एक समय ऐसा था जब टीवी पर मनोरंजन के विकल्प बेहद सीमित हुआ करते थे। उस दौर में दूरदर्शन सिर्फ एक चैनल नहीं बल्कि हर घर की पहचान था। खासकर रविवार की सुबह तो मानो पूरे देश में एक अलग ही माहौल बन जाता था। लोग नहाकर, पूजा करके टीवी के सामने बैठ जाते थे ताकि अपने पसंदीदा धार्मिक धारावाहिक देख सकें। उस दौर के कई धार्मिक सीरियल आज भी लोगों के दिलों में बसे हुए हैं। इन सीरियलों ने सिर्फ मनोरंजन नहीं किया बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपरा और धर्म को घर-घर तक पहुंचाने का काम भी किया।

आज भी जब इन सीरियलों की बात होती है तो लोगों के चेहरे पर पुरानी यादें ताजा हो जाती हैं। चाहे Ramanand Sagar की ‘Ramayan’ हो या BR चोपड़ा की ‘Mahabharat’, इन धारावाहिकों का जादू आज तक कम नहीं हुआ। कोरोना लॉकडाउन के दौरान जब इन्हें दोबारा टीवी पर दिखाया गया, तब नई पीढ़ी ने भी इन्हें उतने ही उत्साह से देखा जितना पुराने दर्शकों ने सालों पहले देखा था।

रामायण 

जब भी भारतीय धार्मिक सीरियलों की बात होगी तो सबसे पहला नाम ‘रामायण’ का ही आएगा। रामानंद सागर  द्वारा बनाई गई यह सीरीज 1987 में शुरू हुई थी और देखते ही देखते पूरे देश की सबसे लोकप्रिय टीवी सीरीज बन गई। उस दौर में हालात ऐसे हो जाते थे कि रामायण शुरू होते ही सड़कें खाली हो जाती थीं। लोग टीवी के सामने अगरबत्ती जलाकर बैठते थे और अरुण गोविल को भगवान राम के रूप में सचमुच पूजने लगे थे। दीपिका चिखलिया को लोग माता सीता मानने लगे थे। यही वजह थी कि यह सिर्फ एक टीवी शो नहीं बल्कि लोगों की आस्था का हिस्सा बन गया। 

रामायण की सबसे बड़ी ताकत इसकी सरल भाषा और भावनात्मक प्रस्तुति थी। इसमें दिखाए गए संवाद और संगीत आज भी लोगों को याद हैं। लॉकडाउन के दौरान जब इसका पुनः प्रसारण हुआ तो इसने TRP के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए थे। 

महाभारत 

‘मैं समय हूं…’ यह डायलॉग सुनते ही आज भी लोगों को BR Chopra की ‘महाभारत’ याद आ जाती है। 1988 में शुरू हुआ यह धारावाहिक भारतीय टेलीविजन इतिहास के सबसे यादगार शो में गिना जाता है। 

इस सीरियल की खास बात इसकी भव्यता और मजबूत संवाद थे। मुकेश खन्ना का भीष्म पितामह वाला किरदार हो या नीतीश भारद्वाज श्रीकृष्ण रूप, हर कलाकार ने अपने अभिनय से किरदार को अमर बना दिया। महाभारत ने सिर्फ युद्ध की कहानी नहीं दिखाई बल्कि राजनीति, रिश्तों, धर्म और कर्म की भी गहरी सीख दी। आज भी लोग इसके संवाद सोशल मीडिया पर शेयर करते हैं। खास बात यह रही कि यह शो हर उम्र के दर्शकों को पसंद आया।

श्री कृष्ण

रामानंद सागर का एक और धार्मिक सीरियल ‘श्री कृष्ण' भी लोगों के बीच काफी लोकप्रिय हुआ था। इस धारावाहिक में भगवान कृष्ण के जन्म से लेकर महाभारत तक की कहानी दिखाई गई थी। सर्वदमन डी बनर्जी ने भगवान कृष्ण का किरदार निभाया था और लोगों ने उन्हें खूब प्यार दिया। इस सीरियल का संगीत और भक्ति गीत भी काफी लोकप्रिय हुए। खासकर ‘श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी’ जैसे भजन आज भी लोगों की जुबान पर रहते हैं। इस धारावाहिक ने बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी को प्रभावित किया। इसमें कृष्ण की बाल लीलाएं, राधा-कृष्ण का प्रेम और गीता का ज्ञान बेहद भावनात्मक तरीके से दिखाया गया था।

