Iran-Israel Tension: इजरायल ने ईरान में हालिया हवाई हमलों में सुरक्षा परिषद के सचिव अली लारीजानी को निशाना बनाने का दावा किया है लेकिन मौत या घायल होने की पुष्टि नहीं हुई है। लारीजानी को अयातुल्ला अली खामेनेई का करीबी माना जाता है और खामेनेई की मौत के बाद वे प्रमुख फैसले ले रहे थे। इजरायली सेना ने फिलिस्तीनी इस्लामिक जिहाद के नेता अकरम अल अजूरी समेत अन्य अधिकारियों को भी टारगेट किया। लारीजानी ने 16 मार्च को अपना आखिरी पोस्ट किया जिसमें उन्होंने मुस्लिम देशों की चुप्पी की आलोचना की। यह घटना मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष को और गहरा कर सकती है।
मध्य पूर्व में तनाव चरम पर पहुंच गया है। इजरायल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष में अब ईरान के उच्च स्तर के सुरक्षा अधिकारी अली लारीजानी को निशाना बनाने के दावे सामने आए हैं। इजरायली मीडिया और रक्षा सूत्रों ने हवाई हमलों की पुष्टि की है लेकिन लारीजानी की स्थिति पर स्पष्ट जानकारी नहीं है। यह घटना क्षेत्रीय सुरक्षा को प्रभावित कर रही है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय सतर्क हो गया है।
हमले की पृष्ठभूमि क्या है
अली लारीजानी ईरान के प्रमुख राजनीतिक चेहरों में शामिल हैं। वे पूर्व संसद स्पीकर रह चुके हैं और राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार भी रहे हैं। उन्हें कट्टरपंथी नेताओं की श्रेणी में गिना जाता है। जून 2025 में अयातुल्ला अली खामेनेई ने उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद का सचिव नियुक्त किया था। खामेनेई की मौत के बाद लारीजानी कई बड़े फैसले ले रहे थे।
28 फरवरी 2026 से इजरायल और अमेरिका ने ईरान पर हमले शुरू किया था, जिसमें कई टॉप कमांडर मारे गए। लारीजानी ने सोशल मीडिया पर मुस्लिम देशों को संबोधित करते हुए कहा कि अमेरिका और इजरायल ने धोखे से हमला किया है जिसका मकसद ईरान को विभाजित करना है। उन्होंने पूछा कि यह कैसा इस्लाम है जब मुस्लिम देश ईरान के साथ एकजुट नहीं हो रहे। यह उनका आखिरी सार्वजनिक बयान इजरायली रक्षा बल के चीफ ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल एयाल जमीर ने कहा कि रात भर दुश्मन को खत्म करने में महत्वपूर्ण सफलताएं मिली हैं। यह बयान लारीजानी को निशाना बनाने वाले हमले का संकेत देता है। साथ ही फिलिस्तीनी इस्लामिक जिहाद के नेता अकरम अल अजूरी और अन्य अधिकारियों को भी टारगेट किया गया।
इस घटना का क्षेत्रीय प्रभाव क्या होगा
यह हमला ईरान की सुरक्षा व्यवस्था पर सीधा प्रहार है। लारीजानी जैसे उच्च अधिकारी की अनुपस्थिति या घायल होने से ईरान की रणनीतिक निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। क्षेत्र में पहले से ही तनाव है और ऐसे हमले संघर्ष को और बढ़ा सकते हैं। ईरान ने पहले भी जवाबी हमले किए हैं जिसमें इजरायल और अमेरिका से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया गया। लारीजानी की स्थिति स्पष्ट न होने से दोनों पक्षों में अनिश्चितता बढ़ गई है। मुस्लिम देशों की चुप्पी पर लारीजानी की आलोचना से क्षेत्रीय एकजुटता की बहस तेज हो गई है। सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है और कई हमलों में इमारतें क्षतिग्रस्त हुई हैं।
Iran-Israel Tension: विशेषज्ञ क्या कह रहे हैं
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इजरायल ईरान की कमांड संरचना को कमजोर करने की रणनीति अपना रहा है। एक वरिष्ठ मध्य पूर्व विशेषज्ञ ने कहा कि लारीजानी को निशाना बनाना ईरान के नेतृत्व पर दबाव बढ़ाने का प्रयास है क्योंकि वे खामेनेई के करीबी थे और कई फैसले ले रहे थे।
विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे लक्षित हमले संघर्ष को लंबा खींच सकते हैं लेकिन ईरान की जवाबी कार्रवाई की संभावना भी मजबूत है। अंतरराष्ट्रीय कानून विशेषज्ञों का कहना है कि नागरिक ठिकानों पर हमले मानवीय कानूनों का उल्लंघन हो सकते हैं लेकिन दोनों पक्ष अपने रक्षा अधिकार का हवाला दे रहे हैं।
आगे क्या होने की संभावना है
अभी लारीजानी की मौत या घायल होने की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ईरान की ओर से कोई बयान नहीं आया है जो स्थिति को और जटिल बना रहा है। इजरायल की ओर से और हमलों की आशंका है जबकि ईरान जवाबी हमले की तैयारी में जुटा हो सकता है। क्षेत्रीय शांति के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को मध्यस्थता करनी चाहिए। अगर लारीजानी सक्रिय हैं तो ईरान की रणनीति में बदलाव आ सकता है। यह संघर्ष मध्य पूर्व की स्थिरता को चुनौती दे रहा है। दोनों पक्षों को संयम बरतना चाहिए ताकि बड़ा युद्ध टल सके।









