आज के समय में जिंदगी कब कौन सा मोड़ ले ले, इसका अंदाजा लगाना आसान नहीं है। कभी अचानक नौकरी चली जाती है, कभी मेडिकल इमरजेंसी आ जाती है तो कभी घर या गाड़ी पर बड़ा खर्च आ जाता है। ऐसे हालात में अगर आपके पास Emergency Fund नहीं है तो अक्सर लोग कर्ज लेने पर मजबूर हो जाते हैं। यही वजह है कि फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स हर परिवार को इमर्जेंसी फंड बनाने की सलाह देते हैं।
भारत में ज्यादातर लोग निवेश, घर खरीदने या बच्चों की पढ़ाई के लिए तो प्लानिंग कर लेते हैं, लेकिन इमरजेंसी के लिए अलग से पैसा बचाने को उतनी प्राथमिकता नहीं देते। इसी कारण अचानक संकट आने पर उन्हें क्रेडिट कार्ड, पर्सनल लोन या रिश्तेदारों का सहारा लेना पड़ता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि एक मजबूत इमर्जेंसी फंड आपको आर्थिक और मानसिक दोनों तरह की सुरक्षा देता है।
आखिर क्या होता है Emergency Fund?
इमर्जेंसी फंड ऐसा पैसा होता है जिसे सिर्फ अचानक आने वाली जरूरी परिस्थितियों के लिए अलग रखा जाता है। इसका इस्तेमाल नौकरी जाने, मेडिकल इमरजेंसी, घर की बड़ी मरम्मत, अचानक यात्रा या किसी गंभीर पारिवारिक संकट जैसी स्थिति में किया जाता है।
यह सामान्य सेविंग्स से अलग होता है। कई लोग घूमने, शॉपिंग या नया मोबाइल खरीदने के लिए जमा पैसे को भी सेविंग मान लेते हैं, लेकिन इमर्जेंसी फंड सिर्फ मुश्किल समय के लिए रखा जाता है। एक्सपर्ट्स कहते हैं कि इसका मकसद पैसा बढ़ाना नहीं बल्कि आपको कर्ज से बचाना होता है।
पहला नियम – कम से कम 6 महीने का खर्च जरूर बचाएं
फाइनेंशियल प्लानर्स का मानना है कि हर परिवार के पास कम से कम 3 से 6 महीने के जरूरी खर्च जितना इमर्जेंसी फंड होना चाहिए। अगर आपकी नौकरी स्थिर नहीं है या परिवार पूरी तरह आपकी कमाई पर निर्भर है तो यह फंड 12 महीने तक का भी होना चाहिए।
मान लीजिए आपके घर का मासिक जरूरी खर्च 40 हजार रुपये है, तो आपके पास कम से कम 2.5 से 3 लाख रुपये का इमर्जेंसी फंड होना चाहिए। इसमें किराया, EMI, बच्चों की फीस, बिजली बिल, राशन और दवाइयों जैसे जरूरी खर्च शामिल होते हैं। आज के दौर में बढ़ती महंगाई और नौकरी की अनिश्चितता को देखते हुए कई विशेषज्ञ 6 महीने से ज्यादा का फंड रखने की सलाह दे रहे हैं।
दूसरा नियम – Emergency Fund को अलग अकाउंट में रखें
सबसे बड़ी गलती लोग यह करते हैं कि इमर्जेंसी फंड को उसी बैंक अकाउंट में रखते हैं जिसमें रोजमर्रा का खर्च चलता है। ऐसा करने पर वह पैसा धीरे-धीरे दूसरे खर्चों में निकल जाता है। इसलिए एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि इमर्जेंसी फंड के लिए अलग सेविंग अकाउंट या लिक्विड फंड रखें। इससे पैसा सुरक्षित भी रहता है और जरूरत पड़ने पर जल्दी निकाला भी जा सकता है। कई लोग इस फंड को FD में रखते हैं, लेकिन पूरी रकम FD में रखना हमेशा सही नहीं माना जाता क्योंकि अचानक जरूरत पड़ने पर तुरंत पैसा निकालने में परेशानी हो सकती है। इसलिए कुछ रकम सेविंग अकाउंट और बाकी लिक्विड फंड या शॉर्ट टर्म FD में रखने की सलाह दी जाती है।
तीसरा नियम – छोटे अमाउंट से शुरुआत करें
बहुत से लोग सोचते हैं कि जब एक साथ बड़ा पैसा होगा तभी इमर्जेंसी फंड बनाएंगे। इसी सोच की वजह से शुरुआत ही नहीं हो पाती। जबकि फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स कहते हैं कि छोटी रकम से शुरुआत करना सबसे जरूरी है। अगर आप हर महीने सिर्फ 2 हजार या 5 हजार रुपये भी अलग रखना शुरू करते हैं तो धीरे-धीरे अच्छा फंड तैयार हो सकता है। जरूरी यह है कि इसमें नियमितता बनी रहे। कई लोग अपनी सैलरी आते ही सबसे पहले SIP और बाकी खर्चों पर पैसा लगाते हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि निवेश से पहले इमर्जेंसी फंड बनाना ज्यादा जरूरी है। क्योंकि मुश्किल समय में यही पैसा सबसे पहले काम आता है।
