कहते हैं कि टैलेंट उम्र का मोहताज नहीं होता और 19 साल के निसर्ग अधिकारी ने इसे सच साबित कर दिखाया है। कुछ ही दिनों पहले तक निसर्ग का नाम CBSE के ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम में कथित सुरक्षा खामियों को उजागर करने की वजह से चर्चा में था। अब वही युवा साइबर सिक्योरिटी रिसर्चर IIT कानपुर से जुड़ गया है।
सबसे दिलचस्प बात यह है कि निसर्ग ने अभी कोई बड़ी इंजीनियरिंग डिग्री हासिल नहीं की है, लेकिन उनकी तकनीकी समझ और साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में कौशल ने देश के प्रतिष्ठित संस्थानों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। IIT कानपुर ने उन्हें अपने साइबर सिक्योरिटी इनोवेशन हब में थ्रेट इंटेलिजेंस इंजीनियर की भूमिका दी है।
कौन हैं निसर्ग अधिकारी?
निसर्ग अधिकारी पश्चिम बंगाल के सिलिगुड़ी के रहने वाले हैं। महज 19 साल की उम्र में उन्होंने साइबर सिक्योरिटी और प्रोग्रामिंग की दुनिया में अपनी अलग पहचान बना ली है। निसर्ग का दावा है कि वे कम उम्र से ही कोडिंग और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट से जुड़े रहे हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने कई स्टार्टअप्स के साथ काम किया है और ओपन-सोर्स प्रोजेक्ट्स में भी योगदान दिया है। निसर्ग का मानना है कि एक अच्छा इंजीनियर बनने के लिए सिर्फ डिग्री ही जरूरी नहीं होती, बल्कि तकनीकी कौशल और समस्या को समझने की क्षमता ज्यादा मायने रखती है।
कैसे चर्चा में आया उनका नाम?
निसर्ग अधिकारी उस समय सुर्खियों में आए जब उन्होंने CBSE के ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम यानी OSM पोर्टल में कथित सुरक्षा खामियों को लेकर सार्वजनिक रूप से जानकारी साझा की। उन्होंने दावा किया था कि पोर्टल में ऐसी कमजोरियां मौजूद थीं जिनका गलत इस्तेमाल करके कोई व्यक्ति सिस्टम तक अनधिकृत पहुंच बना सकता था। उनके ब्लॉग और सोशल मीडिया पोस्ट के बाद यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया। हालांकि CBSE ने बाद में कहा कि जिन खामियों की बात की जा रही थी, वे वास्तविक मूल्यांकन प्रणाली में नहीं बल्कि एक टेस्टिंग साइट में थीं और मुख्य मूल्यांकन प्रणाली पूरी तरह सुरक्षित थी।
OSM सिस्टम क्या है?
CBSE ने इस साल बोर्ड परीक्षाओं की कॉपियों की जांच के लिए ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम लागू किया था। इस प्रणाली में परीक्षकों को उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपी ऑनलाइन उपलब्ध कराई जाती है और मूल्यांकन डिजिटल तरीके से किया जाता है।
इस नई व्यवस्था को लेकर पहले से ही कई तरह की चर्चाएं चल रही थीं। कुछ छात्रों ने उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग और रीचेकिंग प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए थे। ऐसे माहौल में निसर्ग के दावों ने इस मुद्दे को और बड़ा बना दिया।
IIT कानपुर ने क्यों दिखाया भरोसा?
निसर्ग द्वारा उजागर की गई तकनीकी खामियों और उनके एनालिसिस ने साइबर सिक्योरिटी विशेषज्ञों का ध्यान खींचा। रिपोर्ट्स के मुताबिक IIT कानपुर के अधिकारियों ने उनके काम को गंभीरता से देखा और उनकी तकनीकी क्षमता को पहचाना।
इसके बाद उन्हें IIT कानपुर के साइबर सिक्योरिटी इनोवेशन हब में थ्रेट इंटेलिजेंस इंजीनियर के रूप में अवसर दिया गया। यह नियुक्ति इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि इतनी कम उम्र में और बिना पारंपरिक इंजीनियरिंग डिग्री के किसी प्रतिष्ठित संस्थान में ऐसी भूमिका मिलना बड़ी उपलब्धि है।
क्या होता है थ्रेट इंटेलिजेंस इंजीनियर का काम?
