ज्येष्ठ महीने का हर मंगलवार भगवान हनुमान को समर्पित माना जाता है। उत्तर भारत के कई हिस्सों में इन मंगलवारों को बड़ा मंगल या बुढ़वा मंगल कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन दिनों में बजरंगबली की पूजा का विशेष महत्व होता है। माना जाता है कि सच्चे मन से की गई आराधना, सेवा और दान से हनुमान जी प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों पर कृपा बरसाते हैं।
इस साल बड़ा मंगल और भी खास माना जा रहा है क्योंकि ज्येष्ठ महीने में कुल आठ बड़े मंगल पड़ रहे हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ऐसा संयोग लंबे समय बाद बना है। ऐसे में हनुमान भक्त पूरे उत्साह के साथ व्रत, पूजा-पाठ और भंडारों का आयोजन कर रहे हैं।
2 जून 2026 को ज्येष्ठ माह का पांचवां बड़ा मंगल मनाया जा रहा है। मान्यता है कि इस दिन अगर श्रद्धा के साथ हनुमान जी को उनकी प्रिय चीजों का भोग लगाया जाए तो जीवन में आने वाली परेशानियां कम हो सकती हैं और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
आखिर बड़ा मंगल इतना खास क्यों माना जाता है?
बड़ा मंगल को लेकर कई धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं। माना जाता है कि ज्येष्ठ माह के मंगलवार भगवान हनुमान की विशेष कृपा पाने का अवसर होते हैं। उत्तर प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों में इस पर्व का महत्व सबसे अधिक देखा जाता है। कई जगहों पर विशाल भंडारे लगाए जाते हैं और लोग राहगीरों को शरबत, पानी और भोजन वितरित करते हैं।
धार्मिक परंपराओं के अनुसार इसी अवधि में भगवान राम और हनुमान जी का मिलन हुआ था। यही कारण है कि इन मंगलवारों को विशेष श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। भक्त मानते हैं कि इन दिनों की गई पूजा जीवन में साहस, शक्ति और आत्मविश्वास बढ़ाने का काम करती है।
हनुमान जी को बूंदी के लड्डू क्यों चढ़ाए जाते हैं?
अगर हनुमान जी के प्रिय भोगों की बात की जाए तो सबसे पहले नाम बूंदी के लड्डू का आता है। देशभर के ज्यादातर हनुमान मंदिरों में भक्त लड्डू का प्रसाद चढ़ाते हुए दिखाई देते हैं। धार्मिक मान्यता है कि बड़े मंगल के दिन बूंदी या बूंदी के लड्डू अर्पित करने से बजरंगबली प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होने का आशीर्वाद देते हैं। कई लोग पूजा के बाद इन लड्डुओं को प्रसाद के रूप में परिवार और जरूरतमंद लोगों में बांटते हैं। धार्मिक दृष्टि से इसे पुण्यदायी कार्य माना जाता है।
चना और गुड़ का भोग भी माना जाता है शुभ
हनुमान जी को चना और गुड़ का भोग चढ़ाने की परंपरा भी काफी पुरानी है। खासकर भुना हुआ चना और गुड़ का प्रसाद कई मंदिरों में बड़े मंगल के दिन वितरित किया जाता है। मान्यता है कि यह भोग अर्पित करने से सुख-समृद्धि और सौभाग्य में वृद्धि होती है।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चना और गुड़ सादगी और श्रम का प्रतीक भी माने जाते हैं। यही वजह है कि बजरंगबली की पूजा में इनका विशेष स्थान बताया गया है।
सिंदूर और चमेली का तेल क्यों चढ़ाया जाता है?
