आज के समय में क्रेडिट कार्ड लोगों की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। ऑनलाइन शॉपिंग हो, होटल बुकिंग, फ्लाइट टिकट या फिर अचानक पैसों की जरूरत, क्रेडिट कार्ड हर जगह काम आता है। कई लोग इसे ‘इमरजेंसी साथी’ भी मानते हैं क्योंकि इससे बिना तुरंत पैसे दिए खर्च किया जा सकता है। लेकिन जितना आसान इसका इस्तेमाल लगता है, उतना ही जरूरी इसके नियम समझना भी है। 

अक्सर लोग क्रेडिट कार्ड लेते समय सिर्फ कैशबैक, रिवॉर्ड पॉइंट और ऑफर्स पर ध्यान देते हैं, लेकिन इसके पीछे छिपे चार्ज और पेनाल्टी को नजरअंदाज कर देते हैं। यही लापरवाही बाद में भारी पड़ सकती है। कई बार लोग कुछ हजार रुपये खर्च करते हैं और बाद में बिल में इतने अतिरिक्त चार्ज जुड़ जाते हैं कि उन्हें समझ ही नहीं आता कि पैसा आखिर बढ़ा कैसे। 

 

सिर्फ ‘मिनिमम अमाउंट’ भरना सबसे बड़ी गलती 

क्रेडिट कार्ड बिल आने के बाद कई लोग पूरा बिल भरने की बजाय सिर्फ ‘Minimum Amount Due’ भर देते हैं। उन्हें लगता है कि इससे कोई दिक्कत नहीं होगी और बाकी रकम बाद में दे देंगे। लेकिन असली खेल यहीं से शुरू होता है। 

असल में जब आप पूरा बिल नहीं भरते, तो बाकी रकम पर भारी ब्याज लगना शुरू हो जाता है। भारत में कई बैंक सालाना 36 से 48 प्रतिशत तक ब्याज वसूलते हैं। यानी अगर आपने 50 हजार रुपये का बिल पूरा नहीं भरा, तो कुछ महीनों में वह रकम काफी बढ़ सकती है। कई लोग यह सोचकर फंस जाते हैं कि 'मिनिमम अमाउंट' भर दिया तो सब ठीक है, जबकि सच यह है कि यह सिर्फ डिफॉल्ट से बचने का तरीका होता है, ब्याज से नहीं।

 

लेट पेमेंट पर सिबिल स्कोर भी खराब होता है

अगर क्रेडिट कार्ड का बिल समय पर नहीं भरा जाए, तो बैंक लेट फीस लगाते हैं। यह फीस कार्ड और बकाया रकम के हिसाब से अलग-अलग हो सकती है। कई बार यह चार्ज 100 रुपये से लेकर हजारों रुपये तक पहुंच जाता है। 

लेकिन सिर्फ लेट फीस ही समस्या नहीं है। लगातार देरी से भुगतान करने पर आपका CIBIL स्कोर भी खराब हो सकता है। यही स्कोर आगे चलकर होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन लेने में काम आता है। अगर स्कोर खराब हो जाए तो बैंक लोन देने से मना भी कर सकते हैं या ज्यादा ब्याज पर लोन दे सकते हैं। यानी एक छोटी-सी लापरवाही भविष्य की बड़ी आर्थिक परेशानी बन सकती है।

 

कैश निकालना पड़ सकता है बहुत महंगा

कई लोग जरूरत पड़ने पर क्रेडिट कार्ड से ATM से कैश निकाल लेते हैं। उन्हें लगता है कि बाद में बिल भर देंगे तो कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा। लेकिन क्रेडिट कार्ड से कैश निकालना सबसे महंगे विकल्पों में गिना जाता है। 

जैसे ही आप ATM से पैसे निकालते हैं, उसी दिन से ब्याज लगना शुरू हो जाता है। यहां ग्रेस पीरियड नहीं मिलता। इसके अलावा अलग से कैश एडवांस फीस भी देनी पड़ती है। कई बैंक निकाली गई रकम का 2.5% से 3% तक चार्ज लेते हैं। इसलिए एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि बहुत जरूरी स्थिति को छोड़कर क्रेडिट कार्ड से कैश नहीं निकालना चाहिए।

 

इंटरनेशनल ट्रांजैक्शन पर लग सकता है अलग चार्ज

अगर आप विदेशी वेबसाइट से शॉपिंग करते हैं या विदेश यात्रा के दौरान कार्ड इस्तेमाल करते हैं, तो फॉरेक्स मार्कअप फीस लग सकती है। कई लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं और बाद में बिल देखकर चौंक जाते हैं। 