विष्णु पुराण 

दूरदर्शन के सबसे चर्चित धार्मिक धारावाहिकों में ‘Vishnu Puran’ का नाम भी शामिल है। यह शो 2000 के दशक की शुरुआत में प्रसारित हुआ था और इसे भी लोगों ने खूब पसंद किया। इस धारावाहिक में भगवान विष्णु के अलग-अलग अवतारों की कहानियां दिखाई गई थीं। इसमें धर्म, कर्म और भक्ति से जुड़े कई प्रसंगों को सरल तरीके से पेश किया गया। यही वजह थी कि परिवार के लोग इसे साथ बैठकर देखते थे। उस दौर में धार्मिक कार्यक्रमों का उद्देश्य सिर्फ मनोरंजन नहीं बल्कि लोगों को संस्कृति और धार्मिक ज्ञान से जोड़ना भी था। विष्णु पुराण ने यह काम काफी अच्छे तरीके से किया।

ओम नमः शिवाय 

‘Om Namah Shivay’ भी दूरदर्शन के सबसे लोकप्रिय धार्मिक सीरियलों में गिना जाता है। इस धारावाहिक में भगवान शिव की कथा को बेहद भव्य अंदाज में दिखाया गया था। इस सीरियल में शिव-पार्वती की कहानी, समुद्र मंथन, गणेश जन्म और कई पौराणिक घटनाओं को विस्तार से दिखाया गया था। शो का टाइटल ट्रैक और बैकग्राउंड म्यूजिक आज भी लोगों को याद है। भगवान शिव के भक्तों के बीच यह धारावाहिक काफी लोकप्रिय हुआ। इसकी वजह यह भी थी कि इसमें धार्मिक भावनाओं को बेहद सम्मान के साथ प्रस्तुत किया गया था।

 

क्यों आज भी पसंद किए जाते हैं ये सीरियल?

आज के दौर में जहां OTT प्लेटफॉर्म और आधुनिक तकनीक वाले शो मौजूद हैं, फिर भी दूरदर्शन के इन पुराने धार्मिक धारावाहिकों का क्रेज कम नहीं हुआ। इसकी सबसे बड़ी वजह इनकी सादगी और भावनात्मक जुड़ाव है। इन सीरियलों में दिखावटी VFX या ज्यादा चमक-धमक नहीं थी, लेकिन कहानी और अभिनय इतना मजबूत था कि लोग खुद को उससे जुड़ा हुआ महसूस करते थे। उस दौर में कलाकार अपने किरदार में पूरी तरह डूब जाते थे और दर्शक उन्हें सचमुच देवताओं की तरह मानने लगते थे।

इन धारावाहिकों ने परिवार को एक साथ बैठकर टीवी देखने की आदत भी दी। आज के समय में जहां हर व्यक्ति अपने मोबाइल में व्यस्त रहता है, उस दौर में पूरा परिवार एक साथ बैठकर धार्मिक कार्यक्रम देखता था। यही वजह है कि इन शोज से लोगों की भावनात्मक यादें भी जुड़ी हुई हैं।

 

लॉकडाउन में फिर दिखा पुराना जादू

2020 के कोरोना लॉकडाउन के दौरान जब रामायण और महाभारत का दोबारा प्रसारण हुआ तो लोगों ने फिर से इन्हें बड़े उत्साह के साथ देखा। नई पीढ़ी, जिसने पहले कभी ये शो नहीं देखे थे, वह भी इनके फैन बन गई। रामायण ने उस समय दुनिया में सबसे ज्यादा देखे जाने वाले टीवी शो का रिकॉर्ड भी बनाया था। इससे साफ हो गया कि इन धारावाहिकों का जादू सिर्फ पुरानी पीढ़ी तक सीमित नहीं है। सोशल मीडिया पर भी इन शो के डायलॉग और सीन वायरल होने लगे थे। कई लोगों ने कहा कि इन सीरियलों ने मुश्किल समय में उन्हें मानसिक शांति दी।

 

भारतीय संस्कृति की पहचान बन गए ये शो

दूरदर्शन के ये धार्मिक सीरियल सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं थे बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपरा की पहचान बन गए। इन्होंने नई पीढ़ी को रामायण, महाभारत और पुराणों की कहानियों से जोड़ने का काम किया। आज भी जब लोग पुराने दौर को याद करते हैं तो इन सीरियलों का नाम जरूर लेते हैं। यही वजह है कि इतने साल गुजर जाने के बाद भी रामायण, महाभारत और दूसरे धार्मिक धारावाहिक दर्शकों के दिलों में आज भी जिंदा हैं।