गुजरात के वेरावल बंदरगाह पर स्थित सोमनाथ मंदिर आज सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारत की आस्था, संघर्ष और पुनर्जन्म की कहानी बन चुका है। खास बात यह है कि आज सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 साल पूरे हो गए हैं। इस ऐतिहासिक मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी सोमनाथ पहुंचे और मंदिर में पूजा-अर्चना की।

अरब सागर के किनारे खड़ा यह भव्य मंदिर 12 ज्योतिर्लिंगों में पहला माना जाता है। शिव भक्त इसे 'मृत्युंजय महादेव' के रूप में पूजते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि सोमनाथ मंदिर से जुड़े कई ऐसे रहस्य और तथ्य हैं, जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं? आइिए जानते हैं सोमनाथ मंदिर से जुड़ी 5 बेहद दिलचस्प और अनजानी बातें।


1. बाण स्तंभ: जहां से सीधे Antarctica तक कोई जमीन नहीं

सोमनाथ मंदिर के समुद्र तट पर एक खास स्तंभ लगा हुआ है, जिसे 'बाण स्तंभ' कहा जाता है। पहली नजर में यह एक साधारण पत्थर का स्तंभ लगता है, लेकिन इसकी खासियत बेहद चौंकाने वाली है। इस स्तंभ पर लिखा है कि सोमनाथ मंदिर और दक्षिण ध्रुव यानी अंटार्कटिका के बीच सीधी रेखा में कोई भी भूभाग मौजूद नहीं है। यानी समुद्र का यह रास्ता बिना किसी जमीन के सीधे दक्षिण ध्रुव तक जाता है। लोग इसे प्राचीन भारतीय खगोल विज्ञान और भूगोल ज्ञान का अद्भुत उदाहरण मानते हैं। सदियों पहले ऐसी सटीक जानकारी होना अपने आप में हैरान करने वाली बात मानी जाती है। यही वजह है कि मंदिर आने वाले श्रद्धालु इस बाण स्तंभ को खास रुचि से देखते हैं।

2. 17 बार टूटा, लेकिन हर बार फिर खड़ा हुआ सोमनाथ

सोमनाथ मंदिर का इतिहास जितना गौरवशाली है, उतना ही संघर्षों से भरा भी है। कहा जाता है कि इस मंदिर को 17 बार तोड़ा गया और हर बार इसे फिर से बनाया गया। सबसे चर्चित हमला महमूद गजनवी का माना जाता है, जिसने मंदिर को लूटकर भारी संपत्ति अपने साथ ले गया था। बाद में कई अन्य आक्रमणकारियों ने भी इसे नुकसान पहुंचाया। मुगल काल में औरंगजेब के शासन में भी मंदिर को निशाना बनाया गया। लेकिन हर बार भारतीयों की आस्था मंदिर को दोबारा खड़ा कर देती थी। यही कारण है कि सोमनाथ मंदिर को सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि हिंदू आस्था और जिद का प्रतीक माना जाता है। आज जब लोग मंदिर की भव्यता देखते हैं, तो उन्हें यह एहसास भी होता है कि यह सिर्फ पत्थरों से बनी इमारत नहीं, बल्कि सदियों की आस्था का परिणाम है।

3. कभी सोने, चांदी और चंदन से बना था मंदिर

सोमनाथ मंदिर से जुड़ी पौराणिक कथाएं भी बेहद रोचक हैं। मान्यता है कि सबसे पहला सोमनाथ मंदिर स्वयं चंद्रदेव ने सोने से बनवाया था। इसी कारण इसका नाम 'सोमनाथ' पड़ा, क्योंकि 'सोम' का अर्थ चंद्रमा होता है। इसके बाद कहा जाता है कि लंका के राजा रावण ने इस मंदिर का पुनर्निर्माण चांदी से कराया। फिर भगवान श्रीकृष्ण ने इसे चंदन की लकड़ी से बनवाया। बाद में गुजरात के राजा भीमदेव ने पत्थरों से भव्य मंदिर का निर्माण कराया। हालांकि इन कथाओं का ऐतिहासिक प्रमाण पूरी तरह नहीं मिलता, लेकिन हिंदू मान्यताओं में इनका बेहद खास महत्व है। इसी वजह से सोमनाथ मंदिर को सिर्फ धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि पौराणिक विरासत का हिस्सा भी माना जाता है।

