आज चांदी की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला। MCX पर मार्च 2026 का फ्यूचर ट्रेड खबर लिखे जानें तक प्रति किलो 23000 रुपये से ज्यादा टूटा। यह गिरावट तब आई जब आज सुबह ही चांदी ने नया रिकॉर्ड हाई 2,54,174 रुपये प्रति किलोग्राम को टच किया था। खबर लिखें जानें तक चांदी 230678 रुपये प्रति किलोग्राम पर ट्रेड कर रहा था।

 

अंतरराष्ट्रीय बाजार का प्रभाव

 

ग्लोबल मार्केट में भी चांदी की कीमतों में भारी अस्थिरता रही। सोमवार को पहली बार दाम 80 डॉलर प्रति औंस के पार गए, लेकिन बाद में मुनाफावसूली और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के बीच शांति वार्ता से जुड़ी खबरों के चलते कीमतें 75 डॉलर प्रति औंस से नीचे फिसल गईं।

 

गिरावट की प्रमुख वजहें

 

इस तेज गिरावट के पीछे मुख्य कारण निवेशकों की प्रॉफिट बुकिंग और भू-राजनीतिक तनाव में कमी मानी जा रही है। यूक्रेन युद्ध में संभावित शांति समझौते की उम्मीद से सेफ-हेवन मांग घटी है। साथ ही, साल की शुरुआत से अब तक चांदी में करीब 181% की असाधारण तेजी भी भारी मुनाफावसूली की वजह बनी।

 

एक्सपर्ट्स की राय और क्या है आउटलुक?

 

एक्सपर्ट का कहना है कि चांदी का लॉन्ग टर्म रुझान अब भी पॉजिटिव है, लेकिन निकट भविष्य में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। रिलायंस सिक्योरिटीज के जिगर त्रिवेदी के अनुसार, 2.4 लाख रुपये प्रति किलो का स्तर शॉर्ट टर्म में अहम सपोर्ट है। वहीं, अमेरिकी ब्रोकरेज फर्म BTIG ने आगाह किया है कि इतनी तेज बढ़त लंबे समय तक टिकाऊ नहीं होती और इसके बाद तेज सुधार देखने को मिल सकता है।

 

1979 और 2011 जैसी गिरावट की चेतावनी

 

ICICI प्रूडेंशियल म्यूचुअल फंड के मनीष बंठिया ने इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि चांदी में इस तरह की तेज तेजी अक्सर शांत अंत नहीं देखती। उनके मुताबिक, 1979-80 और 2011 में भी जब कीमतें चरम पर पहुंचीं, तो बाद में क्रमशः करीब 90% और 75% से ज्यादा की गिरावट आई थी। बीते एक साल में दाम लगभग तीन गुना बढ़ चुके हैं, ऐसे में निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है।