आमतौर पर बैंक 2% से 5% तक अतिरिक्त चार्ज लेते हैं। इसके अलावा डॉलर रेट के हिसाब से रकम बदलती रहती है। अगर आपने बार-बार इंटरनेशनल पेमेंट किया, तो यह चार्ज काफी बड़ा हो सकता है। 

 

‘नो कॉस्ट EMI’ हमेशा पूरी तरह फ्री नहीं होती

ऑनलाइन शॉपिंग के दौरान ‘No Cost EMI’ का ऑफर काफी आकर्षक लगता है। लोग सोचते हैं कि बिना अतिरिक्त पैसे दिए किस्तों में सामान मिल जाएगा। लेकिन कई मामलों में इसमें प्रोसेसिंग फीस या GST जैसे चार्ज जुड़े होते हैं। 

कुछ मामलों में कंपनी पहले डिस्काउंट हटाकर EMI का फायदा दिखाती है। यानी ग्राहक को लगता है कि वह बिना ब्याज के खरीदारी कर रहा है, लेकिन असल में कहीं न कहीं अतिरिक्त रकम जुड़ जाती है। इसलिए किसी भी EMI ऑफर को लेने से पहले उसकी पूरी शर्तें पढ़ना जरूरी माना जाता है।

 

सालाना फीस को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी

कई क्रेडिट कार्ड्स पर Annual Fee यानी सालाना शुल्क लगता है। कुछ कार्ड्स पहले साल फ्री होते हैं, लेकिन बाद में हर साल फीस कटती रहती है। कई लोग इस बात पर ध्यान ही नहीं देते। 

हालांकि कुछ बैंक तय खर्च पूरा करने पर यह फीस माफ भी कर देते हैं। लेकिन अगर आप कार्ड ज्यादा इस्तेमाल नहीं करते और फिर भी सालाना शुल्क भर रहे हैं, तो यह घाटे का सौदा हो सकता है। इसलिए समय-समय पर यह चेक करना जरूरी है कि आपका कार्ड वास्तव में आपके लिए फायदेमंद है या नहीं।

 

ऑटो-डेबिट और सब्सक्रिप्शन भी बढ़ा सकते हैं बिल

आजकल Netflix, Spotify, Amazon Prime और दूसरी ऐप्स के सब्सक्रिप्शन सीधे कार्ड से कटते रहते हैं। कई बार लोग भूल जाते हैं कि कौन-कौन सी सेवाएं एक्टिव हैं।

ऐसे में हर महीने छोटी-छोटी रकम कटती रहती है और बाद में बड़ा बिल बन जाता है। कई लोग सालों तक अनचाहे सब्सक्रिप्शन का भुगतान करते रहते हैं क्योंकि उन्होंने ऑटो-डेबिट बंद नहीं किया होता। इसलिए समय-समय पर कार्ड स्टेटमेंट चेक करना बहुत जरूरी है।

 

जरूरत से ज्यादा कार्ड रखना भी सही नहीं

कुछ लोग ऑफर्स और लिमिट के चक्कर में कई क्रेडिट कार्ड ले लेते हैं। लेकिन ज्यादा कार्ड होने से खर्च पर नियंत्रण रखना मुश्किल हो सकता है। साथ ही हर कार्ड की अलग बिलिंग डेट और फीस होती है। अगर किसी एक कार्ड का पेमेंट मिस हो गया, तो उसका असर पूरे क्रेडिट प्रोफाइल पर पड़ सकता है। इसलिए एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि उतने ही कार्ड रखें जिन्हें आसानी से मैनेज किया जा सके।

 

हमारी राय

क्रेडिट कार्ड सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए तो यह काफी मददगार साबित हो सकता है। इससे कैशबैक, रिवॉर्ड्स और इमरजेंसी सपोर्ट जैसे कई फायदे मिलते हैं। लेकिन बिना जानकारी के इस्तेमाल करने पर यही कार्ड आर्थिक बोझ भी बन सकता है। सबसे जरूरी बात यह है कि खर्च हमेशा अपनी क्षमता के हिसाब से करें और हर महीने पूरा बिल समय पर भरें। क्योंकि क्रेडिट कार्ड सुविधा जरूर देता है, लेकिन लापरवाही की कीमत भी उतनी ही तेजी से वसूलता है।