अगर आपने कभी भारतीय रेलवे के AC कोच में सफर किया है, तो आपने देखा होगा कि बेडरोल किट में आपको दो सफेद बेडशीट, एक कंबल, तकिए का कवर और एक हैंड टॉवल मिलता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर रेलवे दो बेडशीट क्यों देता है? क्या एक ही बेडशीट काफी नहीं होती?

ज्यादातर लोग दोनों बेडशीट का इस्तेमाल अपनी सुविधा के हिसाब से करते हैं। कोई एक बिछाता है और दूसरी ओढ़ लेता है, तो कोई दोनों को बिछा लेता है। लेकिन रेलवे ने दोनों बेडशीट देने के पीछे एक खास वजह बताई है, जो सीधे तौर पर यात्रियों की सफाई और स्वास्थ्य से जुड़ी है। हाल ही में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संसद में इस बारे में विस्तार से जानकारी दी।

 

AC कोच में क्या-क्या मिलता है?

भारतीय रेलवे First AC, Second AC, Third AC और AC Economy में सफर करने वाले यात्रियों को बेडरोल किट देता है। इसका खर्च टिकट के किराए में पहले से शामिल होता है। एक सामान्य बेडरोल किट में ये सामान होता है—

  • दो बेडशीट
  • एक कंबल
  • एक तकिया
  • तकिए का कवर
  • एक हैंड टॉवल

कई लोगों को लगता है कि दो बेडशीट सुविधा के लिए दी जाती हैं, लेकिन इसकी असली वजह कुछ और है।

 

आखिर दो बेडशीट क्यों दी जाती हैं?

रेल मंत्री के मुताबिक पहली बेडशीट सीट या बर्थ पर बिछाने के लिए होती है। वहीं दूसरी बेडशीट का इस्तेमाल कंबल और शरीर के बीच एक परत (लेयर) के रूप में करने के लिए किया जाता है। यानी जब आप कंबल ओढ़ते हैं, तो वह सीधे आपके शरीर के संपर्क में नहीं आता। इसका मकसद साफ-सफाई बनाए रखना और संक्रमण का खतरा कम करना है।

 

कंबल रोज क्यों नहीं धुलते?

बहुत से यात्रियों के मन में यह सवाल भी आता है कि बेडशीट तो हर यात्रा के बाद धो दी जाती है, लेकिन कंबल रोज क्यों नहीं धुलते? रेल मंत्री ने राज्यसभा में बताया कि दूसरी बेडशीट को इसी वजह से रखा गया है ताकि कंबल सीधे यात्री के संपर्क में न आए। यह अतिरिक्त चादर हर इस्तेमाल के बाद धोई जाती है, जिससे सफाई का स्तर बेहतर बना रहे। वहीं ऊनी कंबलों के लिए अलग रखरखाव के नियम हैं।

 

रेलवे ने सफाई बढ़ाने के लिए क्या किया?

भारतीय रेलवे अब सिर्फ पारंपरिक तरीके से ही नहीं, बल्कि नई तकनीक की मदद से भी बेडरोल की गुणवत्ता जांच रहा है। देश की कई मैकेनाइज्ड लॉन्ड्री में Whito-Meter मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे चादरों की सफाई का स्तर जांचा जाता है। इसके अलावा लॉन्ड्री में CCTV कैमरे लगाए गए हैं ताकि पूरी प्रक्रिया पर नजर रखी जा सके।

 

AI से भी होगी चादरों की जांच

रेलवे ने अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का भी इस्तेमाल शुरू कर दिया है। फिलहाल पुणे, जयपुर और जोधपुर डिवीजनों की कुछ लॉन्ड्री में AI कैमरा आधारित स्टेन डिटेक्शन सिस्टम का पायलट प्रोजेक्ट चल रहा है। यह तकनीक धोने के बाद भी रह गए दाग-धब्बों की पहचान करेगी, जिससे यात्रियों तक ज्यादा साफ बेडशीट पहुंच सके।

 

कितने समय बाद बदले जाते हैं बेडरोल?

रेलवे हर बेडरोल का एक तय लाइफ साइकल रखता है। उदाहरण के लिए—

  • तकिए का कवर – लगभग 9 महीने
  • हैंड टॉवल – लगभग 9 महीने
  • हैंडलूम बेडशीट – लगभग 12 महीने
  • पॉलीवस्त्र बेडशीट – लगभग 24 महीने
  • तकिया – लगभग 24 महीने
  • ऊनी कंबल – लगभग 24 महीने

अगर कोई सामान समय से पहले खराब हो जाता है या इस्तेमाल लायक नहीं रहता, तो उसे बदल दिया जाता है।

 

क्या सभी यात्री सही तरीके से इस्तेमाल करते हैं?

असल में ऐसा नहीं है। कई यात्री पहली बेडशीट बिछाते हैं और दूसरी को ओढ़ लेते हैं। कुछ लोग कंबल को नीचे बिछाकर उसके ऊपर सोते हैं। यानी अधिकांश लोग रेलवे द्वारा बताए गए तरीके का पालन नहीं करते। लेकिन रेलवे का कहना है कि दूसरी बेडशीट का सही इस्तेमाल कंबल और शरीर के बीच एक सुरक्षा परत के रूप में करना चाहिए।

 

सफाई पर रेलवे का बढ़ता फोकस

हाल के सालों में रेलवे यात्रियों की सुविधाओं और साफ-सफाई पर ज्यादा ध्यान दे रहा है। नई लॉन्ड्री मशीनें, डिजिटल मॉनिटरिंग, AI तकनीक और बेहतर क्वालिटी कंट्रोल जैसे कदम इसी दिशा में उठाए जा रहे हैं। रेलवे का मानना है कि लंबी दूरी की यात्रा में साफ बेडरोल यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाते हैं।

 

अगली बार सफर करें तो रखें ध्यान

अगर अगली बार आप AC कोच में सफर करें, तो दोनों बेडशीट का सही इस्तेमाल करने की कोशिश करें। एक चादर सीट पर बिछाएं और दूसरी चादर को कंबल के नीचे रखें। इससे कंबल सीधे शरीर के संपर्क में नहीं आएगा और सफाई भी बेहतर बनी रहेगी। खासकर लंबी दूरी की यात्रा में यह तरीका ज्यादा आरामदायक और स्वच्छ माना जाता है।

 

हमारी राय

रेलवे द्वारा दो बेडशीट देना कोई अतिरिक्त सुविधा नहीं, बल्कि यात्रियों की स्वच्छता और स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर बनाई गई व्यवस्था है। ज्यादातर लोग इसके पीछे की वजह नहीं जानते और दोनों चादरों का इस्तेमाल अपनी सुविधा के हिसाब से करते हैं। लेकिन अगर रेलवे के बताए तरीके से इनका उपयोग किया जाए, तो यात्रा ज्यादा साफ, सुरक्षित और आरामदायक हो सकती है। वहीं AI आधारित लॉन्ड्री जांच और बेहतर गुणवत्ता नियंत्रण जैसे कदम यह दिखाते हैं कि भारतीय रेलवे यात्रियों के अनुभव को लगातार बेहतर बनाने की दिशा में काम कर रहा है।