हनुमान जी की पूजा में केसरिया सिंदूर और चमेली के तेल का विशेष महत्व माना जाता है। मंदिरों में अक्सर भक्त बजरंगबली को सिंदूर अर्पित करते हैं और चमेली के तेल का दीपक जलाते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और व्यक्ति के भीतर साहस और आत्मबल का विकास होता है। धार्मिक कथाओं में भी हनुमान जी और सिंदूर का संबंध बताया गया है। इसी वजह से मंगलवार और बड़े मंगल पर सिंदूर चढ़ाने की परंपरा बेहद लोकप्रिय है।
केले और मौसमी फलों का भोग
बड़े मंगल के दिन कई भक्त केले, आम और अन्य मौसमी फलों का भोग भी लगाते हैं। फल को सात्विक आहार माना जाता है और धार्मिक मान्यता है कि इसे अर्पित करने से पूजा का फल बढ़ता है। पूजा के बाद यही फल प्रसाद के रूप में लोगों में वितरित किए जाते हैं। फल चढ़ाने की परंपरा सिर्फ हनुमान पूजा तक सीमित नहीं है, बल्कि अधिकांश हिंदू धार्मिक अनुष्ठानों में इसका विशेष महत्व माना जाता है।
चूरमा का भोग भी माना जाता है प्रिय
देश के कई हिस्सों में हनुमान जी को बेसन या आटे से बना चूरमा भी अर्पित किया जाता है। घी और गुड़ या चीनी से तैयार यह भोग श्रद्धा के साथ चढ़ाया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि यह प्रसाद बजरंगबली को अत्यंत प्रिय है। राजस्थान और उत्तर भारत के कुछ क्षेत्रों में बड़े मंगल के अवसर पर चूरमा प्रसाद का वितरण भी किया जाता है।
पूजा के दौरान किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बड़े मंगल के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए और साफ-सुथरे वस्त्र पहनने चाहिए। इसके बाद हनुमान जी की पूजा कर हनुमान चालीसा, बजरंग बाण या सुंदरकांड का पाठ करना शुभ माना जाता है।
पूजा के दौरान लाल फूल, सिंदूर, चमेली का तेल और प्रिय भोग अर्पित किए जाते हैं। कई लोग इस दिन व्रत भी रखते हैं और अपनी क्षमता के अनुसार दान-पुण्य करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि सेवा और परोपकार से भी हनुमान जी प्रसन्न होते हैं।
बड़े मंगल पर भंडारों की परंपरा क्यों है?
बड़े मंगल की एक खास पहचान भंडारे भी हैं। उत्तर प्रदेश, विशेषकर लखनऊ, प्रयागराज और आसपास के क्षेत्रों में बड़े मंगल पर जगह-जगह भंडारे लगाए जाते हैं। लोग राहगीरों को भोजन, शरबत और ठंडा पानी बांटते हैं।
धार्मिक मान्यता है कि जरूरतमंदों की सहायता और भोजन कराने से बजरंगबली की विशेष कृपा प्राप्त होती है। यही कारण है कि इस दिन सेवा कार्यों को भी पूजा जितना ही महत्वपूर्ण माना जाता है।
अभी बाकी हैं कई बड़े मंगल
इस साल ज्येष्ठ माह में कुल आठ बड़े मंगल हैं। पांचवें बड़े मंगल के बाद भी 9 जून, 16 जून और 23 जून को बड़े मंगल पड़ेंगे। ऐसे में जो लोग किसी कारणवश पहले पूजा नहीं कर पाए, उनके पास अभी भी हनुमान आराधना का अवसर मौजूद है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्रत्येक बड़ा मंगल हनुमान जी की कृपा प्राप्त करने के लिए समान रूप से शुभ माना जाता है।
हमारी राय
बड़ा मंगल सिर्फ एक धार्मिक पर्व नहीं बल्कि सेवा, श्रद्धा और सकारात्मकता का भी प्रतीक है। हनुमान जी को लड्डू, चना-गुड़, फल, सिंदूर और चमेली का तेल अर्पित करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। हालांकि इन मान्यताओं को आस्था और विश्वास के रूप में ही देखा जाना चाहिए। अगर कोई व्यक्ति बड़े मंगल पर पूजा-पाठ के साथ-साथ जरूरतमंदों की मदद करता है, भोजन वितरण करता है और अपने जीवन में अनुशासन तथा सकारात्मक सोच अपनाने की कोशिश करता है, तो यही इस पर्व का सबसे बड़ा संदेश माना जा सकता है। बजरंगबली को शक्ति, सेवा और समर्पण का प्रतीक माना जाता है, इसलिए बड़ा मंगल हमें भी समाज और जरूरतमंद लोगों के प्रति अपनी जिम्मेदारी याद दिलाता है।