थ्रेट इंटेलिजेंस इंजीनियर का काम साइबर खतरों की पहचान करना, संभावित हमलों का विश्लेषण करना और डिजिटल सिस्टम को सुरक्षित बनाने के उपाय तैयार करना होता है। आज के समय में जब सरकारी संस्थान, बैंक, कंपनियां और शैक्षणिक संस्थाएं तेजी से डिजिटल हो रही हैं, तब साइबर सुरक्षा पहले से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है। ऐसे में इस क्षेत्र के विशेषज्ञों की मांग लगातार बढ़ रही है। निसर्ग की भूमिका भी इसी दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जहां वे संभावित साइबर खतरों को समझने और सुरक्षा उपायों को मजबूत बनाने में योगदान देंगे।
CBSE विवाद के बाद क्या हुआ?
निसर्ग द्वारा खामियां उजागर किए जाने के बाद मामले ने काफी तूल पकड़ा। कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि IIT और अन्य विशेषज्ञों ने भी OSM सिस्टम से जुड़े कुछ सुरक्षा मुद्दों की समीक्षा की। बाद में कई संभावित एंट्री पॉइंट्स को बंद किया गया और सिस्टम की सुरक्षा को मजबूत करने के कदम उठाए गए। इस पूरे विवाद ने सरकारी और शैक्षणिक डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की साइबर सुरक्षा पर भी सवाल खड़े किए।
युवाओं के लिए क्यों खास है यह कहानी?
निसर्ग अधिकारी की कहानी इसलिए प्रेरणादायक मानी जा रही है क्योंकि उन्होंने दिखाया कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती। आज इंटरनेट के दौर में अगर किसी के पास जिज्ञासा, मेहनत और सही दिशा में सीखने की इच्छा हो तो वह कम उम्र में भी बड़ी उपलब्धियां हासिल कर सकता है। साइबर सिक्योरिटी जैसे क्षेत्र में जहां लगातार नई चुनौतियां सामने आती रहती हैं, वहां युवा प्रतिभाएं तेजी से अपनी पहचान बना रही हैं।
सोशल मीडिया पर भी हुई चर्चा
निसर्ग की नियुक्ति की खबर सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी काफी प्रतिक्रिया देखने को मिली। कई लोगों ने इसे युवा प्रतिभा की जीत बताया, जबकि कुछ लोगों ने कहा कि संस्थानों को ऐसे प्रतिभाशाली युवाओं को और अधिक अवसर देने चाहिए। कई साइबर सिक्योरिटी विशेषज्ञों ने भी इस घटना को सकारात्मक संकेत बताया है, क्योंकि इससे एथिकल हैकिंग और जिम्मेदार तरीके से सुरक्षा खामियों की रिपोर्टिंग को प्रोत्साहन मिलता है।
भारत में बढ़ रहा है साइबर सिक्योरिटी का महत्व
डिजिटल इंडिया के दौर में साइबर सुरक्षा की अहमियत लगातार बढ़ रही है। बैंकिंग, शिक्षा, स्वास्थ्य और सरकारी सेवाएं तेजी से ऑनलाइन हो रही हैं। ऐसे में साइबर हमलों से बचाव और सिस्टम की सुरक्षा सुनिश्चित करना बड़ी चुनौती बन गया है। यही वजह है कि साइबर सिक्योरिटी प्रोफेशनल्स की मांग लगातार बढ़ रही है और निसर्ग जैसे युवा इस क्षेत्र के भविष्य के रूप में देखे जा रहे हैं।
हमारी राय
निसर्ग अधिकारी की कहानी सिर्फ एक नौकरी मिलने की खबर नहीं है, बल्कि यह इस बात का उदाहरण है कि प्रतिभा और कौशल को पहचान मिलने लगी है। कम उम्र में तकनीकी समझ और साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में गहरी पकड़ के दम पर उन्होंने जो पहचान बनाई है, वह दूसरे युवाओं के लिए भी प्रेरणा है। साथ ही यह घटना संस्थानों को भी याद दिलाती है कि कभी-कभी असली टैलेंट किताबों की डिग्री से नहीं, बल्कि समस्या को समझने और उसका समाधान खोजने की क्षमता से पहचाना जाता है।









