अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रहे तनाव के बाद एक अहम समझौते की खबर सामने आई है। दोनों देशों ने युद्ध रोकने, समुद्री नाकेबंदी हटाने और दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने पर सहमति जताई है। 

पहली नजर में यह खबर राहत देने वाली लगती है, लेकिन जैसे-जैसे समझौते की जानकारी सामने आ रही है, वैसे-वैसे कई सवाल भी खड़े हो रहे हैं। सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर है कि क्या होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों से टोल वसूला जाएगा, क्या रास्ता पूरी तरह खुला होगा और आखिर इस डील का असर दुनिया पर कितना पड़ेगा। आइए उन 5 बड़े सवालों को समझते हैं जिनकी वजह से अभी भी काफी वहम बना हुआ है।

 

आखिर होर्मुज स्ट्रेट इतना महत्वपूर्ण क्यों है?

होर्मुज स्ट्रेट फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। दुनिया के तेल और गैस व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। यही वजह है कि जब भी इस क्षेत्र में तनाव बढ़ता है, पूरी दुनिया की नजर इस जलमार्ग पर टिक जाती है। 

पिछले कुछ महीनों में अमेरिका-ईरान संघर्ष के दौरान यहां जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई थी, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में चिंता बढ़ गई थी। अब समझौते के बाद उम्मीद की जा रही है कि हालात सामान्य होंगे।

पहला सवाल: क्या होर्मुज स्ट्रेट सच में खुल गया है?

यही सबसे बड़ा सवाल है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि समझौते के तहत होर्मुज स्ट्रेट को खोला जाएगा और नौसैनिक नाकेबंदी हटाई जाएगी। दूसरी तरफ ईरान की ओर से भी जलमार्ग खोलने की बात कही गई है। 

लेकिन समझौते का पूरा दस्तावेज अभी सार्वजनिक नहीं हुआ है। कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि अंतिम हस्ताक्षर होने के बाद ही प्रक्रिया पूरी तरह लागू होगी। ऐसे में तकनीकी रूप से रास्ता खुलने की घोषणा तो हो गई है, लेकिन उसका पूरा क्रियान्वयन अभी बाकी माना जा रहा है। 

दूसरा सवाल: क्या जहाजों से टोल वसूला जाएगा?

यही वह मुद्दा है जिसने सबसे ज्यादा चर्चा पैदा की है। पिछले महीनों में ऐसी खबरें सामने आई थीं कि ईरान होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क या टोल लगाने की मांग कर रहा है। इसको लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बहस हुई थी। 

हालांकि ट्रंप ने हालिया बयान में ‘टोल-फ्री ओपनिंग’ यानी बिना किसी शुल्क के रास्ता खोलने की बात कही है। दूसरी ओर कुछ रिपोर्टों में अभी भी यह स्पष्ट नहीं है कि भविष्य में ईरान की नीति क्या रहेगी। यानी फिलहाल आधिकारिक तौर पर रास्ता बिना टोल के खोलने की बात कही जा रही है, लेकिन इस विषय पर पूरी स्पष्टता अभी नहीं आई है।

तीसरा सवाल: क्या युद्ध पूरी तरह खत्म हो गया है?

समझौते में युद्ध समाप्त करने और सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति की बात कही गई है। कुछ रिपोर्टों के अनुसार इसमें लेबनान मोर्चा भी शामिल है। लेकिन कई अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि जमीन पर स्थिति पूरी तरह साफ नहीं है। कुछ क्षेत्रों में तनाव बना हुआ है और आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि सभी पक्ष समझौते का पालन करते हैं या नहीं। इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि क्षेत्र में पूरी तरह शांति स्थापित हो चुकी है।

चौथा सवाल: ईरान के परमाणु कार्यक्रम का क्या होगा?

यह अमेरिका और ईरान के बीच सबसे बड़ा विवादित मुद्दा रहा है। समझौते में युद्धविराम और बातचीत पर सहमति तो बनी है, लेकिन परमाणु कार्यक्रम को लेकर अंतिम समाधान अभी नहीं निकला है। 

रिपोर्ट्स के मुताबिक अगले 60 दिनों तक दोनों देशों के बीच बातचीत जारी रहेगी। इसमें यूरेनियम भंडार, परमाणु गतिविधियों और प्रतिबंधों जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। यानी सबसे अहम मुद्दा अभी भी पूरी तरह सुलझा नहीं है।

पांचवां सवाल: भारत और दुनिया पर क्या असर पड़ेगा?

भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में से एक है। होर्मुज स्ट्रेट से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल एशियाई देशों तक पहुंचता है। इसलिए इस मार्ग में किसी भी तरह की रुकावट का असर भारत पर भी पड़ता है।

अमेरिका-ईरान समझौते की खबर आने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में गिरावट देखने को मिली। निवेशकों को उम्मीद है कि यदि तेल की सप्लाई सामान्य हो जाती है तो ऊर्जा संकट कम हो सकता है। हालांकि एक्सपर्ट्स का कहना है कि केवल घोषणा से सबकुछ सामान्य नहीं हो जाएगा। जहाजरानी कंपनियों, बीमा कंपनियों और ऊर्जा बाजार को भी यह भरोसा होना चाहिए कि मार्ग वास्तव में सुरक्षित है। 

 

अभी भी क्यों बना हुआ है कन्फ्यूजन?

असल वजह यह है कि समझौते की पूरी शर्तें अभी सार्वजनिक नहीं हुई हैं। अलग-अलग पक्ष अलग-अलग बातें कह रहे हैं। कहीं टोल-फ्री मार्ग की बात हो रही है, कहीं ईरान की व्यवस्था के तहत रास्ता खोलने की चर्चा है। इसी वजह से दुनिया भर के एनालिस्ट अभी आखिरी निष्कर्ष निकालने से बच रहे हैं। जब तक समझौते पर ऑफिशियल हस्ताक्षर नहीं हो जाते और उसका पूरा मसौदा सामने नहीं आता, तब तक कई सवाल बने रह सकते हैं।

 

हमारी राय

अमेरिका और ईरान के बीच हुआ यह समझौता निश्चित रूप से मध्य पूर्व में तनाव कम करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा सकता है। लेकिन अभी जश्न मनाने से ज्यादा जरूरी है इंतजार करना। होर्मुज स्ट्रेट का पूरी तरह खुलना, टोल को लेकर अंतिम स्थिति, परमाणु कार्यक्रम पर सहमति और क्षेत्रीय शांति जैसे मुद्दों पर अभी स्पष्ट जवाब आना बाकी है। अगर आने वाले दिनों में ये सभी सवाल सुलझ जाते हैं, तो इसका फायदा सिर्फ अमेरिका और ईरान को ही नहीं बल्कि भारत समेत पूरी दुनिया को मिल सकता है। फिलहाल यह डील राहत की खबर जरूर है, लेकिन इसके कई अध्याय अभी लिखे जाने बाकी हैं।