AC-रसोई और तांबे के सामान बेचने वाली कंपनियां सामान के दाम बढ़ाने की तैयारी में है। जिसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ने वाला है। बता दें आपको तांबे की कीमत रिकॉर्ड 12,000 डॉलर प्रति टन पहुंचने से ये बड़ा बदलाव होने के कयास लगाए जा रहे हैं। तांबे की कीमतों में तेजी के कारण 5 से 7% तक दामों में बढ़ोतरी होगी।

 

नए साल में अधिक खर्चा आ सकता है। एयर कंडीशनर, रसोई के उपकरण, स्नानघर या तांबे के बर्तन महंगे होंगे। बीते कई महीनों से तांबे की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज हो रही है। जिसके कारण कंपनियों का इनपुट लागत बढ़ गया है। बीते महीने तांबे की कीमत 12,000 डॉलर प्रति टन तक पहुंच चुकी है। ऐसे में ये बढ़ोतरी 2009 के बाद सबसे बड़ी वार्षिक वृद्धि है। कंपनियां लाभ मार्जिन को बैलेंस रखने के लिए अपने उत्पाद के दाम बढ़ाने की तैयारी कर रही है।

 

घरेलू तांबे की कीमतें तेजी से बढ़ी

 

घरेलू तांबे की कीमत शुक्रवार शाम 1,300 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गया। वहीं पीतल के दाम में भी बढ़ोतरी हुई है। बता दें कि इस वित्त वर्ष पीतल की कीमत में 15 से 18% की बढ़ोतरी हुई है। इसका असर बर्तन उद्योग, इलेक्ट्रिकल सामान और निर्माण कार्यों की लागत पर पड़ेगा। कीमतों में इस तेजी के कारण स्थानीय बाजारों और छोटे कारोबारियों की चिंता भी बढ़ती नजर आ रही है।

 

कीमतों में बढ़ोतरी से बड़ा असर

 

अगर यहीं हाल रहा तो इसका सीधा असर हमारे घरेलू बाजार पर पड़ेगा। AC से लेकर रसोई के सामान और तांबे के बर्तन महंगे होंगे। उपभोक्ताओं की जेब ढीली होगी। ऐसे में उपभोक्ता सोच समझकर पैसे खर्च करेंगे। सरकार को इस दिशा में ठोस कदम उठाने की जरूरत महसूस होने लगी है। निर्माण और रियल एस्टेट सेक्टर पर भी बड़ा असर पड़ेगा। तांबे का इस्तेमाल इलेक्ट्रिकल वायरिंग, पाइप और कंस्ट्रक्शन में बड़े स्तर पर होता है। ऐसे में घर बनाने और मरम्मत की लागत भी बढ़ेगी। साथ ही छोटे व्यापारी, बर्तन निर्माता और कारीगरों की लागत बढ़ेगी। कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) पर भी असर पड़ने वाला है। ऐसे में रोजमर्रा का खर्च बढ़ेगा और अर्थव्यवस्था पर भी दबाव पड़ेगा।