अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट काउंसिल (ICC) ने ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच खेले गए मेलबर्न टेस्ट की पिच को लेकर अपना फैसला सुना दिया है। महज दो दिन में मैच समाप्त होने के बाद आईसीसी ने माना कि पिच संतुलित नहीं थी और उस पर गेंद और बल्ले के बीच बराबरी का मुकाबला देखने को नहीं मिला।

 

आईसीसी ने मेलबर्न की पिच को तीसरी कैटेगरी में रखते हुए इसे असंतोषजनक करार दिया और इसके साथ एक डिमेरिट प्वाइंट भी दिया गया। यह मुकाबला इंग्लैंड ने चार विकेट से अपने नाम किया था। मैच रेफरी जैफ क्रो ने पिच के आकलन का आधार बताते हुए कहा कि एमसीजी की पिच से गेंदबाजों को जरूरत से ज्यादा मदद मिल रही थी। पहले दिन ही 20 विकेट गिर गए थे, जबकि दूसरे दिन 16 विकेट गिरे। पूरे मैच में कोई भी बल्लेबाज अर्धशतक तक नहीं पहुंच सका। दिशानिर्देशों के अनुसार यह पिच असंतोषजनक की कैटेगरी में आती है, इसलिए इस वेन्यू को एक डिमेरिट प्वाइंट दिया गया है।

 

एशेज 2025 के चौथे टेस्ट का नतीजा दो दिन में निकल आया था। इस दौरान कुल 36 विकेट गिरे, जिनमें से 20 विकेट पहले ही दिन गिर गए थे। दोनों टीमों का कोई भी बल्लेबाज दो अंकों का स्कोर भी नहीं बना सका। पूरे मैच में स्पिन गेंदबाजों ने एक भी ओवर नहीं फेंका। सभी ओवर तेज गेंदबाजों ने किए और सभी विकेट भी उन्हीं के खाते में गए। इससे पहले पर्थ टेस्ट भी दो दिन में समाप्त हुआ था, लेकिन उस पिच को आईसीसी ने वेरी गुड रेटिंग दी थी और उसे खेलने के लिए उपयुक्त माना गया था।

 

आईसीसी कैसे करता है पिच की रेटिंग?

 

आईसीसी पिचों को चार कैटेगरियों में रेट करता है। सबसे ऊपर वेरी गुड (बहुत अच्छी) रेटिंग होती है, जिसमें गेंद और बल्ले के बीच संतुलन बना रहता है। इस स्थिति में गेंदबाजों को सीम और स्पिन मिलती है, जबकि बल्लेबाजों को भी खेलने का पर्याप्त मौका मिलता है। इसके बाद संतोषजनक कैटेगरी आती है, जिसमें गुड और एवरेज रेटिंग को शामिल किया जाता है।

 

इसके बाद असंतोषजनक और सबसे नीचे अनफिट या खराब कैटेगरी होती है। असंतोषजनक रेटिंग तब दी जाती है जब पिच से गेंदबाजों को अत्यधिक मदद मिलने लगे और विकेट लेने के मौके जरूरत से ज्यादा बनें। ऐसी स्थिति में पिच को एक डिमेरिट प्वाइंट दिया जाता है। वहीं अनफिट या खराब रेटिंग मिलने पर तीन डिमेरिट प्वाइंट दिए जाते हैं।