चौथा नियम – फंड को निवेश समझने की गलती न करें
कुछ लोग ज्यादा रिटर्न के चक्कर में इमर्जेंसी फंड को शेयर बाजार या इक्विटी म्यूचुअल फंड में लगा देते हैं। एक्सपर्ट्स इसे बड़ी गलती मानते हैं। कारण साफ है। अगर बाजार गिरा हुआ हो और उसी समय आपको पैसों की जरूरत पड़ जाए तो नुकसान में निवेश निकालना पड़ सकता है। इसलिए इमर्जेंसी फंड हमेशा ऐसी जगह रखना चाहिए जहां पैसा सुरक्षित और जल्दी उपलब्ध हो। यही वजह है कि लिक्विड फंड, सेविंग अकाउंट और शॉर्ट टर्म FD को इसके लिए बेहतर विकल्प माना जाता है।
पांचवां नियम – सिर्फ इमरजेंसी में ही इस्तेमाल करें
यह नियम सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। कई लोग इमर्जेंसी फंड बनाकर बाद में उसका इस्तेमाल घूमने, त्योहारों की खरीदारी या गैजेट खरीदने में कर देते हैं। इससे असली जरूरत के समय उनके पास कुछ नहीं बचता। इमर्जेंसी फंड का इस्तेमाल सिर्फ गंभीर और अचानक आने वाली परिस्थितियों में होना चाहिए। जैसे नौकरी जाना, बड़ा मेडिकल खर्च या जरूरी घरेलू संकट। अगर किसी महीने ज्यादा खर्च हो गया तो उसकी भरपाई सामान्य सेविंग्स से करनी चाहिए, इमर्जेंसी फंड से नहीं।
छठा नियम – इस्तेमाल के बाद फंड को दोबारा भरें
कई बार लोग इमर्जेंसी फंड का इस्तेमाल तो कर लेते हैं, लेकिन बाद में उसे दोबारा भरने पर ध्यान नहीं देते। यह आदत भविष्य में बड़ी परेशानी बन सकती है। फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स कहते हैं कि अगर आपने इमर्जेंसी फंड से पैसा निकाला है तो उसे दोबारा भरना आपकी पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। जरूरत पड़े तो कुछ समय के लिए SIP या दूसरे निवेश कम किए जा सकते हैं, लेकिन इमर्जेंसी फंड को खाली नहीं छोड़ना चाहिए। क्योंकि जिंदगी में संकट एक बार नहीं, कई बार भी आ सकता है।
सातवां नियम – परिवार के हर सदस्य को जानकारी
बहुत से घरों में सिर्फ एक व्यक्ति को पता होता है कि इमर्जेंसी फंड कहां रखा है। अगर अचानक उस व्यक्ति के साथ कोई समस्या हो जाए तो बाकी परिवार परेशानी में पड़ सकता है। इसलिए जरूरी है कि परिवार के भरोसेमंद सदस्यों को भी इसकी जानकारी हो। उन्हें यह पता होना चाहिए कि पैसा कहां रखा है और जरूरत पड़ने पर कैसे निकाला जा सकता है। यह सिर्फ फाइनेंशियल प्लानिंग नहीं बल्कि परिवार की सुरक्षा का हिस्सा भी माना जाता है।
भारतीय परिवारों में क्यों बढ़ रही है इसकी जरूरत?
कोरोना महामारी के बाद लोगों को इमर्जेंसी फंड की असली अहमियत समझ में आई। उस समय लाखों लोगों की नौकरी चली गई थी और कई परिवारों को मेडिकल खर्चों के लिए भारी कर्ज लेना पड़ा था।
आज भी भारत में बड़ी संख्या में लोग ऐसे हैं जिनके पास मुश्किल समय के लिए पर्याप्त बचत नहीं है। कई रिपोर्ट्स के मुताबिक ज्यादातर भारतीय परिवारों के पास सिर्फ 1-2 महीने का ही बैकअप होता है। Reddit और पर्सनल फाइनेंस फोरम पर भी लोग मानते हैं कि इमर्जेंसी फंड मानसिक शांति देता है। कई यूजर्स ने लिखा कि यह सिर्फ पैसा नहीं बल्कि फाइनेंशियल सेफ्टी नेट जैसा होता है।
Emergency Fund आपको कर्ज के जाल से बचाता है
जब अचानक पैसे की जरूरत पड़ती है तो ज्यादातर लोग क्रेडिट कार्ड या पर्सनल लोन का सहारा लेते हैं। इन पर ब्याज काफी ज्यादा होता है और धीरे-धीरे व्यक्ति कर्ज के जाल में फंस सकता है। अगर आपके पास इमर्जेंसी फंड है तो आप बिना किसी तनाव के मुश्किल समय का सामना कर सकते हैं। यही वजह है कि फाइनेंशियल प्लानिंग में इसे सबसे पहली सीढ़ी माना जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि निवेश, SIP और रिटायरमेंट प्लानिंग से पहले हर परिवार को मजबूत इमर्जेंसी फंड बनाना चाहिए। क्योंकि जिंदगी में कब कौन सी परेशानी आ जाए, यह कोई नहीं जानता।









