दिल्ली ब्लास्ट मामले की जांच में NIA ने एक और गिरफ्तारी करते हुए आतंकी डॉ उमर नबी के साथी शोएब को पकड़ा है। शोएब फरीदाबाद के धौज गांव का रहने वाला है और अल फलाह यूनिवर्सिटी में वार्ड बॉय था। जांच में सामने आया है कि उसने उमर को सामान लाने-ले जाने में मदद की थी। इसके साथ ही उसने उमर को नूंह में अपनी साली अफसाना के घर पर किराए का कमरा भी दिलवाया था। बताया जा रहा है कि ब्लास्ट से 10 दिन पहले उमर इसी घर में रहा था और घटना वाले दिन वहीं से दिल्ली के लिए निकला था। यह केस में सातवीं गिरफ्तारी है।
उधर, NIA आतंकी मॉड्यूल से जुड़े डॉ आदिल अहमद और डॉ शाहीन सईद को अब अल फलाह यूनिवर्सिटी ले जाएगी, ताकि उनकी गतिविधियों की पड़ताल की जा सके। जांच में पता चला है कि उमर नबी और आदिल की दोस्ती कई साल पुरानी थी। आदिल कई बार उमर से मिलने यूनिवर्सिटी आता था और उसके हॉस्टल फ्लैट में ही रुकता था। इसी दौरान उसकी मुलाकात मुजम्मिल शकील और शाहीन से हुई। आरोप है कि आदिल ने ही फतेहपुरा तगा और धौज गांव में विस्फोटक जुटाने का आइडिया दिया था, क्योंकि यहां आसानी से कमरे किराए पर मिल जाते हैं।
जम्मू कश्मीर पुलिस ने यूपी पुलिस के साथ मिलकर 26 अक्टूबर को आदिल को सहारनपुर से गिरफ्तार किया था। उसके घर से AK 47 भी मिली थी। पूछताछ में वह टूट गया और उसने बाकी डॉक्टरों के नाम और विस्फोटक सामग्री के ठिकाने खोल दिए। इसी आधार पर मुजम्मिल को पकड़ा गया और बाद में फरीदाबाद व सोहना में तलाशी ली गई। मुजम्मिल ने NIA को बताया कि वह जनवरी–फरवरी 2023 में दो दुकानों से अमोनियम नाइट्रेट खरीदता था।
जांच में यह भी सामने आया है कि मुजम्मिल को विदेशी हैंडलर ने कुल 42 वीडियो भेजे थे, जिनमें विस्फोटक तैयार करने के तरीके बताए गए थे। NIA अब इन विदेशी हैंडलरों के नेटवर्क और पहचान की गहराई से जांच कर रही है।
डॉ शाहीन की भूमिका भी जांच के दायरे में है। वह यूनिवर्सिटी की करिकुलम कमेटी में थी और बताया जा रहा है कि युवाओं को इस नेटवर्क में जोड़ने का काम करती थी। एजेंसी अब उससे पूछताछ कर यह जानने की कोशिश करेगी कि वह किससे मिलती थी, मीटिंग कहां होती थीं और हथियारों को कैंपस में कैसे लाया और कहां छिपाया गया।









