोषीय आय पर पड़ने वाला है बल्कि निर्यात-आधारित अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा। इस समस्या को कई विशेषज्ञ साल 2026-27 के लिए द्विपक्षीय आर्थिक संकट के रूप में देख रहे हैं। इस संकट पर दोनों देशों की सरकारें लगातार बात कर रहीं हैं लेकिन अभी तक इस समस्या का समाधान नहीं निकल पाया है। 

 

वित्त वर्ष  2026-27 में बजट की प्रमुख चुनौतियां

 

इस बार केंद्रीय बजट पेश करने के दौरान कई चुनौतियां हैं। पहली चुनौती है टैरिफ का आर्थिक प्रभाव को कम करने के लिए योजना बनाने की चुनौती। ट्रंप की नीतियों का प्रभाव कई स्तरों पर देखा जा सकता है। ऐसे में भारत का ये केंद्रीय बजट इन प्रभावों को कम करने के लिए किस तरह रणनीति बनाता है, ये बेहद अहम होने वाला है। टैरिफ में बढ़ोतरी के कारण अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धी कम हुई है जिससे निर्यात वृद्धि की संभावनाएं भी प्रभावित हो रही हैं। अमेरिकी टैरिफ-संकट और वैश्विक आर्थिक दबावों के कारण भारत का रुपया वैश्विक बाजार में धड़ाम से गिरा है। जिसके कारण भारत के लिए उत्पादों का निर्यात ऐसे ही महंगा हो गया। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार रुपए में गिरावट के कारण भारतीय बाजार उलझ सकता है। 

 

इस पर MSME और घरेलू उत्पाद को प्रोत्साहन देने की कोशिश की जाएगी ताकि निर्यात-उन्मुख उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजनाओं को और सशक्त किया जा सके। इससे घरेलू उत्पादन बढ़ेगा और बाहरी दबाव से बचने में मदद मिलेगी। भारत ने आत्मनिर्भर और अंतरराष्ट्रीय साझेदारों पर निर्भरता बनाए रखने को प्राथमिकता दी है। इससे भारत के व्यापक आर्थिक और सामरिक उद्देश्यों को भी समर्थन मिलेगा। 

 

                                                                 Image Credit: Donald Trump X I'd 

भारत सरकार ने टैरिफ दबाव और युद्धों के बीच निर्यात को बढ़ावा देने और व्यापारिक विविधीकरण को अपनाने के उपाय भी किए हैं। जैसे- भारत ने यूरोपीय संघ (EU) के साथ मुक्त व्यापार समझौते पर प्रयास किया। इससे भारत को विदेशी बाजारों में बेहतर पहुंच मिलने की संभावना है। साथ ही साथ इससे अमेरिकी बाजार पर निर्भरता भी कम होगी। वहीं भारत ने ट्रेड नीतियों में सुधार और अन्य साझेदारों के साथ द्विपक्षीय सहयोगों का विस्तार करने पर भी जोर दिया है ताकि वैश्विक व्यापार में भारत आगे विकास कर सके। नीति-निर्माताओं का मानना है कि भारत इन सभी परिवर्तनों का सामना करने में सक्षम है। ऐसे में अमेरिकी टैरिफों का असर समग्र विकास को कमजोर नहीं करेगा। खैर जो भी हो आंकड़ों को भी झूठलाया नहीं जा सकता। ट्रंप की टैरिफ नीति और कई देशों के बीच युद्ध का सीधा असर भारत पर पड़ेगा। साथ ही साथ वैश्विक बाजार में रुपए की कीमत में कमी के कारण इस साल 2026-27 के केंद्रीय बजट पर इसी नीति पर योजना और फैसले लेने की जरूरत है। 

 

भविष्य में भारत के सामने कई वैश्विक चुनौतियां आएंगी। ट्रंप द्वारा लागू की गई टैरिफ-नीतियों ने न केवल व्यापार को प्रभावित किया है बल्कि ये सोचने पर मजबूर किया है कि कैसे एक प्रतिस्पर्धी और विश्वसनीय अर्थव्यवस्था बनाई जा सकती है। इसने भारत को और आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रोत्साहित कर दिया है। ऐसे में डोनाल्ड ट्रंप की नीति का सीधा प्रभाव इस बार के केंद्रीय बजट पर पड़ेगा। भारत अपने वैश्विक बाजार को इस समस्या से निपटने के लिए तैयार करने की कोशिश करेगी और नई नीतियां ला सकती है। 

 

बजट 2026-27 में भारत के सामने है कई चुनौतियां

 

भारत के बजट 2026-27 में वैश्विक आर्थिक परिदृश्य को देखते हुए कई चुनौतियां हैं जिसके लिए बजट में नई नीति बनाने की जरूरत है। ट्रंप की टैरिफ नीति ने न केवल वैश्विक बाजार को प्रभावित किया है बल्कि भारत को ये सोचने पर मजबूर किया है कि अन्य साधनों पर विचार करे। आर्थिक नीतियां घरेलू विकास, निर्यात-वृद्धि और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को संतुलित करना इस बार बजट में प्राथमिकता रहेगी। ताकि भारत उत्पन्न वैश्विक समस्या में अपना संतुलन बना सके। इस प्रकार ये कहना गलत नहीं होगा कि केंद्रीयबजट 2026-27 एक सामान्य बजटदस्तावेज से हटकर एक ऐसी नीति होगी जो वैश्विक आर्थिक रणनीति, निर्यात-क्षमता तथा विदेशी नीतियों के प्रति भारत का भविष्य तय करेगी।