तमिलनाडु की राजनीति में इस बार सबसे बड़ा सवाल यही है कि थलपति विजय मुख्यमंत्री बन पाएंगे या नहीं। उनकी पार्टी Tamilaga Vettri Kazhagam (TVK) ने शानदार प्रदर्शन किया है, लेकिन पूर्ण बहुमत से कुछ सीटें दूर रह गई है। ऐसे में सरकार बनाने के लिए उन्हें अन्य दलों या निर्दलीय विधायकों का समर्थन जरूरी होगा। यही कारण है कि शपथ ग्रहण को लेकर अब तक स्थिति साफ नहीं हो पाई है और राजनीतिक हलचल लगातार तेज बनी हुई है। 7 मई को राज्य में मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण की बात है लेकिन मामला टल भी सकता है।
अधूरी रह गई बहुमत की कहानी
पहली बार चुनाव लड़ रही Tamilaga Vettri Kazhagam (TVK) ने उम्मीद से कहीं बेहतर प्रदर्शन किया है, जिसने तमिलनाडु की राजनीति को पूरी तरह बदल दिया है। पार्टी ने कई बड़े नेताओं को कड़ी टक्कर दी और कई सीटों पर जीत हासिल की। हालांकि बहुमत का आंकड़ा पार न कर पाने के कारण सरकार गठन में अड़चन आ गई है। यह डेब्यू भले ही ऐतिहासिक रहा हो, लेकिन सत्ता तक पहुंचने के लिए अब भी राजनीतिक जोड़-तोड़ की जरूरत बनी हुई है।
Congress का समर्थन फिर भी नहीं बन पाई बात
तमिलनाडु में सरकार गठन की कवायद के बीच कांग्रेस ने TVK को समर्थन देने की बात कही। इसके बावजूद बहुमत का गणित पूरी तरह फिट नहीं बैठ पा रहा है। कारण यह है कि केवल कांग्रेस का समर्थन काफी नहीं है और दूसरे दलों या निर्दलीय विधायकों का साथ जरूरी हो गया है। कांग्रेस को महज 5 ही सीट आए जो मिलकर 118 नहीं बना पा रहे। राजनीतिक समीकरण अभी भी अस्थिर हैं, जिससे सरकार बनने की प्रक्रिया में देरी हो रही है और सियासी अनिश्चितता बनी हुई है।
गठबंधन की राजनीति बनेगी विजय की सबसे बड़ी चुनौती
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि थलपति विजय किसके साथ मिलकर सरकार बनाएंगे। तमिलनाडु में पहले से मजबूत दल जैसे DMK और AIADMK अपनी-अपनी रणनीति बना रहे हैं। अगर कोई भी दल TVK को समर्थन देता है, तो सत्ता का समीकरण बदल सकता है। लेकिन यह इतना आसान नहीं होगा, क्योंकि हर पार्टी अपने राजनीतिक फायदे को ध्यान में रखकर ही फैसला करेगी।
विजय ने राज्यपाल से की मुलाकात
थलपति विजय ने आज राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश किया है। उन्होंने अपने समर्थन का आंकड़ा भी पेश करने की कोशिश की, ताकि उन्हें सबसे बड़े दावेदार के रूप में मौका मिल सके। हालांकि राज्यपाल अब सभी दावों की जांच कर रहे हैं और यह देख रहे हैं कि किसके पास स्पष्ट बहुमत है। इस मुलाकात के बाद राजनीतिक हलचल और तेज हो गई है, क्योंकि अब सबकी नजरें राज्यपाल के अगले फैसले पर टिक गई हैं।
सरकार गठन के इस पूरे घटनाक्रम में राज्यपाल की भूमिका भी काफी महत्वपूर्ण हो जाती है। अगर कोई भी पार्टी स्पष्ट बहुमत नहीं दिखा पाती, तो राज्यपाल सबसे बड़े दल को सरकार बनाने का मौका दे सकते हैं। विजय को भी इस प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है। उन्हें यह साबित करना होगा कि उनके पास बहुमत का समर्थन है। ऐसे में फ्लोर टेस्ट की स्थिति भी बन सकती है, जो आगे का रास्ता तय करेगी।
DMK और AIADMK की रणनीति से बदल सकता है खेल
तमिलनाडु की पारंपरिक राजनीति में DMK और AIADMK का दबदबा रहा है। इस बार भले ही TVK ने मजबूत एंट्री की हो, लेकिन ये दोनों दल अभी भी प्रभावशाली हैं। अगर इनमें से कोई भी दल समर्थन देने या विरोध करने का फैसला करता है, तो पूरा समीकरण बदल सकता है। इसलिए इन पार्टियों की रणनीति पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
30 से ज्यादा AIADMK विधायकों के TVK में शामिल होने के कयास
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज है कि AIADMK के 30 से ज्यादा विधायक TVK में शामिल हो सकते हैं। अगर ऐसा होता है, तो विजय के लिए बहुमत का रास्ता आसान हो जाएगा। हालांकि अभी तक इस पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। अगर ये कयास सही साबित होते हैं, तो तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है और सत्ता का समीकरण पूरी तरह बदल सकता है।
शपथ ग्रहण में देरी से बढ़ी राजनीतिक हलचल
सरकार गठन में देरी के कारण शपथ ग्रहण को लेकर भी सस्पेंस बना हुआ है। आमतौर पर चुनाव परिणाम के तुरंत बाद सरकार बन जाती है, लेकिन इस बार स्थिति अलग है। विजय के समर्थक उनके मुख्यमंत्री बनने का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन बहुमत की कमी के कारण यह प्रक्रिया लंबी खिंच सकती है। इससे राजनीतिक चर्चाएं और अटकलें लगातार बढ़ रही हैं।
जनता की उम्मीदें और बढ़ता दबाव
विजय की पार्टी से जनता को काफी उम्मीदें हैं, खासकर युवाओं और नए वोटर्स को। लोगों को लगता है कि वह नई सोच और बदलाव लेकर आएंगे। लेकिन सरकार गठन में हो रही देरी से यह दबाव भी बढ़ रहा है कि जल्द कोई स्पष्ट फैसला सामने आए। अगर स्थिति ज्यादा समय तक अनिश्चित रहती है, तो इसका असर जनता के भरोसे पर भी पड़ सकता है।
बहुमत साबित नहीं हुआ तो?
अगर कोई भी दल बहुमत साबित नहीं कर पाता, तो ऐसी स्थिति भी बन सकती है कि राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करना पड़े। हालांकि यह आखिरी विकल्प होता है, लेकिन पूरी तरह से इसे नकारा नहीं जा सकता। इसलिए सभी पार्टियां कोशिश कर रही हैं कि किसी तरह सरकार बनाई जाए। विजय के लिए यह सबसे अहम समय है, जहां हर कदम सोच-समझकर उठाना होगा।
तमिलनाडु की राजनीति में नया दौर
तमिलनाडु की राजनीति में थलपति विजय और Tamilaga Vettri Kazhagam की एंट्री ने एक नया दौर शुरू कर दिया है। हालांकि उनका प्रदर्शन शानदार रहा है, लेकिन सरकार बनाने का रास्ता अभी भी आसान नहीं है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि वह गठबंधन के सहारे सत्ता तक पहुंचते हैं या फिर राजनीतिक समीकरण कुछ और मोड़ लेता है। फिलहाल पूरे देश की नजरें तमिलनाडु की इस सियासी कहानी पर टिकी हुई हैं।