4. 37 फीट लंबा ध्वज और दिन में 3 बार आरती

सोमनाथ मंदिर की एक और खास पहचान उसका विशाल ध्वज है। मंदिर के शिखर पर लगा ध्वज करीब 37 फीट लंबा होता है और इसे दिन में तीन बार बदला जाता है। मान्यता है कि मंदिर पर ध्वज चढ़ाने का सौभाग्य मिलना बेहद शुभ माना जाता है। कई परिवार वर्षों पहले से इसकी बुकिंग कराते हैं। इसके अलावा मंदिर में भगवान शिव की तीन प्रमुख आरतियां होती हैं। पहली आरती सुबह 7 बजे, दूसरी दोपहर 12 बजे और तीसरी शाम 7 बजे होती है। आरती के समय पूरा मंदिर घंटियों और शंखध्वनि से गूंज उठता है। समुद्र की लहरों के बीच होने वाली यह आरती श्रद्धालुओं के लिए बेहद दिव्य अनुभव मानी जाती है।

5. सरदार पटेल ने लिया था पुनर्निर्माण का संकल्प

आज जो भव्य सोमनाथ मंदिर दिखाई देता है, उसके पीछे लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल का बड़ा योगदान माना जाता है। आजादी के बाद 1947 में जब सरदार पटेल सोमनाथ पहुंचे, तब मंदिर की हालत बेहद खराब थी। कहा जाता है कि उन्होंने समुद्र का पानी हाथ में लेकर मंदिर के पुनर्निर्माण का संकल्प लिया था। इसके बाद मंदिर के पुनर्निर्माण का कार्य शुरू हुआ। देशभर के लोगों ने इसमें सहयोग दिया। 1951 में भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने मंदिर में ज्योतिर्लिंग की प्राण प्रतिष्ठा की। आज पुनर्निर्माण के 75 साल पूरे होने पर सोमनाथ फिर चर्चा में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यहां पहुंचना इस ऐतिहासिक अवसर को और खास बना रहा है।


क्या सच में हवा में तैरता था शिवलिंग?

सोमनाथ मंदिर से जुड़ा एक और रहस्य काफी चर्चित है। कहा जाता है कि मंदिर के गर्भगृह में स्थित शिवलिंग कभी हवा में तैरता था। इसके पीछे “स्यमंतक मणि” नाम की एक रहस्यमयी मणि का जिक्र मिलता है, जिसमें चुंबकीय शक्ति होने की बात कही जाती है। हालांकि इतिहासकार और वैज्ञानिक इस दावे की पुष्टि नहीं करते, लेकिन यह कहानी आज भी लोगों के बीच कौतूहल का विषय बनी हुई है।


आस्था, इतिहास और गर्व का प्रतीक है सोमनाथ

सोमनाथ मंदिर सिर्फ भगवान शिव का धाम नहीं, बल्कि भारत की संस्कृति, संघर्ष और पुनर्जन्म की पहचान है। 17 बार टूटने के बावजूद हर बार फिर खड़ा होना यह बताता है कि आस्था को मिटाया नहीं जा सकता। आज जब पुनर्निर्माण के 75 साल पूरे हो रहे हैं और प्रधानमंत्री मोदी भी इस अवसर पर सोमनाथ पहुंचे हैं, तब पूरा देश एक बार फिर इस ऐतिहासिक मंदिर की गौरवगाथा को याद कर रहा है।